Chandigarh: जीएमएसएच-16 की दुकान को एक्सटेंशन मामले की होगी विजिलेंस जांच, 31 करोड़ का जुर्माना भी देना होगा
दुकान के संचालक पर क्षतिपूर्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 31 करोड़ 18 लाख 46018 रुपये का जुर्माना लगा दिया। दुकान संचालक ने अतिक्रमण कर दुकान का एरिया बढ़ा रखा था, जिससे स्वास्थ्य विभाग को काफी नुकसान पहुंचा।
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कई वर्षों से चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 में चल रही विवादित दवा की दुकान वर्ष 1993 में सिर्फ दो साल के लिए आवंटित की गई थी। आवंटन में एक्सटेंशन का कोई जिक्र नहीं था फिर भी एक ही दुकानदार 29 साल तक दुकान को चलाता रहा। उसे साल दर साल एक्सटेंशन मिला। अब प्रशासन इस मामले को लेकर सख्त हो गया है और पूरे मामले की जांच कराने की तैयारी कर ली है। किन अधिकारियों की मिलीभगत से दुकान को पिछले हर साल एक्सटेंशन मिलती रही, इसकी पड़ताल के लिए मुख्य विजिलेंस अधिकारी कम प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा दुकान के संचालक पर क्षतिपूर्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 31 करोड़ 18 लाख 46018 रुपये का जुर्माना लगा दिया। दुकान संचालक ने अतिक्रमण कर दुकान का एरिया बढ़ा रखा था, जिससे स्वास्थ्य विभाग को काफी नुकसान पहुंचा। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने दुकान संचालक को नोटिस जारी कर 30 दिन के अंदर जुर्माने की रकम जमा करने की मोहलत दी है।
28 साल से क्यों जारी नहीं हुआ नया टेंडर
इस पूरे मामले में अस्पताल और विभाग के वर्तमान व पूर्व अधिकारियों की भूमिका पता लगाने के लिए मामला विजिलेंस को सौंपा गया है। विजिलेंस जांच कर रही है कि 28 वर्षों से कभी नया टेंडर जारी क्यों नहीं हुआ। पुराने टेंडर को ही बार-बार बिना किसी ठोस कारण के आगे क्यों बढ़ाया जाता रहा। जिस नीति के तहत एक्सटेंशन मिला, जब वो नीति केमिस्ट की दुकानों के लिए थी ही नहीं, फिर क्यों ऐसा किया गया।
जांच में स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है क्योंकि सूत्रों के अनुसार जिस नीति के तहत इस केमिस्ट की दुकान को एक्सटेंशन दी जा रही थी वह नीति स्वास्थ्य विभाग के केमिस्ट शॉप के आवंटन की थी ही नहीं। एस्टेट ऑफिस ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी है। इसके अलावा वर्ष 1993 में जब दुकान आवंटित की गई तो उसमें एक्सटेंशन का जिक्र भी नहीं था। बावजूद इसके हर साल एक्सटेंशन दी जाती रही। विजिलेंस विभाग ने दिसंबर 2022 में एक जांच शुरू की थी कि कैसे केमिस्ट दुकान के संचालक ने वर्षों तक अवैध कब्जा करके रखा। इसके बाद स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने जब विभागीय जांच कराई तो इसमें कई झोल पाए गए, जिसके बाद विजिलेंस विभाग से अफसरों की संलिप्तता पर जांच कराने का फैसला लिया गया है।
स्वास्थ विभाग के अनुसार, दुकान के संचालक सुनील कुमार ने जीएमएसएच-16 की दुकान नंबर छह के बगल में लोगों के आने-जाने के लिए बने रास्ते पर अवैध निर्माण कर इस एरिया को दुकान में शामिल कर लिया था। यह अतिक्रमण कई वर्षों से था। हाईकोर्ट से अनुमति के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस अतिक्रमण को बुधवार को ध्वस्त कर उस जगह को पुरानी व्यवस्था के अनुसार बहाल कर दिया। अब स्वास्थ्य विभाग ने दुकान संचालक से इतने वर्षों तक अवैध निर्माण कर प्रशासन को रेंट के रूप में आने वाले राजस्व को नुकसान पहुंचाया है जिसके एवज में 31 करोड़ 18 लाख 46 हजार 018 रुपये 30 दिन के अंदर देने को कहा है। इस कार्रवाई के बाद वीरवार को दोपहर में दुकान खुली। बता दें कि दुकान संचालक ने मंगलवार की रात को ही दुकान बंद कर दिया था। इसके बाद विभाग को बुधवार की दोपहर 12 बजे के बाद खुद कार्रवाई करनी पड़ी।
ध्वस्तीकरण का खर्च भी देना होगा
इसके साथ ही जीएमएसएच-16 की केमिस्ट शाप नंबर छह पर बुधवार को इंजीनियरिंग विभाग की ओर से अवैध निार्मण को तोड़ने, केमिस्ट की दीवारा दोबारा बनाने और पब्लिक के आने जाने के रास्ते को खाली कराने और मलबा की ढुलाई पर आए कुल 29,259 रुपये खर्च का भुगतान करने के लिए कहा है जिसकी सूचना ध्वस्तीकरण के लिए विभाग की तरफ से पूर्व में जारी नोटिस में दी जा चुकी थी।
ऐसे निकाली बकाया भुगतान की राशि
स्वास्थ्य निदेशक ने दुकान संचालक को भेजे गए नोटिस में बताया है कि मौजूदा समय में प्रति वर्ग फुट का किराया 11,168 रुपये है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दुकान संचालक में जितने स्थान में अवैध निर्माण किया था, उसका कुल एरिया 177.29 प्रति वर्ग फुट था यानी इतनी जगह पर अवैध निर्माण कर पब्लिक पैसेज को दुकान के एरिया में शामिल किया गया था। विभाग इस अवैध निर्माण की गड़ना 2010 से कर रहा है। इसके अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने एक जनवरी 2010 से 15 फरवरी 2023 तक के लिए 11,168 रुपये के हिसाब से 157.5 महीने के हिसाब से कुल 31 करोड़ 18 लाख 46 हजार 018 रुपये लगाया है।
आज दुकान करनी होगी खाली
दुकान संचालक को 17 फरवरी सुबह 10 बजे तक स्वास्थ्य विभाग को दुकान हैंडओवर करनी है। अगर दुकान संचालक ने ऐसा नहीं किया तो स्वास्थ्य विभाग उससे 16 लाख 96 हजार 84 रुपये व जीएसटी सहित किराया वसूलेगा। गौरतलब है कि दुकान के नए अलॉटमेंट को लेकर विभाग ने ई टेंडर के तहत आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।