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पंजाब की छह हाई सिक्योरिटी जेलों में सीआईएसएफ होगी तैनात, समीक्षा बैठक में लिया गया फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Jun 2018 09:42 AM IST
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पंजाब की जेलों की सुरक्षा पुख्ता बनाने की कोशिश के तौर पर पंजाब सरकार ने जुलाई के अंत तक उच्च सुरक्षा वाली 10 में से 6 जेलों में चेकिंग के लिए सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) तैनात करने का फैसला किया है। यह फैसला पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय मीटिंग के दौरान लिया गया। मुख्यमंत्री ने 6 जेलों में सीआईएसएफ तैनात करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए केंद्रीय अथॉरिटी के साथ तालमेल करने के लिए जेल विभाग को हुक्म दिए।
जेल विभाग को सीआईएसएफ की दो कंपनियां केंद्र से प्राप्त हो रही हैं और राज्य की उच्च सुरक्षा वाली 6 जेलों में से प्रत्येक में एक दस्ता तैनात करने की योजना है। सीआईएसएफ के मुलाजिमों को जेल के मुख्य फाटकों के बीच ड्योढ़ी गलियारे में तैनात किया जायेगा। जहां इस समय चेकिंग जेल वार्डनों/मैटरनों या पीईएससीओ जवानों द्वारा की जाती है। बाहरी दीवारों के पास निगरानी टावरों पर पंजाब पुलिस और पंजाब होम गार्ड जवानों की तैनाती जारी रहेगी।
राज्य की जेलों में सुरक्षा के उल्लंघन और मोबाइल फोन पर नशे आदि अंदर चले जाने पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने जेलों के अंदर क्लोज सर्किट टेलिविजऩ कैमरे (सीसीटीवी) स्थापित करने को यकीनी बनाने के लिए भी जेल विभाग को निर्देश दिए है।
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उन्होंने जेलों में पकड़े जाने वाले मोबाइल फोनों और नशों के लिए कानून को और सख्त बनाने के लिए कदम उठाने के लिए भी हुक्म दिए है। उन्होंने मौजूदा सजा के अलावा इसके लिए अलग सज़ा की व्यवस्था करने के लिए भी कहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी को हुक्म दिए है। उन्होंने कैदियों को मोबाइल फोन और नशे आदि की सप्लाई में सुविधा उपलब्ध करवाने के दोषी पुलिस मुलाजिमों या अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है।
इससे पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ने मुख्यमंत्री को बताया कि पंजाब की जेलों में बंद कुल 224 गैंगस्टरों में से 86 ए श्रेणी के हैं। जनवरी, 2017 से 2000 से भी अधिक मोबाइल कैदियों से पकड़े गए हैं।
कैदियों से वर्जित नशा पकड़े जाने के विरुद्ध 389 केस दर्ज किए है। पुलिस और जेल अधिकारियों को गैंगस्टरों की तरफ से मौत की धमकियां दिए जाने के संबन्ध में मुख्यमंत्री ने खतरनाक अपराधियों और गैंग्स्टरों के साथ सीधे तौर पर निपटने वाले पुलिस मुलाजिमों और उनके परिवारों की सुरक्षा में वृद्धि करने के हुक्म दिए हैं। उन्होंने राज्यभर के जेल सुपरिंडेंटों को निजी गाड़ियां उपलब्ध करवाने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को कहा।
इस अवसर पर जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, मुख्य सचिव करन अवतार सिंह, डीजीपी इंटेलिजेंस दिनकर गुप्ता, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तेजवीर सिंह, एडीजीपी जेल इकबाल प्रीत सिंह सहोता और आईजी जेल आरके अरोड़ा उपस्थित थे।
जेलों को अत्याधुनिक सामान खरीदने को मिलेंगे 29 करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार की कोशिशों में फंडों की कोई भी कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने वित्त विभाग को निर्देश दिए कि वह राज्य की जेलों के लिए जरूरी उच्च तकनीक के साजो-सामान की खरीद के लिए विभाग को 29 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएं।
