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Hindi News ›   Chandigarh ›   Compromised agreement between the two parties in Lok Adalat

दो परिवारों को अलग ही नहीं करती अदालत, जोड़ती भी है, ऐसे ही 2 केस

Sun, 09 Jul 2017 10:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 09 Jul 2017 10:11 AM IST
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Compromised agreement between the two parties in Lok Adalat
तलाक की दहलीज पर पहुंचे दो घरों को बसाया
अदालत दो परिवारों को अलग ही नहीं करती, बल्कि उन्हें एक करने में भी अहम भूमिका निभाती है। ऐसे ही दो मामले जिला अदालत स्थित लोक अदालत में सामने आए। इनमें तलाक की दहलीज पर पहुंचे दो परिवारों को अदालत ने काफी प्रयास के बाद दोनों में समझौता करवा दिया।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोनों परिवारों को घर जाने से पहले मंदिर जाकर माथा टेकने की सलाह दी। वहीं उन दो परिवारों की खुशी देख कोर्ट में मौजूद अन्य तलाक लेने वालों के परिवार भी सोच रहे थे कि काश उनके बच्चे भी फिर से एक हो सकें।
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केस-1 :जीरकपुर निवासी गौरव (परिवर्तित नाम) की शादी सेक्टर-32सी निवासी सोनिया (बदला हुआ नाम) से जनवरी 2014 में हुई थी। शादी के बाद दिसंबर 2015 में दोनों को एक बेटी हुई। कुछ समय बाद पति-पत्नी में विवाद होने लगा। मामला पुलिस और काउंसलिंग के बाद अदालत तक पहुंचा। नौबत तलाक तक पहुंच गई। दोनों के परिवारों ने कई बार प्रयास किए, लेकिन बात नहीं बन पाई। शनिवार को जिला अदालत स्थित नेशनल लोक अदालत में कोर्ट के विशेष प्रयास और काफी समझाने के बाद दोनों साथ रहने को मान गए। अदालत ने दोनों को एक-दूसरे में खामियां तलाशने के बजाय उन्हें दूर करने को कहा।
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दूसरा केस देखिए

Compromised agreement between the two parties in Lok Adalat
Demo Pic - फोटो : google
केस-2: चंडीगढ़ निवासी मयंक (काल्पनिक नाम) की शादी मूलरूप से पटियाला के राजपुरा निवासी सोनाक्षी (काल्पनिक नाम) से वर्ष 2011 में हुई। शादी के बाद सोनाक्षी जीएमसीएच-32 में बतौर मेडिकल लैब टेक्नीशियन काम करने लगी।

इस दौरान वह सेक्टर-37डी निवासी माता-पिता के घर रहने लगी। मयंक के अनुसार, चंडीगढ़ आने के बाद से सोनाक्षी उसके संयुक्त परिवार में रहने को इच्छुक नहीं थी। बेटे का परिवार न टूटे इसके लिए मयंक के परिजनों ने उसके लिए सेक्टर-50 में किराये का घर ले लिया। मयंक के अनुसार, इसके बाद भी सोनाक्षी खुश नहीं थी। कुछ समय बाद सोनाक्षी ने नाइट ड्यूटी न करने के कारण नौकरी छोड़ दी। इसके बाद से वह उसे विदेश में बसने को लेकर कहने लगी, जबकि मयंक परिवार के साथ रहना चाहता था। इस बात को लेकर दोनों में तलाक लेने की नौबत आ गई। शनिवार को एडीजे अनुराधा स्वामी की कोर्ट ने दोनों में सुलह करवाते हुए उन्हें एक कर घर भेजा।

लोक अदालत में कुल 1659 केसों का हुआ निपटारा

Compromised agreement between the two parties in Lok Adalat
कोर्ट - फोटो : Pintrest
लोक अदालत में कुल 1659 केसों का हुआ निपटारा
शनिवार को जिला अदालत सेक्टर-43 स्थित नेशनल लोक अदालत में कुल 1659 केसों का निपटारा हुआ। लोक अदालत के लिए चार एडीजे और अन्य सिविल जजों की बेंच ने चेक बाउंस, चालान, मुआवजे, एमएसीटी समेत अन्य तरह के केसों की सुनवाई की।

लोक अदालत में सात एमएसीटी के केसों में 32.15 लाख रुपये  मुआवजा वसूल किया गया। वहीं चेक बाउंस एनआई एक्ट के तहत 138 के 309 केस का निपटारा किया गया। चार बैंक रिकवरी के केस में 4.88 लाख, 13 वैवाहिक कलह के मामलों में 26 लाख रुपये का सेटलमेंट किया गया। इसके अलावा नगर निगम संबंधी 183 मामलों को निपटाया गया। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट के 7 केस निपटाये गए। 744 ट्रैफिक चालान से 8.10 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया।

जमीन अधिग्रहण मामलों में 30 करोड़ के वाउचर सौंपे
यूटी प्रशासन के लैंड एक्यूजिशन विभाग के खिलाफ चल रहे मुआवजे के केस में लोक अदालत के दौरान 30 करोड़ से अधिक के मुआवजे के वाउचर पीड़ितों को सौंपे गए। यूटी प्रशासन के खिलाफ कई गांव के लोगों ने कम मुआवजे को लेकर वाद दायर किए हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने पैसे जमा कराना शुरू किया था। इसके तहत लोक अदालत में 53 पीड़ितों को मुआवजे के वाउचर सौंपे गए। खुद हाईकोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने किसानों को वाउचर सौंपे।
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