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चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में मिले कटे पैर किसके थे, 52 दिन बाद भी पता नहीं लगा सकी पुलिस

Mon, 17 Aug 2020 11:52 AM IST
खुशबू गोयल अमित गुप्ता, चंडीगढ़
अमित गुप्ता, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 17 Aug 2020 11:52 AM IST
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Chandigarh Police Failed to Sort Out Case of Chopped Feet Find in Sector 17 Chandigarh
मिले कटे पैर - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में मिले युवती के कटे पैरों का मामला लगता है फाइलों में ही दफन हो जाएगा। 52 दिन बीत चुके हैं और चंडीगढ़ की हाईटेक पुलिस अभी तक कोई ठोस सुराग तक नहीं ढूंढ सकी है। पुलिस की जांच अब सीएफएसएल की रिपोर्ट पर अटकी है। 23 जून को भारतीय स्टेट बैंक की इमारत के पिछली तरफ साइकिल ट्रैक के नजदीक झाड़ियों में युवती के दो कटे हुए पैर मिले थे। पास ही पुलिस को लिफाफे में एक भ्रूण भी मिला था।
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इस घटना ने शहर में सनसनी मचा दी थी। इतना वक्त बीत जाने के बावजूद पुलिस न तो युवती का पता लगा सकी है और न ही भ्रूण के बारे में कोई साक्ष्य जुटा सकी है। पुलिस ने दोनों का डीएनए टेस्ट करवाया था। कमाल की बात तो यह है कि अभी तक डीएनए रिपोर्ट तक नहीं आई है। यही हाल सीएफएसल रिपोर्ट का भी है। बता दें कि यह मामला सेक्टर-17 थाना पुलिस ने एसबीआई बैंक मैनेजर अजीत किशोरी की शिकायत पर आईपीसी 318, 302 और 201 के तहत दर्ज किया था।
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पुलिस की जांच यूं चली
पुलिस ने शहर के थानों के अलावा मोहाली और पंचकूला के थानों में दर्ज गुमशुदा युवतियों की डिटेल खंगाली। पुलिस की जांच में यह तो साफ हो गया था कि युवती की हत्या के बाद दोनों पैर यहां फेंके गए थे। पुलिस ने कई बार सेक्टर-17 एसबीआई बिल्डिंग के आसपास समेत अन्य जगहों पर सर्च किया, लेकिन कोई और अंग नहीं मिला। सरकारी अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालों में शवों का रिकॉर्ड भी खंगाला गया था। लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।
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अब तक इन एंगल पर हुई जांच

1. शहर के थानों में दर्ज युवती के गुमशुदगी के रिकार्ड खंगाले
2. घटनास्थल और आसपास के एरिया को सर्च किया गया
3. मोबाइल डंप डाटा उठाया गया
4. घटनास्थल वाले चौक और आसपास के लाइट प्वाइंटों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले
5. सरकारी और निजी अस्पतालों के भी रिकार्ड खंगाल
6. अंग्रेजी अखबार में पैर लिपटे होने के एंगल पर हुई जांच
7. घटनास्थल को ड्रोन से भी खंगाला
8. कटे पैर और भ्रूण को आपस में जोड़कर देख रही है पुलिस
9. दोनों का डीएनए टेस्ट करवाया

रिपोर्ट आते ही पुलिस को मिल सकती है लीड

मामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि सीएफएसएल की रिपोर्ट 30 से 35 दिनों में आती है। हालांकि, अब तक सीएफएसएल की रिपोर्ट नहीं आ सकी है। बीते सप्ताह रिमाइंडर भेजा है। यह रिपोर्ट आने के बाद कुछ खास और लीड मिल सकती है। डीएनए रिपोर्ट का भी इंतजार हो रहा है।

दूसरे राज्यों में दर्ज ऐसे मामलों का रिकार्ड भी खंगाले पुलिस
यह मामला सनसनीखेज और हैरान कर देने वाला है। चंडीगढ़ में शायद ही इससे पहले कभी इस तरह का मामला सामने आया हो। वैसे तो केस ब्लाइंड है। अगर डीएनए की रिपोर्ट में आता है कि भ्रूण उसी युवती के हैं, जिसके कटे पैर मिले हैं। इससे क्या हो जाएगा, फिर भी केस अनसुलझा ही रहेगा। इस तरह के केस को सुलझाने में समय लग जाता है। केस को सुलझाने के लिए, पुलिस को चाहिए कि ट्राइसिटी के अलावा दूसरे राज्यों से पैर मिलने वाली उम्र की लड़कियों के थानों में लापता के दर्ज मामले और अस्पतालों में रिकॉर्ड खंगाले। इसके अलावा अलग अलग विंग भी इस ब्लाइंड केस को सुलझाने के लिए आपसी तालमेल रखें। क्योंकि छोटा सा सुराग ही आरोपियों तक पहुंचा सकता है।
- जगबीर सिंह, पूर्व डीएसपी, यूटी पुलिस

कोरोना में स्टाफ के कमी के चलते रिपोर्ट में देरी

पुलिस के अनुसार, किसी भी केस की रिपोर्ट आने में औसतन 30 से 35 दिन लगते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोरोना के वैश्विक महामारी के चलते सीएफएसएल में स्टाफ की कमी है। इस कारण रिपोर्ट आने में देरी हो रही है।

रिपोर्ट में इन सवालों के मिलेंगे जवाब
1. क्या भ्रूण उसी युवती के हैं जिसके कटे पैर मिले है।
2. युवती के पैर को कितने दिन पहले काटे थे
3. क्या पैरों को किसी ठंडी जगह या फ्रिज में संभाल के रखा गया था
4. युवती की उम्र कितनी रही होगी
5. पैर को किस हथियार से काटा गया था।

रिपोर्ट आने पर ही जांच आगे बढ़ेगी
मामले में सीएफएसएल टीम को रिमाइंडर भेजा गया है। इसके अलावा भ्रूण और दोनों कटे पैरों के डीएनए की रिपोर्ट भी नहीं आई है। दोनों की रिपोर्ट आने के बाद इस केस की पैरवी फिर से शुरू की जाएगी। उम्मीद है कि 15 अगस्त के बाद इसकी रिपोर्ट आ जाएगी।
- चरणजीत सिंह विर्क, डीएसपी
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