{"_id":"57e69e034f1c1b3076a83221","slug":"classical-musical-programme-in-tagore-theatre-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"शास्त्रीय संगीत से गूंजा टैगोर थियेटर, श्रोताओं ने खूब की वाहवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शास्त्रीय संगीत से गूंजा टैगोर थियेटर, श्रोताओं ने खूब की वाहवाही
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 24 Sep 2016 09:08 PM IST
विज्ञापन
टैगोर थियेटर में शास्त्रीस संगीत की शानदार प्रस्तुति
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रसार भारती की ओर से आकाशवाणी संगीत सम्मेलन 2016 कार्यक्रम के दौरान शास्त्रीय संगीत से टैगोर थियेटर चंडीगढ़ गूंज उठा। कार्यक्रम में रुद्र वीणा पर धारवाड़ की ज्योति जी हेगड़े और कोलकाता के अर्णब चैटर्जी ने शास्त्रीय संगीत पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत ज्योति जी हेगड़े ने राग सरस्वती से की जिसमें अलाप जोड़, ताल और झाला का प्रयोग किया।
उसके बाद उन्होंने राग बागेश्री पर प्रस्तुति दी। पखावज पर उनका साथ पंडित डालचंद शर्मा ने दिया। ज्योति जी हेगड़े खंडारवानी घराने की रुद्र वीणा और सितार वादक हैं। इसके बाद कोलकाता के अर्णब चैटर्जी ने संगीत पर प्रस्तुति दी। संगीत की तालीम उन्होंने अपने पिता अरुण कुमार चैटर्जी से हासिल की। अर्णब किराना घराना से ताल्लुक रखते हैं।
आयोजन के संदर्भ में जानकारी देते हुए आकाशवाणी जालंधर के प्रोग्राम हेड संतोष ऋषि ने बताया कि 1954 में आकाशवाणी संगीत सम्मेलन की शुरुआत हुई थी। ऐसे कार्यक्रम करवाने का मुख्य मकसद भारत की सांस्कृतिक विरासत का आनंद लोगों तक पहुंचाना है। यह कार्यक्रम देश में अकाशवाणी के सभी 24 सेंटरों में हर साल करवाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उसके बाद उन्होंने राग बागेश्री पर प्रस्तुति दी। पखावज पर उनका साथ पंडित डालचंद शर्मा ने दिया। ज्योति जी हेगड़े खंडारवानी घराने की रुद्र वीणा और सितार वादक हैं। इसके बाद कोलकाता के अर्णब चैटर्जी ने संगीत पर प्रस्तुति दी। संगीत की तालीम उन्होंने अपने पिता अरुण कुमार चैटर्जी से हासिल की। अर्णब किराना घराना से ताल्लुक रखते हैं।
विज्ञापन
आयोजन के संदर्भ में जानकारी देते हुए आकाशवाणी जालंधर के प्रोग्राम हेड संतोष ऋषि ने बताया कि 1954 में आकाशवाणी संगीत सम्मेलन की शुरुआत हुई थी। ऐसे कार्यक्रम करवाने का मुख्य मकसद भारत की सांस्कृतिक विरासत का आनंद लोगों तक पहुंचाना है। यह कार्यक्रम देश में अकाशवाणी के सभी 24 सेंटरों में हर साल करवाया जाता है।
विज्ञापन