Chandigarh: पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की इमरजेंसी का हाल बेहाल, एक बेड पर भर्ती चार-चार बच्चे
डॉक्टरों का कहना है कि वे चाहकर भी बच्चों को भर्ती करने से इन्कार नहीं कर सकते इसलिए ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं परिजनों को अपने बच्चों की सेहत की चिंता सता रही है।
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चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर की स्थिति बेहद गंभीर है। यहां जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे बच्चों को इलाज के साथ बीमारी भी बांटी जा रही है। सेंटर की इमरजेंसी और नियोनेटल केयर यूनिट में एक-एक बेड पर तीन से चार बच्चों को भर्ती किया गया है। इससे उनमें क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा है। यहां एक बच्चा दूसरे बच्चे को लात मार रहा है तो कोई किसी की ड्रिप खींच दे रहा है। हैरानी की बात है कि मानकों की अनदेखी कर बच्चों को गंभीर स्थिति में धकेलने का काम किया जा रहा है। वहीं यहां पर तैनात डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता।
गौरतलब है कि सेंटर में प्रतिदिन सैकड़ों बच्चों को इलाज दिया जा रहा है। इमरजेंसी से ओपीडी तक स्थिति ओवरफ्लो है। 20 बेड की इमरजेंसी में 70 से 80 बच्चों को भर्ती किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे चाहकर भी बच्चों को भर्ती करने से इन्कार नहीं कर सकते इसलिए ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं परिजनों को अपने बच्चों की सेहत की चिंता सता रही है। हालांकि पीजीआई प्रशासन भी इस समस्या के समाधान के प्रयास में जुटा है लेकिन फिलहाल परिवर्तन होने में कुछ वक्त और लगेगा।
क्रॉस इन्फेक्शन आप भी जान लें
अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज से दूसरे या उसके संपर्क में आने वाले लोगों को होने वाला संक्रमण क्रॉस इन्फेक्शन कहा जाता है। इस दौरान कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
इनसे हो सकता है क्रॉस इन्फेक्शन
-चिकित्सा उपकरण
-खांसना और छींकना
-मानव संपर्क
-दूषित वस्तुओं को छूना
-गंदा बिस्तर
-लंबे समय तक कैथेटर
क्रॉस इन्फेक्शन दे सकता है यह मर्ज
दस्त, सेप्सिस, निमोनिया, डीहाइड्रेशन, मल्टीसिस्टम ऑर्गन फेल्योर के साथ कई मामलों में संक्रमण के कारण मौत भी होने का खतरा रहता है।
मानक पर जरा गौर फरमाएं
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीजों के बेड कम से कम छह फीट की दूरी पर होने चाहिएं ताकि उनके खांसने, छींकने से वहां मौजूद दूसरे मरीज को संक्रमण का खतरा न हो। वहीं, एचआईवी पॉजिटिव, हैपेटाइटिस या सेप्टिसीमिया के मामलों में मरीज से वार्ड के दूसरे मरीजों, परिजनों या स्टाफ को संक्रमण न हो सके।
पीजीआई में निर्माणाधीन मदर चाइल्ड यूनिट के साथ यूटी प्रशासन के अंतर्गत भी दो अस्पतालों में 600 बेड का अलग यूनिट बनाया जाना है। इससे बच्चों के इलाज में आ रही ऐसी समस्याओं को कम करने में काफी हद तक मदद मिलेगी। पीजीआई का संगरूर सेटेलाइट सेंटर शीघ्र ही पूरी तरह काम करने लगेगा। इससे भी लाभ मिलेगा। इस समस्या के समाधान में आसपास के राज्यों को भी मददगार की भूमिका में आना होगा। रेफर मामलों पर जब तक मानक नहीं तय किए जाते तब तक पीजीआई में मरीजों का दबाव कम नहीं होगा। -कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई
ऐसी स्थिति में एक बेड पर भर्ती सभी बच्चों को क्रॉस इन्फेक्शन हो सकता है। इमरजेंसी, एसएनसीयू जैसी यूनिटों में इसका पालन गंभीरता से होना बेहद जरूरी है क्योंकि संक्रमण के इलाज के लिए भर्ती गंभीर बच्चा अन्य संक्रमण की चपेट में आसानी से आ सकता है। -डॉ. आरएस बेदी, बाल रोग विशेषज्ञ व वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार