Punjab: महंगी हो सकती हैं नागरिक सेवाएं, चंडीगढ़ की तरह बढ़ सकते हैं पार्किंग शुल्क, लक्ष्य पूरा करने पर जोर
वित्त मंत्री ने नागरिक सेवाओं से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए, गैर-कर राजस्व की उगाही बढ़ाने पर जोर दिया। इस बैठक में विभिन्न सेवाओं पर भी विचार किया गया, जिनमें शुल्क बढ़ाए जाने की संभावना है। इनमें सरकारी गेस्ट हाउसों के यूजर्स चार्ज दोगुना करने की बात भी कही गई।
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पंजाब में सामान्य नागरिक सेवाएं महंगी हो सकती हैं। इनमें चंडीगढ़ की तरह पंजाब में भी वाहनों का पार्किंग शुल्क भी शामिल है। राज्य सरकार यह कदम गैर-कर राजस्व की उगाही में आ रही लगातार गिरावट के मद्देनजर उठा सकती है। यह संकेत दो दिन पहले राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अलग-अलग विभागों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में दिए। हालांकि उन्होंने नागरिक सेवाओं के शुल्क में तुरंत किसी बढ़ोतरी का फैसला नहीं लिया लेकिन उन्होंने अधिकारियों से गैर-कर राजस्व की उगाही बढ़ाने और इस संबंध में निर्धारित लक्षय को पूरा करने पर जोर दिया।
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प्रदेश में परिवहन सेवाएं, चल-अचल संपंति पर विभिन्न तरह के शुल्क, सिंचाई, पेयजल, वनों और खनन से जुड़े संसाधन, संपर्क केंद्रों के जरिए मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं पर सेवा शुल्क, गैर-कर राजस्व में आते हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के फिस्कल इंडीकेटर ने वित्त विभाग की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि अप्रैल-जून की तिमाही में गैर-कर राजस्व की उगाही केवल 1123.79 करोड़ रुपये ही हुई, जो इस साल के लिए निर्धारित 7823.09 करोड़ रुपये के लक्ष्य का मात्र 14.3 फीसदी है। पिछले साल इस तिमाही में यह उगाही 1231.38 करोड़ रुपये रही थी।
वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री ने नागरिक सेवाओं से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए, गैर-कर राजस्व की उगाही बढ़ाने पर जोर दिया। इस बैठक में विभिन्न सेवाओं पर भी विचार किया गया, जिनमें शुल्क बढ़ाए जाने की संभावना है। इनमें सरकारी गेस्ट हाउसों के यूजर्स चार्ज दोगुना करने की बात भी कही गई। इसके साथ ही, यह भी फैसला लिया गया कि वित्त विभाग के अधिकारी गैर-कर राजस्व उगाही के बारे में अन्य राज्यों के कर-ढांचे का अध्ययन करें।
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गौरतलब है कि राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में कुल 98852.13 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है, लेकिन पहली तिमाही में यह प्राप्तियां 18793.67 करोड़ रुपये ही रहीं। हालांकि कर राजस्व 15673.43 करोड़ रुपये आया जोकि निर्धारित 70293.06 करोड़ रुपये के लक्ष्य का 22.30 फीसदी है। राज्य सरकार ने बाजार से कर्ज उठाने को लेकर भी 34984.15 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से 22.31 फीसदी यानी 8027.59 करोड़ रुपये पहली तिमाही में उठा लिए हैं।
राज्य सरकार के लिए एक अन्य बड़ी समस्या केंद्र से विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली ग्रांट-इन-एड के घटने का भी है। सरकार को इस साल केंद्र से 20735.08 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के लिए मिलना तय है लेकिन पहली तिमाही में केंद्र सरकार ने केवल 9.63 फीसदी यानी 1996.45 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं। आरडीएफ, एमडीएफ समेत केंद्र सरकार द्वारा अनेक योजनाओं का पैसा राज्य सरकार को अब तक चुकाया नहीं गया है।