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कार्रवाईः चंडीगढ़ में फीस जमा न करने वाले 2 हजार 674 वेंडरों के लाइसेंस कर दिए गए निरस्त
Tue, 03 Dec 2019 12:17 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 12:17 PM IST
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सेक्टर 22 में फड़ी बाजार
- फोटो : amar ujala
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वेंडिंग लाइसेंस की फीस नहीं जमा कराने वाले 2674 वेंडरों के लाइसेंस नगर निगम ने निरस्त कर दिए हैं। अधिकारियों ने बताया 3200 वेंडरों को लाइसेंस फीस जमा करानी थी, जिनमें से महज 526 वेंडरों ने ही अपनी फीस जमा कराई है। फीस जमा कराने के लिए निगम ने 30 नवंबर तक का समय दिया था। उसके बाद लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
सोशल डेवलपमेंट ऑफिसर विवेक त्रिवेदी ने बताया कि कई वेंडरों ने अपनी वेंडिंग लाइसेंस की फीस सालों से जमा नहीं की थी। ऐसे वेंडरों के खाते निगम से लॉक कर दिए गए थे। पहले नियम था कि वेंडर छह माह तक ही लेट फीस जमा कर सकते थे। उसके बाद टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में तय किया गया कि समय सीमा का बंधन हटा दिया जाए।
उसके बाद लगभग 3200 वेंडर ऐसे मिले, जिन्होंने कई सालों से लाइसेंस फीस जमा नहीं की थी। ऐसे वेंडरों को 30 नवंबर तक समय देने का निर्णय लिया गया और 10 रुपये प्रतिदिन लेट फीस के साथ हर माह की फीस का भुगतान करने को कहा गया था। साथ ही तीन हजार रुपये स्मार्ट कार्ड के लिए देना था।
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शुरुआत में वेंडरों ने अपने खाते तो अनलॉक करवा लिए लेकिन बाद में ई संपर्क से फीस ही नहीं भरी। 30 नवंबर तक मात्र 526 वेंडरों ने ही फीस भरी। बचे हुए 2674 वेंडरों के लाइसेंस निगम ने निरस्त कर दिए हैं। फीस भरने के लिए निगम की ओर लगातार जागरूक अभियान भी चलाया गया था। बावजूद इसके वेंडरों ने रुचि नहीं दिखाई।
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सोशल डेवलपमेंट ऑफिसर विवेक त्रिवेदी ने बताया कि कई वेंडरों ने अपनी वेंडिंग लाइसेंस की फीस सालों से जमा नहीं की थी। ऐसे वेंडरों के खाते निगम से लॉक कर दिए गए थे। पहले नियम था कि वेंडर छह माह तक ही लेट फीस जमा कर सकते थे। उसके बाद टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठक में तय किया गया कि समय सीमा का बंधन हटा दिया जाए।
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उसके बाद लगभग 3200 वेंडर ऐसे मिले, जिन्होंने कई सालों से लाइसेंस फीस जमा नहीं की थी। ऐसे वेंडरों को 30 नवंबर तक समय देने का निर्णय लिया गया और 10 रुपये प्रतिदिन लेट फीस के साथ हर माह की फीस का भुगतान करने को कहा गया था। साथ ही तीन हजार रुपये स्मार्ट कार्ड के लिए देना था।
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शुरुआत में वेंडरों ने अपने खाते तो अनलॉक करवा लिए लेकिन बाद में ई संपर्क से फीस ही नहीं भरी। 30 नवंबर तक मात्र 526 वेंडरों ने ही फीस भरी। बचे हुए 2674 वेंडरों के लाइसेंस निगम ने निरस्त कर दिए हैं। फीस भरने के लिए निगम की ओर लगातार जागरूक अभियान भी चलाया गया था। बावजूद इसके वेंडरों ने रुचि नहीं दिखाई।