चंडीगढ़ स्टेशन पर पानी के पानी के सैंपल फेल, ये हो सकती है बड़ी वजह
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चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल के सैंपल फेल हो गए हैं। यह खुलासा रेलवे स्टेशन पर वीरवार को एसआईजी (सर्विस इंप्रूवमेंट ग्रुप) टीम की जांच के दौरान हुआ। टीम वीरवार को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं जांचने आई थी।
टीम के साथ दिल्ली से आए एडिशनल चीफ हेल्थ डायरेक्टर डॉ. जगदीश भाटिया ने स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-3 और 4 का वॉस बेसिन की हालत देखकर पानी के सैंपल भरने को कहा। लेकिन जैसे ही पानी का सैंपल भरा और जांच की गई तो उसकी पीएच वैल्यू .5 के बजाय शून्य आया।
जब टीम ने मौके पर चंडीगढ़ के तकनीकी स्टाफ से पूछा कि पानी में प्रॉपर क्लोरिनेशन क्यों नहीं है तो जेई ने कहा कि पाइप लाइन में ब्लॉकेज हो सकती है। अब सवाल ये है कि अगर पानी के पाइप लाइन में ब्लॉकेज है तो पानी कहां से आ रहा है।
सूचना मिलते ही टाइलें सही कराई
खतरनाक बैक्टीरिया
इस पानी में खतरनाक बैक्टीरिया भी हो सकते हैं। ऐसे ही बैक्टीरिया मानव मल में भी पाए जाते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो के एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार इतने हाई टीसीबी लेवल से मियादी बुखार, डायरिया, ऐंठन और पेचिस जैसी बीमारियां हो सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक इन बीमारियों से बड़े लोग तो एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और जिनकी पाचन शक्ति दुरुस्त नहीं होती उनके लिए ये जानलेवा साबित हो सकती हैं। उत्तर भारत की अगर बात की जाए तो रेलवे के सिर्फ आधे क्लोरीनेशन प्लांट सही से काम करने की हालत में हैं।
सूचना मिलते ही टाइलें सही कराई
चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 3 और 4 के वॉश बेेसिन की टाइलें टूटी हुई थी। जैसे ही चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशन के कंस्ट्रक्शन विंग को सूचना मिली कि एसआईजी की टीम दिल्ली से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के लिए आने वाली है तो उन्होंने तत्काल टूटे वॉश बेसिन की टाइलों पर सीमेंट लगा दिया।
लेकिन दिल्ली से आई अधिकारियों की टीम ने जांच के दौरान देखा कि टाइलों पर लगे सीमेंट ताजा हैं तो तुरंत सीसीएम ओम प्रकाश ने वॉश बेसिन की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। क्योंकि वॉश बेसिन गंदा पड़ा था।