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चंडीगढ़वासी ध्यान दें, गहरा सकता है जलसंकट...तेजी से गिर रहा पानी का स्तर

Wed, 16 May 2018 10:31 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 16 May 2018 10:31 AM IST
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chandigarh people may face water crisis in summer season
नल से पानी पीता बच्चा - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में पानी का ग्राउंड लेवल निरंतर गिर रहा है। गर्मियों में एक तरफ जलसंकट गहराया है तो दूसरी तरफ जलस्तर घटना चिंता का विषय है। शहर में कहीं-कहीं पानी पानी का लेवल एक साल के दौरान 4 से 5 मीटर भी गिर रहा है। यह खुलासा सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी की रिपोर्ट में हुआ है। यह रिपोर्ट नगर निगम को भेजी गई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी समय-समय पर नगर निगम को चेतावनी दे रही है।
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अथॉरिटी की ओर से शहर के अलग-अलग एक दर्जन प्वाइंट्स पर लेवल चेक करने के लिए पिजो मीटर लगाए गए हैं। दो साल पहले अथॉरिटी नगर निगम को यह भी कह चुकी है कि कोई भी नया ट्यूबवेल न लगाया जाए। अगर लगाना है तो इसकी मंजूरी सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी से पहले ली जाए, लेकिन नगर निगम का जनस्वास्थ्य विभाग मंजूरी नहीं ले रहा है, जबकि शहर में नए टयूबवेल भी लग रहे हैं और पुराने ट्यूबवेल बेकार होने पर उनकी नए सिरे से बोरिंग भी हो रही है।
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कहां-कहां पर लगे हैं लेवल मापने के यंत्र
बुडै़ल, सीएसआईओ, मलोया, औद्योगिक क्षेत्र, सेक्टर-27, 10सी, 31डी, 37डी, 39डी, 44डी, 52 और सेक्टर-46 में सेंट्रल ग्राउंड लेवल अथॉरिटी ने पानी का ग्राउंड लेवल चेक करने के लिए पिजो मीटर लगाए हैं।
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किस एरिया का ज्यादा गिर रहा स्तर
रिपोर्ट के अनुसार सेक्टर-31 डी में पानी का ग्राउंड लेवल 19.02 मीटर तक गिर गया है, जबकि साल 2016 में यहां पर लेवल 15.52 मीटर आंका गया था। इसके अलावा सेक्टर-10 सी में लगे पिजो मीटर की साल 2016 की मई माह की रिपोर्ट आई थी, उसमें लेवल 14.88 मीटर था, जो कि साल 2017 में बढ़कर 17.20 मीटर तक पहुंच गया है।

सेक्टर-31 डी में दूसरी जगह पर साल 2016 में पानी का लेवल 9.15 मीटर मापा गया था, जो कि साल 2017 में 11.48 मीटर तक पहुंच गया। अन्य जगहों पर लगे पिजो मीटर में पानी का लेवल एक से ढाई मीटर तक गिर रहा है। सेक्टर-46 में साल 2016 नवंबर माह मेें 5.52 मीटर पानी की गिरावट दर्ज की गई,लेकिन साल 2017 में यह गिरावट 7.18 तक पहुंच गई।

गिरने का कारण
लगातार पानी का लेवल गिरने का कारण यह है कि बरसाती पानी की निकासी नहीं हो रही है क्योंकि शहर में ज्यादा से ज्यादा पेवर ब्लाक और कंकरीट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा जो शहर में ट्यूबवेल लगाए गए हैं, उनका ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करके पानी निकाला जा रहा है।

शहर में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन का कहना है कि शहर में हरियाली और कच्ची जगह की कमी होती जा रही है। नगर निगम ने पूरे शहर को पेवर ब्लाक में तबदील कर दिया है, जिससे बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पाती और शहर में जलभराव होने का भी यही कारण है।

एक हजार फुट पर बोरिंग कर लगाया जाता है ट्यूबवेल
जनस्वास्थ्य विभाग के अनुसार साल 2002 में ट्यूबवेल की बोरिंग करने पर 400 फुट खोदने पर ही पानी मिल जाता था, लेकिन बोरिंग के लिए एक हजार फुट तक खुदाई की जाती है, जिसके बाद पीने के लिए पानी मिलता है। नगर निगम के अनुसार एक ट्यूबवेल को 22 घंटे तक चलाया जाता है, जिसमें से एक ट्यूबवेल में से एक-एक एमजीडी पानी की सप्लाई होती है।

शहर में 250 से ज्यादा ट्यूबवेल
शहर में इस समय 250 से ज्यादा ट्यूबवेल हैं। इससे शहरवासियों को प्रतिदिन 22 एमजीडी पानी मिल रहा है, जबकि कजौली वाटर वर्क्स से नगर निगम को 58 एमजीडी पानी मिल रहा है।


औसतन हर साल से दो से ढाई मीटर पानी का ग्राउंड लेवल गिरता है। गर्मी में पानी की मांग ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे पानी का लेवल ज्यादा गिरता है।
- श्याम लाल, पूर्व कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग

कजौली वाटर वर्क्स के पांचवें और छठे फेज से शहर में करीब 29 एमजीडी नया पानी जल्द मिलना शुरू हो जाएगा। इसके बाद ट्यूबवेलों पर भी दबाव कम पड़ेगा। पानी का ग्राउंड लेवल बढ़ाने के लिए मैं खुद भी गंभीर हूं। इस ओर कदम उठाए उठाऊंगा।
- देवेश मोदगिल, मेयर
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