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आचार संहिता न्यायालय के आदेश का पालन करने में बाधा नहीं, हर हाल में सुनिश्चित हो पालन: हाईकोर्ट
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आदेश की प्रति को हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को पालन के लिए भेजने का दिया आदेश
कांस्टेबल के तौर पर नियुक्ति पत्र जारी होने के बावजूद नियुक्ति न देने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
चंडीगढ़। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आचार संहिता को आधार बनाकर याची को कांस्टेबल के तौर पर नियुक्ति न देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि आचार संहिता न्यायालय के आदेश का पालन करने में बाधा नहीं है। हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को सौंपते आदेशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए नरेश कुमार ने बताया था कि याची को कांस्टेबल पद पर नियुक्त करने की हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने सिफारिश की थी। इसके बाद नियुक्ति में देरी पर याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने आयोग को आदेश दिया था कि याची को नियुक्ति दी जाए। इसके बाद भी जब नियुक्ति नहीं दी गई तो उसने अवमानना याचिका दाखिल की थी। अवमानना याचिका पर पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हर हाल में याची को नियुक्ति पत्र सौंपा जाए। जब मामला दोबारा सुनवाई के लिए पहुंचा तो हरियाणा सरकार की ओर से आचार संहिता की दलील देते हुए कहा गया कि नियुक्ति पत्र जारी किया जा चुका है लेकिन ज्वाइन करवाने के आदेश का पालन नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान विभाग का कोई अधिकारी भी अदालत में पेश नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने कहा कि आचार संहिता को आधार बनाकर हमारे आदेश को लागू करने से इन्कार नहीं किया जा सकता। न्यायालय के आदेश का पालन राज्य सरकार की जिम्मेदारी है जिसमें आचार संहिता बाधा नहीं बनती है।
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कांस्टेबल के तौर पर नियुक्ति पत्र जारी होने के बावजूद नियुक्ति न देने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
चंडीगढ़। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आचार संहिता को आधार बनाकर याची को कांस्टेबल के तौर पर नियुक्ति न देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि आचार संहिता न्यायालय के आदेश का पालन करने में बाधा नहीं है। हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को सौंपते आदेशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए नरेश कुमार ने बताया था कि याची को कांस्टेबल पद पर नियुक्त करने की हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने सिफारिश की थी। इसके बाद नियुक्ति में देरी पर याची ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने आयोग को आदेश दिया था कि याची को नियुक्ति दी जाए। इसके बाद भी जब नियुक्ति नहीं दी गई तो उसने अवमानना याचिका दाखिल की थी। अवमानना याचिका पर पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हर हाल में याची को नियुक्ति पत्र सौंपा जाए। जब मामला दोबारा सुनवाई के लिए पहुंचा तो हरियाणा सरकार की ओर से आचार संहिता की दलील देते हुए कहा गया कि नियुक्ति पत्र जारी किया जा चुका है लेकिन ज्वाइन करवाने के आदेश का पालन नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान विभाग का कोई अधिकारी भी अदालत में पेश नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने कहा कि आचार संहिता को आधार बनाकर हमारे आदेश को लागू करने से इन्कार नहीं किया जा सकता। न्यायालय के आदेश का पालन राज्य सरकार की जिम्मेदारी है जिसमें आचार संहिता बाधा नहीं बनती है।