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हरियाणाः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर संशय की स्थिति, कांग्रेस की गुटबाजी में उलझी
Fri, 31 May 2019 12:12 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 31 May 2019 12:12 PM IST
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कांग्रेस सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर अभी तक संशय की स्थिति बनी हुई है। विधायकों का मौजूदा संख्या बल देखें तो यह तय है कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी अब कांग्रेस के ही पाले में जाएगी। लेकिन कांग्रेस की गुटबाजी के चलते अभी तक यह निर्णय नहीं हो पा रहा है कि इस कुर्सी पर कौन कांग्रेसी विधायक काबिज होगा।
हालांकि इस कुर्सी पर कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने अपना दावा ठोक रखा है। उनका कहना है कि वह विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं, इसलिए वह अपना दावा नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए भी करती हैं। मगर उनका यह दावा बिना कांग्रेस कमेटी एवं विधायकों के समर्थन प्रस्ताव के बिना अधूरा माना जा रहा है।
हरियाणा विधानसभा के स्पीकर की तरफ से इस संबंध में दो बार उन्हें पत्र भी भेजा चुका है। जिसमें उनसे सभी विधायकों की ओर से समर्थन प्रस्ताव और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में उनके नाम पर लगाई मुहर संबंध प्रस्ताव मांगा गया है। मगर अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं मिला है और न ही हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पर कोई फैसला लिया है।
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हालांकि इस कुर्सी पर कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने अपना दावा ठोक रखा है। उनका कहना है कि वह विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं, इसलिए वह अपना दावा नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए भी करती हैं। मगर उनका यह दावा बिना कांग्रेस कमेटी एवं विधायकों के समर्थन प्रस्ताव के बिना अधूरा माना जा रहा है।
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हरियाणा विधानसभा के स्पीकर की तरफ से इस संबंध में दो बार उन्हें पत्र भी भेजा चुका है। जिसमें उनसे सभी विधायकों की ओर से समर्थन प्रस्ताव और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में उनके नाम पर लगाई मुहर संबंध प्रस्ताव मांगा गया है। मगर अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं मिला है और न ही हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पर कोई फैसला लिया है।
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कोई विवाद, विरोध नहीं चाहते स्पीकर
हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए विधायक का नाम तय करने से पहले स्पीकर किसी भी प्रकार का कोई विवाद या विरोध की गुंजाइश नहीं चाहते हैं। स्पीकर चाहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष के चयन में पहले की तरह पूरी प्रक्रिया अपनाई जाए।
इस प्रक्रिया के तहत संबंधित सियासी दल की प्रदेश इकाई के पदाधिकारी एक बैठक कर उस विधायक के नाम पर मुहर लगाते हैं, जिसे पार्टी नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहती है, इसी बैठक में पार्टी के अन्य विधायक भी नेता प्रतिपक्ष बनने वाले विधायक को अपना समर्थन देते हैं।
बैठक के बाद ये प्रस्ताव हरियाणा विधानसभा स्पीकर को भेजा जाता है, जिसके आधार पर स्पीकर संबंधित पार्टी के विधायक को नेता प्रतिपक्ष घोषित करता है। सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष की घोषणा के बाद संबंधित विधायक को कैबिनेट मंत्री जैसा दर्जा व सुविधाएं मिलती है। विधानसभा में उन्हें अलग ऑफिस, स्टाफ, सिक्योरिटी समेत सरकारी आवास और गाड़ी भी उपलब्ध करवाई जाती है।
ऐसी स्थिति में किसी भी विवाद से बचने केलिए प्रक्रिया को फॉलो करना जरूरी है। ताकि पार्टी का कोई अन्य विधायक या पार्टी अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष की नियुक्त पर बाद में कोई सवाल न उठाए। अब देखना यह है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अन्य विधायक किरण चौधरी केनाम पर मुहर लगाते हैं या नहीं।
इस प्रक्रिया के तहत संबंधित सियासी दल की प्रदेश इकाई के पदाधिकारी एक बैठक कर उस विधायक के नाम पर मुहर लगाते हैं, जिसे पार्टी नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहती है, इसी बैठक में पार्टी के अन्य विधायक भी नेता प्रतिपक्ष बनने वाले विधायक को अपना समर्थन देते हैं।
बैठक के बाद ये प्रस्ताव हरियाणा विधानसभा स्पीकर को भेजा जाता है, जिसके आधार पर स्पीकर संबंधित पार्टी के विधायक को नेता प्रतिपक्ष घोषित करता है। सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष की घोषणा के बाद संबंधित विधायक को कैबिनेट मंत्री जैसा दर्जा व सुविधाएं मिलती है। विधानसभा में उन्हें अलग ऑफिस, स्टाफ, सिक्योरिटी समेत सरकारी आवास और गाड़ी भी उपलब्ध करवाई जाती है।
ऐसी स्थिति में किसी भी विवाद से बचने केलिए प्रक्रिया को फॉलो करना जरूरी है। ताकि पार्टी का कोई अन्य विधायक या पार्टी अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष की नियुक्त पर बाद में कोई सवाल न उठाए। अब देखना यह है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अन्य विधायक किरण चौधरी केनाम पर मुहर लगाते हैं या नहीं।
अभय से छिन गई थी कुर्सी
हरियाणा विधानसभा में वर्ष 2014 के चुनाव के तहत 19 व 1 समर्थक विधायक वाली इनेलो मुख्य विपक्ष दल था। लिहाजा इनेलो विधायक अभय चौटाला को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। लेकिन वर्ष 2019 आते-आते कई विधायक इनेलो छोड़कर चले गए। 2 इनेलो विधायकों का निधन हो गया, 3 विधायक पार्टी छोड़ गए और 4 विधायक अन्य सियासी दल जजपा के समर्थक बन गए।
अब इनेलो विधायकों की संख्या कांग्रेस के विधायकों का संख्या बल 17 से कम हो गई है। जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने स्पीकर को अपना सशर्त इस्तीफा भेजा था, जिसे स्वीकार करने की बजाए स्पीकर ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें पद से ही हटा दिया था। तब से पद खाली ही पड़ा है।
अब इनेलो विधायकों की संख्या कांग्रेस के विधायकों का संख्या बल 17 से कम हो गई है। जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने स्पीकर को अपना सशर्त इस्तीफा भेजा था, जिसे स्वीकार करने की बजाए स्पीकर ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें पद से ही हटा दिया था। तब से पद खाली ही पड़ा है।