मुख्यमंत्री ने डीएफएमडीज/एचएचएमडीज, एक्स-रे, बैगेज मशीन, डीप सर्च मेटल डिटेक्टर, पोल मेटल डिटेक्टर, फुल बॉडी स्कैनर, बूम बैरियर्ज, ड्रैगन और फ्लड लाइट जैसे साजो-समान की ज़रूरत संबंधी व्यापक योजना तैयार करने के लिए जेल विभाग को कहा है।
पिछले एक साल के दौरान 550 वॉच एंड वार्ड मुलाजिम भर्ती किए जाने पर संतुष्टि प्रकट करते हुए बाकी खाली पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा है।
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जेल विभाग को सीआईएसएफ की दो कंपनियां केंद्र से प्राप्त हो रही हैं और राज्य की उच्च सुरक्षा वाली 6 जेलों में से प्रत्येक में एक दस्ता तैनात करने की योजना है। सीआईएसएफ के मुलाजिमों को जेल के मुख्य फाटकों के बीच ड्योढ़ी गलियारे में तैनात किया जायेगा। जहां इस समय चेकिंग जेल वार्डनों/मैटरनों या पीईएससीओ जवानों द्वारा की जाती है। बाहरी दीवारों के पास निगरानी टावरों पर पंजाब पुलिस और पंजाब होम गार्ड जवानों की तैनाती जारी रहेगी।
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राज्य की जेलों में सुरक्षा के उल्लंघन और मोबाइल फोन पर नशे आदि अंदर चले जाने पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने जेलों के अंदर क्लोज सर्किट टेलिविजऩ कैमरे (सीसीटीवी) स्थापित करने को यकीनी बनाने के लिए भी जेल विभाग को निर्देश दिए है।
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उन्होंने जेलों में पकड़े जाने वाले मोबाइल फोनों और नशों के लिए कानून को और सख्त बनाने के लिए कदम उठाने के लिए भी हुक्म दिए है। उन्होंने मौजूदा सजा के अलावा इसके लिए अलग सज़ा की व्यवस्था करने के लिए भी कहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी को हुक्म दिए है। उन्होंने कैदियों को मोबाइल फोन और नशे आदि की सप्लाई में सुविधा उपलब्ध करवाने के दोषी पुलिस मुलाजिमों या अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए कहा है।
इससे पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ने मुख्यमंत्री को बताया कि पंजाब की जेलों में बंद कुल 224 गैंगस्टरों में से 86 ए श्रेणी के हैं। जनवरी, 2017 से 2000 से भी अधिक मोबाइल कैदियों से पकड़े गए हैं।
कैदियों से वर्जित नशा पकड़े जाने के विरुद्ध 389 केस दर्ज किए है। पुलिस और जेल अधिकारियों को गैंगस्टरों की तरफ से मौत की धमकियां दिए जाने के संबन्ध में मुख्यमंत्री ने खतरनाक अपराधियों और गैंग्स्टरों के साथ सीधे तौर पर निपटने वाले पुलिस मुलाजिमों और उनके परिवारों की सुरक्षा में वृद्धि करने के हुक्म दिए हैं। उन्होंने राज्यभर के जेल सुपरिंडेंटों को निजी गाड़ियां उपलब्ध करवाने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को कहा।
इस अवसर पर जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, मुख्य सचिव करन अवतार सिंह, डीजीपी इंटेलिजेंस दिनकर गुप्ता, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तेजवीर सिंह, एडीजीपी जेल इकबाल प्रीत सिंह सहोता और आईजी जेल आरके अरोड़ा उपस्थित थे।
जेलों को अत्याधुनिक सामान खरीदने को मिलेंगे 29 करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार की कोशिशों में फंडों की कोई भी कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने वित्त विभाग को निर्देश दिए कि वह राज्य की जेलों के लिए जरूरी उच्च तकनीक के साजो-सामान की खरीद के लिए विभाग को 29 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएं।
मुख्यमंत्री ने डीएफएमडीज/एचएचएमडीज, एक्स-रे, बैगेज मशीन, डीप सर्च मेटल डिटेक्टर, पोल मेटल डिटेक्टर, फुल बॉडी स्कैनर, बूम बैरियर्ज, ड्रैगन और फ्लड लाइट जैसे साजो-समान की ज़रूरत संबंधी व्यापक योजना तैयार करने के लिए जेल विभाग को कहा है।
पिछले एक साल के दौरान 550 वॉच एंड वार्ड मुलाजिम भर्ती किए जाने पर संतुष्टि प्रकट करते हुए बाकी खाली पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा है।