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CII सेशनः भारत के साथ व्यापार संबंधों पर खुलकर बोलीं अमेरिकी नेता

Wed, 08 Jun 2016 07:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 08 Jun 2016 07:05 PM IST
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CII chandigarh, CII interactive session, Indo-USA business relations, usa president election
सीआईआई चंडीगढ़ का इंटरे​क्टिव सेशन - फोटो : अमर उजाला
सीआईआई चंडीगढ़ के इंटरेक्टिव सेशन में भारत के साथ व्यापार संबंधों पर अमेरिकी नेता जॉयसी पैपिन ने खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) में नए राष्ट्रपति के पद संभालने के बाद भारत के साथ किए गए व्यापार समझौतों में तेजी आएगी, जिससे दोनों देशों के विकास को गति मिलेगी।
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वाशिंगटन के स्टेट पॉलिटिकल लीडर जैफ मोरिस (डेमोक्रेट) और मिनेसोता की स्टेट पॉलिटिकल लीडर जॉयसी पैपिन ने ‘यूएस इलेक्शन: प्रोसेस एंड मैकेनिक्स तथा यूनाइटेड स्टेट्स की भारतीय व्यापार को लेकर नई प्रशासनिक नीतियों के प्रभाव’ पर सीआईआई द्वारा आयोजित इंटरेक्टिव सेशन में बोल रही थीं।
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जॉयसी पैपिन ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही दुनिया के सबसे पुराने और बड़े लोकतंत्र हैं और ऐसे में इनके हित लगभग समान हैं। उन्होंने कहा कि आज के ग्लोबलाइजेशन के दौर में व्यापार को बढ़ने दुनिया के अन्य स्थानों पर फैलने से नहीं रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि नए राष्ट्रपति के पद संभालने के बाद दोनों देशों के बीच हो रहे व्यापार में और बढ़ोत्तरी होगी।
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वहीं जैफ मोरिस (डेमोक्रेट) ने कहा कि यूएस ऐसे देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है जो उसी की प्रकार विश्व में शांति और उन्नति को अपना ध्येय बना चुके हों। उन्होंने कहा कि वह और सरल इमीग्रेशन पॉलिसी अपनाने को तैयार हैं, जिससे व्यापार की संभावनाएं बढ़ें। इसके साथ ही भारत के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए विशेष व्यापार अनुबंध करने के लिए भी तैयार हैं।

सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के पूर्व चेयरमैन मनमोहन कोहली ने कहा कि एक संपन्न लोकतंत्र होना हर राष्ट्र का सपना होता है ऐसे में दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों को एक दूसरे के अनुभवों से सीखना चाहिए और ऐसे में यूएस इलेक्शन में दिलचस्पी स्वाभाविक है।


भारत और अमेरिका की रणनीतिक पार्टनरशिप केवल व्यवहारिक संबंध नहीं है बल्कि यह दो सबसे बड़े लोकतंत्रों द्वारा स्थाई और लंबे समय तक चलने वाली रणनीतिक पार्टनरशिप है। इसका उद्देश्य बड़ा है बजाय की छोटे लक्ष्यों के। ऐसे में दोनों देशों को आपस में ज्यादा से ज्यादा संवाद करने की जरूरत है।
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