चिनूक ने सबको चौंकाया: चंडीगढ़ से नॉन स्टाप पहुंचा असम, सात घंटे 30 मिनट में तय की 1910 किमी की दूरी, देश में यह पहली बार
सीएच-47 एफ (आई) चिनूक एक उन्नत मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय सशस्त्र बलों को लड़ाकू और मानवीय मिशनों के पूरे स्पेक्ट्रम में बेजोड़ सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता प्रदान करता है।
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भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने असंभव को संभव कर दिखाया गया। हेलीकॉप्टर ने अपनी क्षमताओं को एक बार फिर साबित किया है। चिनूक हेलीकॉप्टर ने चंडीगढ़ से असम के जोरहट के लिए उड़ान भरी। खास बात यह है कि चिनूक ने यह दूरी नॉन स्टाफ तय की। चिनूक ने सात घंटे 30 मिनट लगातार उड़ान भरी और 1910 किलो मीटर का सफर तय किया। बता दें कि यह देश में किसी हेलीकॉप्टर द्वारा नॉन स्टाप तय की सबसे अधिक दूरी है। देश में पहली बार यह कारनामा चिनूक ने कर दिखाया है। भारत ने अमेरिका से चिनूक हेलीकॉप्टर खरीदे हैं। देश के पास 15 चिनूक हेलीकॉप्टर हैं।
2015 में हुआ था चिनूक खरीदने का करार
सितंबर 2015 में भारत और अमेरिकी सरकार के बीच 15 चिनूक हेलीकॉप्टर्स खरीदने के लिए करार किया गया था। अगस्त 2017 में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंग से 4168 करोड़ रुपये की लागत से छह अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, 15 चिनूक भारी मालवाहक हेलीकॉप्टर अन्य हथियार प्रणाली खरीदने के लिए मंजूरी प्रदान की थी। 2019 में चार हेलीकॉप्टरों की पहली खेप गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंची थी। सीएच-47 एफ (आई) चिनूक एक उन्नत मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय सशस्त्र बलों को लड़ाकू और मानवीय मिशनों के पूरे स्पेक्ट्रम में बेजोड़ सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता प्रदान करता है।
इसकी खासियत है तेज गति
- पहले चिनूक ने 1962 में उड़ान भरी थी। यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है।
- चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना की खास ताकत है। इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था। वियतनाम से लेकर इराक के युद्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है।
- भारत ने जिस चिनूक को खरीदा है, उसका नाम है CH-47 एफ है।
- यह 9.6 टन वजन उठा सकता है, जिससे भारी मशीनरी, तोप और बख्तरबंद गाड़ियां लाने-ले जाने में सक्षम है।
- यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है।
- बोइंग के मुताबिक, अपाचे दुनिया के सबसे अच्छे लड़ाकू हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। वहीं, चिनूक हेलिकॉप्टर बहुत ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है।
- चिनूक भारी-भरकम सामान को भी काफी ऊंचाई पर आसानी से पहुंचा सकता है। अमेरिकी सेना लंबे वक्त से अपाचे और चिनूक का इस्तेमाल कर रही है।
- भारत अपाचे का इस्तेमाल करने वाला 14वां और चिनूक को इस्तेमाल करने वाला 19वां देश है।
- बोइंग ने 2018 में वायुसेना के पायलटों और फ्लाइट इंजीनियरों को चिनूक हेलिकॉप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग भी दी थी।
IAF’s Chinook helicopter undertook the longest non-stop helicopter sortie in India, flying from Chandigarh to Jorhat (Assam). The 1910 kms route was completed in 7 hrs 30 min & made possible by capabilities of Chinook along with operational planning and execution by the IAF: IAF pic.twitter.com/mfuURTNOVW
— ANI (@ANI) April 11, 2022