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चंडीगढ़ः ट्रिब्यूनल ने जारी किए आदेश, 66 करोड़ के वैट घोटाले में फिर शुरू होगी सुनवाई
Sat, 07 Sep 2019 10:28 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Sep 2019 10:28 AM IST
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इंड स्विफ्ट कंपनी द्वारा किए गए 66 करोड़ के वैट घोटाले में नया मोड़ आ गया है। कंपनी की ओर से एडिशनल एक्साइज कमिश्नर कोर्ट में सुनवाई फीस यूटी खाते में 17 करोड़ जमा कर दी गई है इसलिए वैट ट्रिब्यूनल ने एडिशनल कोर्ट को इंड स्विफ्ट कंपनी की अपील को मेरिट के आधार पर सुनने का आदेश दिया है। वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट ने कहा कि जब कंपनी की ओर से पूरी फीस जमा कर दी गई है तो फिर कंपनी की अपील को अनदेखा क्यों किया जा रहा है। इसे मेरिट के आधार पर सुना जाना चाहिए ताकि मामले का निस्तारण जल्द हो सके।
इंड स्विफ्ट कंपनी द्वारा किए गए करोड़ों के वैट घोटाले की सुनवाई का मामला एडिशनल एक्साइज कमिश्नर राकेश कुमार पोपली की कोर्ट में चल रहा था। करीब 66 करोड़ के वैट घोटाले में कोर्ट फीस जमा नहीं करने चलते एडिशनल एक्साइज कमिश्नर कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने पर रोक लगा दी थी। इसको लेकर कंपनी की ओर से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कंपनी की ओर से 17 करोड़ कोर्ट फीस यूटी प्रशासन के सरकारी खाते में जमा करा दी गई थी। इसके बाद भी राकेश पोपली की कोर्ट ने मामले की सुनवाई नहीं की, इसको लेकर कंपनी की ओर से वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील दायर की गई थी। अब एडवाइजर मनोज परिदा की वैट टिब्यूनल कोर्ट ने पोपली की कोर्ट को आदेश दिया है कि जब फीस सरकारी खाते में जमा करा दी गई है तो सुनवाई क्यों नहीं जा रही है।
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ऐसे पकड़ा था बड़ा वैट घोटाला
17 जुलाई 2018 को एडवाइजर परिमल राय को वैट ट्रिब्यूनल में केसों की हियरिंग कर रहे थे। इस दौरान इंड स्विफ्ट कंपनी का केस उनके सामने आया। इसमें एक्साइज डिपार्टमेंट ने वैट 5 करोड़ 90 लाख 54 हजार 342 रुपये निकाला। एडवाइजर ने जब स्टेटस पूछा तो कंपनी के वकील ने कहा कि उनका मामला तो 31 मार्च 2015 को खत्म भी हो चुका है।
एक्साइज डिपार्टमेंट ने उनसे 5 हजार रुपए का टैक्स लेकर चालान कर दिया था। इस पर एडवाइजर को शक हुआ कि कैसे 5.90 करोड़ रुपए का टैक्स मात्र 5 हजार रुपसे के चालान में पूरा हो गया। इसके बाद एडवाइजर ने जांच विजिलेंस को सौंप दी थी।
ये था पूरा मामला
डिपार्टमेंट की तरफ से गड़बड़ सामने आने के बाद जब असेस्मेंट दोबारा से की तो उसमें करीब 66 करोड़ रुपये की देनदारी कंपनी की बनी। इसमें टैक्स, उस पर डबल पेनल्टी और बाकी चार्जेज भी शामिल हैं। इस मामले की सुनवाई एडिशनल एक्साइज कमिश्नर आरके पोपली की कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट फीस जमा नहीं होने के चलते सुनवाई रोक दी गई थी।
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इंड स्विफ्ट कंपनी द्वारा किए गए करोड़ों के वैट घोटाले की सुनवाई का मामला एडिशनल एक्साइज कमिश्नर राकेश कुमार पोपली की कोर्ट में चल रहा था। करीब 66 करोड़ के वैट घोटाले में कोर्ट फीस जमा नहीं करने चलते एडिशनल एक्साइज कमिश्नर कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने पर रोक लगा दी थी। इसको लेकर कंपनी की ओर से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद कंपनी की ओर से 17 करोड़ कोर्ट फीस यूटी प्रशासन के सरकारी खाते में जमा करा दी गई थी। इसके बाद भी राकेश पोपली की कोर्ट ने मामले की सुनवाई नहीं की, इसको लेकर कंपनी की ओर से वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील दायर की गई थी। अब एडवाइजर मनोज परिदा की वैट टिब्यूनल कोर्ट ने पोपली की कोर्ट को आदेश दिया है कि जब फीस सरकारी खाते में जमा करा दी गई है तो सुनवाई क्यों नहीं जा रही है।
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ऐसे पकड़ा था बड़ा वैट घोटाला
17 जुलाई 2018 को एडवाइजर परिमल राय को वैट ट्रिब्यूनल में केसों की हियरिंग कर रहे थे। इस दौरान इंड स्विफ्ट कंपनी का केस उनके सामने आया। इसमें एक्साइज डिपार्टमेंट ने वैट 5 करोड़ 90 लाख 54 हजार 342 रुपये निकाला। एडवाइजर ने जब स्टेटस पूछा तो कंपनी के वकील ने कहा कि उनका मामला तो 31 मार्च 2015 को खत्म भी हो चुका है।
एक्साइज डिपार्टमेंट ने उनसे 5 हजार रुपए का टैक्स लेकर चालान कर दिया था। इस पर एडवाइजर को शक हुआ कि कैसे 5.90 करोड़ रुपए का टैक्स मात्र 5 हजार रुपसे के चालान में पूरा हो गया। इसके बाद एडवाइजर ने जांच विजिलेंस को सौंप दी थी।
ये था पूरा मामला
डिपार्टमेंट की तरफ से गड़बड़ सामने आने के बाद जब असेस्मेंट दोबारा से की तो उसमें करीब 66 करोड़ रुपये की देनदारी कंपनी की बनी। इसमें टैक्स, उस पर डबल पेनल्टी और बाकी चार्जेज भी शामिल हैं। इस मामले की सुनवाई एडिशनल एक्साइज कमिश्नर आरके पोपली की कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट फीस जमा नहीं होने के चलते सुनवाई रोक दी गई थी।