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लुधियानाः 1144 करोड़ रुपये के सिटी सेंटर घोटाले में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत 31 लोग बरी

Thu, 28 Nov 2019 09:16 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 28 Nov 2019 09:16 AM IST
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City Center Scam Ludhiana Case Verdict, CM Captain Amrinder Singh
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
13 साल चले 1144 करोड़ रुपये के लुधियाना के सिटी सेंटर घोटाले के मामले में बुधवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को बड़ी राहत मिली है। विजिलेंस विभाग की तरफ से दाखिल कैंसलेशन रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। जिला सेशन जज गुरवीर सिंह की अदालत में सुनवाई के समय खुद कैप्टन अमरिंदर सिंह कोर्ट में पेश हुए।
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वहां अदालत ने विजिलेंस रिपोर्ट को स्वीकार करने का आदेश सुनाया। फैसले के बाद सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित 31 आरोपियों को बरी कर दिया गया। हालांकि विजिलेंस ने इस मामले में 36 के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें से 5 की मौत हो चुकी है।
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गौरतलब है कि साल 1979 में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने सिटी सेंटर योजना को तैयार किया था। शहीद भगत सिंह नगर की 475 एकड़ स्कीम में 26.44 एकड़ जगह सिटी सेंटर के लिए आरक्षित रखी गई थी। इस योजना पर कोई काम नहीं हो रहा था। आखिरकार साल 2005 में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर इस तैयार करने का खाका बनाया गया।
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इसमें मॉडर्न शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, सुपर मार्केट, ऑफिस, ट्रेड सेंटर, फूड प्लाजा, सिटी म्यूजियम, आईटी सेंटर, हेल्थ सेंटर, बैंक, एससीओ (शॉप कम ऑफिस) तैयार किए जाने थे। योजना के तहत कुल 10 लाख 70 हजार 553 वर्ग फुट एरिया रखा गया था। इसमें पार्किंग एरिया को जोड़ लिया जाए तो यह 26 लाख 89 हजार 604 वर्ग फुट एरिया बनता है।

इसकी ऊंचाई 100 फुट तक रखी गई थी। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए मैसर्ज टुडे होम्स को काम दिया गया था। इस मामले में वर्क ऑर्डर जारी करने में घालमेल करने के आरोप जड़े गए थे। इसमें टेंडर के दस्तावेजों से छेड़छाड़ की बात भी विजिलेंस ने अपनी पहली रिपोर्ट में कही थी। साथ ही 100 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर देने के आरोप लगाए थे।

साल 2007 में विजिलेंस ने दर्ज किया 36 के खिलाफ मामला

सिटी सेंटर में घोटाले को लेकर साल 2006 में सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। उस समय कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम थे। कांग्रेस के सत्ता से बाहर होते ही अकाली-भाजपा सरकार ने इसकी जांच शुरू की। जांच के बाद 23 मार्च 2007 को कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

यह मामला तत्कालीन एसएसपी विजिलेंस कंवलजीत सिंह ने दर्ज करवाया था। दिसंबर 2007 में 130 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई थी। साल 2017 में कैप्टन के मुख्यमंत्री बनने के बाद फिर से यह मामला चर्चा में आ गया। विजिलेंस ब्यूरो ने दोबारा मामले की जांच करने के बाद लुधियाना की अदालत में अगस्त 2017 में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।

इस रिपोर्ट में विजिलेंस ब्यूरो का कहना था कि इसमें कोई मामला नहीं बनता है। विजिलेंस की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ सबसे पहले तत्कालीन एसएसपी कंवलजीत सिंह ने जिला अदालत में याचिका दायर की थी लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद विधायक सिमरजीत सिंह बैंस और पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी ने भी याचिका दायर की थी। इन दोनों की याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा: बैंस

जिला सेशन अदालत के फैसले के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह यह नहीं सोचे की वह पाक साफ हो गए है। मैंने विजिलेंस क्लोजर रिपोर्ट को लेकर जिला सेशन अदालत में पार्टी बनाने की याचिका दायर की जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, इसमें पंजाब को नोटिस किया गया था। इससे आगे यह मामला बढ़ा नहीं। वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
- सिमरजीत सिंह बैंस, विधायक

