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Chandigarh News: छतबीड़ चिड़ियाघर, 19 स्कूलों के 200 विद्यार्थी प्रतियोगिताओं में हुए शामिल
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संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। एमसी जूलॉजिकल पार्क, छतबीड़ में शनिवार को वन्यजीव सप्ताह-2026 के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता पर जोर दिया गया। 19 स्कूलों के करीब 200 विद्यार्थियों और 100 से अधिक प्रकृति प्रेमियों ने इसमें हिस्सा लिया। दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे बर्ड वॉक से हुई। इसका आयोजन सोशल-सब्सटेंस, नेचुरल बायोडायवर्सिटी और टीएपीएएस के सहयोग से किया गया। प्रतिभागियों ने चिड़ियाघर के वन क्षेत्र में विभिन्न पक्षियों को देखा और फोटोग्राफी भी की। सुबह 8:30 बजे क्षमता निर्माण केंद्र में एक सत्र आयोजित किया गया। क्षेत्र निदेशक नलिन यादव, आईएफएस ने वन्यजीव संरक्षण और इस वर्ष की थीम पर विचार साझा किए। वन्यजीव एवं प्रकृति संरक्षण की गतिविधियों के लिए तीनों सहयोगी संस्थाओं को सम्मानित किया गया। आसपास के 19 स्कूलों के करीब 200 विद्यार्थियों ने पेंटिंग, निबंध लेखन और क्विज प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
संरक्षण और जागरूकता के प्रयास
टाइगर कॉम्प्लेक्स में बाघों पर जू-कीपरों की बातचीत कार्यक्रम भी हुआ। जू-कीपरों ने छतबीड़ चिड़ियाघर के बाघों की आदतों और देखभाल के अनुभव साझा किए। क्षेत्र निदेशक अरुण कुमार ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में बाघ प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। ऐसे में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में चिड़ियाघरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। चिड़ियाघर शिक्षा अधिकारी हरपाल सिंह ने बताया कि जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
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जीरकपुर। एमसी जूलॉजिकल पार्क, छतबीड़ में शनिवार को वन्यजीव सप्ताह-2026 के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता पर जोर दिया गया। 19 स्कूलों के करीब 200 विद्यार्थियों और 100 से अधिक प्रकृति प्रेमियों ने इसमें हिस्सा लिया। दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे बर्ड वॉक से हुई। इसका आयोजन सोशल-सब्सटेंस, नेचुरल बायोडायवर्सिटी और टीएपीएएस के सहयोग से किया गया। प्रतिभागियों ने चिड़ियाघर के वन क्षेत्र में विभिन्न पक्षियों को देखा और फोटोग्राफी भी की। सुबह 8:30 बजे क्षमता निर्माण केंद्र में एक सत्र आयोजित किया गया। क्षेत्र निदेशक नलिन यादव, आईएफएस ने वन्यजीव संरक्षण और इस वर्ष की थीम पर विचार साझा किए। वन्यजीव एवं प्रकृति संरक्षण की गतिविधियों के लिए तीनों सहयोगी संस्थाओं को सम्मानित किया गया। आसपास के 19 स्कूलों के करीब 200 विद्यार्थियों ने पेंटिंग, निबंध लेखन और क्विज प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
संरक्षण और जागरूकता के प्रयास
टाइगर कॉम्प्लेक्स में बाघों पर जू-कीपरों की बातचीत कार्यक्रम भी हुआ। जू-कीपरों ने छतबीड़ चिड़ियाघर के बाघों की आदतों और देखभाल के अनुभव साझा किए। क्षेत्र निदेशक अरुण कुमार ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में बाघ प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते। ऐसे में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में चिड़ियाघरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। चिड़ियाघर शिक्षा अधिकारी हरपाल सिंह ने बताया कि जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
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