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ऐसे डस्टबिन का क्या फायदा, जिसमें न तो ढक्कन है और न ही हैंडल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 06 Jun 2017 09:20 AM IST
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ऐसे डस्टबिन का क्या फायदा
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प्रशासक बीपी सिंह बदनौर ने सोमवार को शहरवासियों के बीच मुफ्त में सूखा और गीला कचरा अलग- अलग रखने के लिए डस्टबिन बांटने के अभियान का आगाज किया। स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए टैगोर थिएटर में आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद किरण खेर, मेयर आशा जसवाल समेत कई लोग मौजूद थे।
पहले दिन लगभग दस हजार लोगों के बीच डस्टबिन बांटे गए। अभी सिर्फ 15 हजार डस्टबिन ही मंगवाए गए हैं। ऐसे में शहर के ढाई लाख घरों तक निशुल्क डस्टबिन पहुंचने में दो माह का समय लगेगा।
उधर, नगर निगम की ओर से बांटे गए डस्टबिन का साइज काफी छोटा और ओपन ही है। लोगों का कहना है कि डस्टबिन कुछ माह ही चलेंगे। भाजपा के कई पार्षद भी इस बात को मानते हैं। फासवेक चेयरमैन ने कहा कि डस्टबिन के न तो ढक्कन है और न ही हैंडल। उन्होंने कहा कि 40-40 लीटर के जो डस्टबिन संग्राहकों दिए जा रहे हैं उसे लोगों को दिए जाने चाहिए।
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युवा इनोवेटिव सोसाइटी के चेयरमैन सचिन शर्मा का भी कहना है कि ऐसे डस्टबिन का कोई फायदा नहीं है। कार्यक्रम में शामिल पूर्व मेयर एवं कांग्रेस नेता सुभाष चावला का भी कहना है कि डस्टबिन काफी छोटे हैं। यह बड़े घरों में नहीं चल सकता। वहीं ज्वाइंट कमिश्नर एवं एमओएच मनोज खत्री का कहना है कि घर में एक व्यक्ति का प्रतिदिन का 400 ग्राम का कचरा होता है। ऐसे में 5 से 6 सदस्य होने पर भी दो से ढाई किलो कचरा होगा, इसलिए 10 से 12 लीटर के दो दो डस्टबिन दिए गए हैं। व्यापारियों को खुद खरीदने होंगे डस्टबिन रेजिडेंट्स को निशुल्क डस्टबिन बांटे जा रहे हैं लेकिन व्यापारियों को गीला और सूखा कचरा इकट्ठा करने केलिए खुद ही खरीदने होंगे।
अभी रेट तय नहीं
डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने का अभी शुल्क तय नहीं हुआ है। पिछले माह सदन की बैठक में रेट तय नहीं हो सके। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि शुल्क तय करने के लिए कमेटी का गठन हो चुका है। कमेटी दो से तीन दिन में रेट फाइनल कर देगी जिसके बाद लागू कर दिए जाएंगे।
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पहले दिन लगभग दस हजार लोगों के बीच डस्टबिन बांटे गए। अभी सिर्फ 15 हजार डस्टबिन ही मंगवाए गए हैं। ऐसे में शहर के ढाई लाख घरों तक निशुल्क डस्टबिन पहुंचने में दो माह का समय लगेगा।
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उधर, नगर निगम की ओर से बांटे गए डस्टबिन का साइज काफी छोटा और ओपन ही है। लोगों का कहना है कि डस्टबिन कुछ माह ही चलेंगे। भाजपा के कई पार्षद भी इस बात को मानते हैं। फासवेक चेयरमैन ने कहा कि डस्टबिन के न तो ढक्कन है और न ही हैंडल। उन्होंने कहा कि 40-40 लीटर के जो डस्टबिन संग्राहकों दिए जा रहे हैं उसे लोगों को दिए जाने चाहिए।
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युवा इनोवेटिव सोसाइटी के चेयरमैन सचिन शर्मा का भी कहना है कि ऐसे डस्टबिन का कोई फायदा नहीं है। कार्यक्रम में शामिल पूर्व मेयर एवं कांग्रेस नेता सुभाष चावला का भी कहना है कि डस्टबिन काफी छोटे हैं। यह बड़े घरों में नहीं चल सकता। वहीं ज्वाइंट कमिश्नर एवं एमओएच मनोज खत्री का कहना है कि घर में एक व्यक्ति का प्रतिदिन का 400 ग्राम का कचरा होता है। ऐसे में 5 से 6 सदस्य होने पर भी दो से ढाई किलो कचरा होगा, इसलिए 10 से 12 लीटर के दो दो डस्टबिन दिए गए हैं। व्यापारियों को खुद खरीदने होंगे डस्टबिन रेजिडेंट्स को निशुल्क डस्टबिन बांटे जा रहे हैं लेकिन व्यापारियों को गीला और सूखा कचरा इकट्ठा करने केलिए खुद ही खरीदने होंगे।
अभी रेट तय नहीं
डोर टू डोर गारबेज इकट्ठा करने का अभी शुल्क तय नहीं हुआ है। पिछले माह सदन की बैठक में रेट तय नहीं हो सके। मेयर आशा जसवाल का कहना है कि शुल्क तय करने के लिए कमेटी का गठन हो चुका है। कमेटी दो से तीन दिन में रेट फाइनल कर देगी जिसके बाद लागू कर दिए जाएंगे।