सिटी सेंटर घपला मेरे खिलाफ एक गलत केस था। राजनीतिक रंजिश पर यह मेरी जीत है। मुझे पहले दिन से पूरा भरोसा था कि अदालत में न्याय जरूर होगा। आज अदालत ने जो फैसला दिया कि उससे न्याय व्यवस्था में मेरा विश्वास मजबूत हुआ है। अदालत के सामने सुबूत के तौर पर पेश किए गए मनघड़ंत झूठों का कोई अस्तित्व नहीं था। इन झूठों से पूरी तरह पर्दा उठाया गया है।
- कैप्टन अमरिंदर सिंह, सीएम पंजाब

13 साल मैने एक झूठ का दंश झेला है लेकिन आज अदालत के फैसले से बड़ी राहत मिली है। उस समय मैं पार्षद होने के साथ एक ट्रस्टी भी था। यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित था। मुझे पहले से पता था कि इसमें कुछ नहीं होगा। पंजाब के लिए यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था। अब देखते है कि इस अधूरे पड़े प्रोजेक्ट पर आगे किया जा सकता है।
- संजय तलवार, विधायक कांग्रेस

कब क्या हुआ

मार्च 2007: पंजाब विजिलेंस विभाग ने कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित 36 के खिलाफ मामला दर्ज किया।
दिसंबर 2007: विजिलेंस विभाग ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
जून,2013: प्रवर्तन निदेशालय ने ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
20 अगस्त 2017: सतर्कता फाइलों में मामले की रिपोर्ट बंद कर दी।
30 अगस्त 2018: पूर्व एसएसपी कंवरजीत सिंह ने अर्जी दाखिल कर धमकाने का आरोप लगाया।
15 नवंबर 2018: विजिलेंस क्लोजर रिपोर्ट पर बहस शुरू।
28 नवंबर 2018: पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी ने अदालत में उनका पक्ष सुनने की याचिका दायर की।
27 फरवरी 2019: अदालत ने सैनी की याचिका को खारिज किया।

इन लोगों पर था आरोप

1. कैप्टन अमरेंद्र सिंह सीएम
2. अश्वजीत सिंह
3. रणइंदर सिंह उर्फ टिकू
4. रमिंदर सिंह उर्फ रिचि
5. चौधरी जगजीत सिंह (पूर्व मंत्री)
6. सुनील कुमार शर्मा
7. विनय सुभिखी
8. सैयद अरशद हुसैन नकवी
9. गुलशन कुमार गंभीर
10 सौरभ गुप्ता
11. संजीव कुमार गुप्ता
12. कमल कुमार वर्मा
13. अमित सरदाना
14. मनमोहन सिंह (एसई)
15. दयाल चंद गर्ग (ईओ)
16. चेतन गुप्ता
17. हरप्रीत सिंह संधू
18. अशोक चोपड़ा
19. बलजीत सिंह
20. जगतार सिंह
21. अरुण नैयर
22. दविंदर कुमार आनंद
23. सुनीत गंभीर
24. निताशा गंभीर
25. विक्रम गंभीर
26. इशु गंभीर
27. संजय जेतवानी
28. अनिल नरूला
29. गुरदयाल कौर खंगूड़ा
30. नवकार जैन
31. भूपिंदर सिंह बसंत
32. सुरिंदर पाल सिंह बिंद्रा
33. संजय तलवाड़ (विधायक)
34. मलकीत कौर
35. विजय कुमार
36.अश्वजीत सिंह

इनकी हो चुकी है मौत

1. चौधरी जगजीत सिंह
2. मलकीत कौर
3. विजय कुमार
4. परमजीत सिंह सीबिया
5. सुनील शर्मा

यह लोग उपस्थित थे अदालत परिसर में
कैप्टन अमरिंदर सिंह, रणइंदर सिंह (बेटा), रमिंदर सिंह (दामाद), विधायक संजय तलवार मुख्यतौर पर अदालत में पहुंचे। इसमें इशु गंभीर बीमार होने के कारण अदालत में पेश नहीं सकी। इसके अलावा मंत्री भारत भूषण आशु, भरत इंदर सिंह चहल, कैप्टन संदीप संधू, मेयर बलकार संधू, ट्रस्ट चेयरमैन रमन सुब्रमण्यम, शहरी प्रधान अश्वनी शर्मा, अमरजीत सिंह टिक्का सहित कई दिग्गज मौके पर मौजूद थे।
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