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चंडीगढ़ प्रशासन की पीजी पॉलिसी को ही लागू करेगा सीएचबी, डायरेक्टर्स ने बैठक कर लिया फैसला

Fri, 07 Aug 2020 03:14 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 07 Aug 2020 03:14 PM IST
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Chandigarh Housing Board will implement ut administration PG policy
सांकेतिक तस्वीर
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में भी चंडीगढ़ प्रशासन की ही पेइंग गेस्ट (पीजी) पॉलिसी को लागू किया जाएगा। इस बारे वीरवार को सीएचबी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में फैसला ले लिया गया। इसके अलावा सेक्टर-53 की हाउसिंग स्कीम में फ्लोर एरिया रेश्यो बढ़ाने के लिए सीएचबी एक बार प्रशासन से आग्रह करेगा।
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बैठक में बोर्ड ने फैसला लिया है कि रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए फ्री होल्ड मकान को ट्रांसफर करवाते समय कंसिडरेशन अमाउंट और स्टांप ड्यूटी के 15 प्रतिशत ट्रांसफर चार्जेज नहीं लगेंगे, जो लोगों के लिए राहत की खबर है। बोर्ड में ई-मॉड्यूल सिस्टम पर आगे काम करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई।
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बोर्ड ने कहा कि वह पारदर्शिता व काम में तेजी लाने के लिए यह सिस्टम शुरू कर रहा है। बैठक में साफ किया गया कि सीएचबी के इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) मकानों के लिए स्टैंडर्ड ड्राइंग्स यूटी प्रशासन के चीफ आर्किटेक्ट से ही मंजूर करवाई जाएंगी, जिसके बाद ही मंजूर नक्शे को बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
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इसके अलावा मंजूरी मिलने के बाद स्टैंडर्ड नक्शे के हिसाब से मकान का दोबारा निर्माण करने पर दोबारा से किसी प्रकार की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इसी तरह कंट्रोल ड्राइंग के किसी भी तरह बदलाव की स्थिति में ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के जरिए मंजूरी लेनी होगी।

पीजी को लेकर हाउसिंग बोर्ड ने भी बनाई थी पॉलिसी
प्रशासन की पहले ही शहर के लिए पीजी पॉलिसी है, जिसके चलते सीएचबी को भी पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इस साल 22 फरवरी को सेक्टर-32 में हुए हादसे की वजह से तीन लड़कियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसके बाद से ही पीजी को लेकर बोर्ड ने भी सख्ती करनी शुरू कर दी थी।

यही कारण है कि बोर्ड के फ्लैट्स में चल रहे पीजी को लेकर की कार्रवाई शुरू की थी, क्योंकि उनमें पीजी की अनुमति नहीं है। इसे लेकर लोगों की बोर्ड के पास शिकायतें भी आई हैं। बोर्ड ने पीजी को लेकर ही ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की थी, जिसे ही बैठक में रखा गया था।


यह पॉलिसी यूटी के इस्टेट ऑफिस की तर्ज पर बनाई गई थी, जिसमें बोर्ड के साढ़े सात मरले और उससे अधिक एरिया वाले स्वतंत्र मकानों में पीजी को इजाजत दिए जाने का प्रस्ताव शामिल था।
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