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Hindi News ›   Chandigarh ›   CM Captain Amrinder Singh Released in Amritsar Improvement Trust (AIT) scam

अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट केस में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह बरी हुए, जानिए क्या था मामला

Sat, 28 Jul 2018 10:06 AM IST
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
अमित शर्मा, अमर उजाला, मोहाली(पंजाब) Updated Sat, 28 Jul 2018 10:06 AM IST
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CM Captain Amrinder Singh Released in Amritsar Improvement Trust (AIT) scam
कैप्टन अमरिंदर सिंह
अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट घोटाले के केस में विजिलेंस अदालत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत सभी 18 आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए केस को खत्म करने का फैसला सुना दिया। हालांकि इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए महीने का समय दिया गया है। गौरतलब है कि इनमें से तीन आरोपियों की केस की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। 
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अतिरिक्त जिला सेशन जज जसविंदर सिंह ने विजिलेंस द्वारा केस रद्द करने के लिए दायर की गई दूसरी कैंसिलेशन रिपोर्ट मंजूर करते हुए 10 साल पुराने मामले में महज दो मिनट में अपना फैसला सुना दिया। शुक्रवार को केस का फैसला आना तय था। ऐसे में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत पहुंचे थे।  
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 इनकी हो गई थी सुनवाई के दौरान मौत               
जानकारी के मुताबिक इस केस में विजिलेंस की तरफ से कुल 15 लोगों पर केस दर्ज किया गया था। इनमें से तीन लोगों पूर्व मंत्री चौधरी जगजीत सिंह, विधान सभा के पूर्व स्पीकर केवल कृष्ण व रघुनाथ सहाय की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी। 
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ये आरोपी हुए बरी 
कैप्टन अमरिंदर के साथ केस से बरी किए गए आरापियों में नछत्तर सिंह, तारा सिंह (दोनों निवासी मोहाली), विक्की शर्मा, सुभाष चंद, जुगल किशोर शर्मा, बलजीत सिंह, राजीव भगत, परमिंद्र सिंह तुंग, अश्वनी कालेशाह, राजिंद्र शर्मा, गुरचरन सिंह खारा, रोहित शर्मा, महेश खन्ना, कृष्ण कुमार कौल हैं।  

यह था मामला
अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2008 में विजिलेंस ब्यूरो ने कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कुल 18 लोगों के खिलाफ अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की 32 एकड़ जमीन को गैरकानूनी तरीके से बिल्डरों को ट्रांसफर करने का केस दर्ज किया था। प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज करने की कार्रवाई विजिलेंस के फेज-8, मोहाली स्थित थाने में हुई थी।

साल 2009 में केस में चालान पेश किया गया था। हालांकि अदालत में विधानसभा चुनाव से पहले अकाली-बीजेपी सरकार के समय भी 2017 में विजिलेंस ने केस रद्द करने की अर्जी लगाई थी लेकिन उस समय जज ने कुछ ऑब्जेक्शन लगा दिए थे। साथ ही दोबारा चार बिंदुओं की जांच के आदेश दिए थे। फिर विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर ने इस केस में गवाह बनने के लिए अर्जी दायर की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया था।           


 यह सच्चाई की जीत है। इससे यह साबित हो गया है कि पिछली सरकार ने राजनीति बदले के तहत ही मुझ पर केस दर्ज करवाया था। इस मामले में 10 वर्षों में 500 से अधिक बार सुनवाई हुई। इसमें सरकार और कोर्ट का समय बर्बाद हुआ है। ऐसा नहीं होना चाहिए था।  - कैप्टन अमरिंदर सिंह, मुख्यमंत्री, पंजाब   
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