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जान देकर 360 जिंदगियां बचाने वाली बेटी को समर्पित ये कॉफी टेबल, 22 कहानियां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 19 May 2017 09:28 AM IST
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नीरजा भनोट को समर्पित कॉफी टेबल
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अपनी जान गंवाकर 360 जिंदगियां बचाने वाली बहादुर बेटी नीरजा भनोट को कॉफी टेबल समर्पित की गई है, जिसमें 22 देशों की कहानियां हैं। अनिल शाह, सुरजीत सिंह बाबरा, शशि भाटिया...इन शख्सियतों को शायद आप न जानते हों पर ये सब अपने क्षेत्र के माहिर हैं। जिन्होंने अपने प्रोफेशन से अलग हटकर काम किया और अब बन गए हैं एक कॉफी टेबल बुक इंस्पायरिंग स्टोरीज ऑफ सक्सेसफुल इंडियन पर्सनालिटी वर्ल्डवाइड का हिस्सा।
इस किताब का विमोचन चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। यह किताब नीरजा भनोट को समर्पित है। इस मौके पर अहमदाबाद के किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन केतन शुक्ला मुख्य अतिथि रहे। इंस्पायरिंग स्टोरीज ऑफ सक्सेसफुल इंडियन पर्सनैलिटी वर्ल्डवाइड-2017 में कुल 22 पर्सनैलिटी को शामिल किया गया। इसमें कनाडा के पांच, अमेरिका के दो, यूके का एक, दुबई के एक और भारत की 12 पर्सनैलिटी शामिल हैं।
इन शख्सियतों का चयन उनकी पृष्ठभूमि और उनके संघर्ष को देखते हुए किया गया है। इनमें कनाडा के अनिल शाह, सुरजीत सिंह, शशि भाटिया, रमेश चोटई, डा. वीआई लक्ष्मणन, अमेरिका से वेंकटेश, डॉ. गुरदीप ढिल्लों, यूूके के इंद्रेश भनोट, दुबई से संजय देशमुख, चेन्नई के केएस रामाकृष्णन, संकारा रमन, बंगलूरू के सुहासनी वसंथ, दिल्ली के दीपक गुप्ता, चंडीगढ़ के विवेक अत्रे, करतार सिंह धमीजा, अहमदाबाद के डॉ. केतन शुक्ला, केएम ठक्कर, डॉ. दर्शना ठक्कर, मुंबई के हरपाल सिंह गांधी, राम माधवानी और अतुल काबसेकर शामिल हैं।
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इस किताब का विमोचन चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। यह किताब नीरजा भनोट को समर्पित है। इस मौके पर अहमदाबाद के किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन केतन शुक्ला मुख्य अतिथि रहे। इंस्पायरिंग स्टोरीज ऑफ सक्सेसफुल इंडियन पर्सनैलिटी वर्ल्डवाइड-2017 में कुल 22 पर्सनैलिटी को शामिल किया गया। इसमें कनाडा के पांच, अमेरिका के दो, यूके का एक, दुबई के एक और भारत की 12 पर्सनैलिटी शामिल हैं।
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इन शख्सियतों का चयन उनकी पृष्ठभूमि और उनके संघर्ष को देखते हुए किया गया है। इनमें कनाडा के अनिल शाह, सुरजीत सिंह, शशि भाटिया, रमेश चोटई, डा. वीआई लक्ष्मणन, अमेरिका से वेंकटेश, डॉ. गुरदीप ढिल्लों, यूूके के इंद्रेश भनोट, दुबई से संजय देशमुख, चेन्नई के केएस रामाकृष्णन, संकारा रमन, बंगलूरू के सुहासनी वसंथ, दिल्ली के दीपक गुप्ता, चंडीगढ़ के विवेक अत्रे, करतार सिंह धमीजा, अहमदाबाद के डॉ. केतन शुक्ला, केएम ठक्कर, डॉ. दर्शना ठक्कर, मुंबई के हरपाल सिंह गांधी, राम माधवानी और अतुल काबसेकर शामिल हैं।
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मुफ्त में करती हैं रुबेला वैक्सीनेशन
टीके को लेकर भ्रांतियां न फैलाए
अहमदाबाद की डा. दर्शना ठक्कर स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि स्त्रियां मेनोपोज को एक बड़ी समस्या मानती हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने म्यूजिक और अन्य माध्यमों का प्रयोग करके एक सीडी तैयार की है। जिससे स्त्रियों की काउंसलिंग की जाती है।
उन्होंने कहा कि देश में प्रति वर्ष ढाई लाख बच्चे किसी न किसी शारीरिक कमी के साथ पैदा होते हैं। इसका कारण है रुबेला वायरस, वह स्कूलों में जाकर न सिर्फ युवाओं को इस वायरस के संबंध में बताती हैं बल्कि एक हजार से ज्यादा लड़कियों को रुबेला वायरस के लिए वैक्सीन भी लगा चुकी हैं।
अमर सेवा संगम से कर रहे हैं सेवा
मस्कुलर डिस्ट्रोफी से प्रभावित चार्टर्ड एकाउंटेंट एस शंकरा रमन ने दिव्यांग लोगों की सहायता के लिए एक वैली बना दी। वह चैन्नई में प्रैक्टिस करते थे और उन्होंने वर्ष 1992 में अमर सेवा संगम के एस रामकृष्णा को ज्वाइन किया।
चंडीगढ़ में प्रेस क्लब में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमर सेवा संगम के माडल का उनका विजन दिव्यांगों को हर प्रकार की सहायता प्रदान करना रहा। उन्होंने कहा कि वास्तव में कोई काम ऐसा नहीं होता है जिसे न किया जा सके। उनका विजन भी वही है। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य अमर सेवा संगम के माध्यम से हरेक दिव्यांग को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि देश में प्रति वर्ष ढाई लाख बच्चे किसी न किसी शारीरिक कमी के साथ पैदा होते हैं। इसका कारण है रुबेला वायरस, वह स्कूलों में जाकर न सिर्फ युवाओं को इस वायरस के संबंध में बताती हैं बल्कि एक हजार से ज्यादा लड़कियों को रुबेला वायरस के लिए वैक्सीन भी लगा चुकी हैं।
अमर सेवा संगम से कर रहे हैं सेवा
मस्कुलर डिस्ट्रोफी से प्रभावित चार्टर्ड एकाउंटेंट एस शंकरा रमन ने दिव्यांग लोगों की सहायता के लिए एक वैली बना दी। वह चैन्नई में प्रैक्टिस करते थे और उन्होंने वर्ष 1992 में अमर सेवा संगम के एस रामकृष्णा को ज्वाइन किया।
चंडीगढ़ में प्रेस क्लब में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमर सेवा संगम के माडल का उनका विजन दिव्यांगों को हर प्रकार की सहायता प्रदान करना रहा। उन्होंने कहा कि वास्तव में कोई काम ऐसा नहीं होता है जिसे न किया जा सके। उनका विजन भी वही है। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य अमर सेवा संगम के माध्यम से हरेक दिव्यांग को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।