चंडीगढ़ शिक्षा विभाग का नया फरमान : पढ़ाने के साथ अब गुरु जी मिड डे मील का राशन भी बांटेंगे
शिक्षक अब विद्यार्थियों को ऑनलाइन-ऑफलाइन ड्यूल कक्षाएं पढ़ाने के साथ मिड डे मील के तहत गेहूं और चावल भी बांटेंगे। चंडीगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रमुखों को निर्देश जारी किए हैं कि विद्यार्थियों को सितंबर से नवंबर 2020 तक तीन महीनों के गेहूं और चावल बांटने हैं। वहीं मिड डे मील बनाने में होने वाला खर्च, कुकिंग तेल और दाल की राशि विद्यार्थियों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने कोविड लॉकडाउन के दौरान मार्च से अगस्त तक मिड डे मील की राशि बच्चे की प्रतिदिन की खुराक के हिसाब से उनके बैंक खाते में जमा करवाई थी। अब इसे दो भागों में बांट दिया गया है। सिर्फ मिड डे मील बनाने में खर्च हुई राशि ही विद्यार्थियों के खाते में जाएगी। गेहूं और चावल विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों को प्रतिदिन की खुराक के हिसाब से पैकेट बनाकर स्कूल में बांटा जाएगा।
निर्देश के अनुसार स्कूल को एमडीएम गोदाम इंडस्ट्रियल एरिया फेज- 1 से राशन अपनी जिम्मेदारी पर उठवाना होगा। सामान की लोडिंग, मजदूर आदि की जिम्मेदारी स्कूल की होगी। इसके बाद में स्कूल प्रति बच्चे की खुराक के हिसाब से गेहूं और चावल के पैकेट तैयार करेंगे। कोविड दिशा निर्देशों का पालन करते हुए बच्चों या उनके अभिभावकों को स्कूल में बुलाकर पैकेट वितरित किए जाएंगे।
प्राइमरी में 47467 बच्चों को मिलेंगे राशन पैकेट
शहर के 114 सरकारी स्कूलों, 6 गवर्नमेंट एडेड स्कूलों और तीन मदरसों के प्राइमरी कक्षा के 47,467 बच्चों को गेहूं और चावल के पैकेट बांटे जाएंगे। प्राइमरी में प्रति बच्चा 100 ग्राम राशन दिया जाएगा। 72 दिनों के लिए 47,467 बच्चों को कुल 3417.62 क्विंटल गेहूं और चावल दिया जाएगा।
अपर प्राइमरी में 40,259 बच्चों को मिलेगा राशन
शहर के 114 सरकारी स्कूलों, 6 गवर्नमेंट एडेड स्कूलों और तीन मदरसों के अपर प्राइमरी के 40,259 बच्चों को 4347.97 क्विंटल गेहूं और चावल दिया जाएगा। अपर प्राइमरी में प्रति बच्चा 150 ग्राम के हिसाब से राशन दिया जाएगा।
शिक्षक बच्चों को पढ़ाएं या मिड डे मील बांटें
सरकारी स्कूल के शिक्षकों को पहले ही ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीको में बच्चों की कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। मिड डे मील में गेहूं- चावल के पैकेट प्रति खुराक के हिसाब से तौल कर बनवाना, रजिस्टर में एंट्री करवाना, बच्चों को स्कूल बुलवाना जैसे काम होंगे। कई शिक्षक की ड्यूटी सिर्फ इन्हीं में लग जाएगी। ऐसे में बच्चों की कक्षाएं कौन लेगा। इसके अलावा लगभग 30-40 प्रतिशत बच्चे मिड डे मील का खाना नहीं खाते हैं। ये बच्चे स्कूल से गेहूं के पैकेट लेने भी नहीं आएंगे। ऐसे में स्कूल के कमरों में अगर गेहूं पड़ा रहता है तो चूहे आदि की समस्या भी पैदा हो जाएगी। - सवर्ण सिंह कम्बोज, प्रधान, यूटी कैडर एजुकेशन एंप्लाइज
हम मिड डे मील की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं, अभी इस पर कुछ नहीं बोल सकते। - सरप्रीत सिंह गिल, शिक्षा सचिव