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चंडीगढ़ : कोरोना के बाद से बंद है पीजीआई की ओपीडी, 25 लाख लोग इलाज से वंचित

Sun, 31 Jan 2021 07:02 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 31 Jan 2021 07:02 PM IST
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Chandigarh News: Patients upset due to PGI OPD  Closed
पीजीआई चंडीगढ़।

कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हुई है, जो दूसरी बीमारियों से पीड़ित हैं। इलाज के लिए वे तरस गए हैं। उन्हें न पीजीआई में और न ही मेडिकल कॉलेज में इलाज मिल रहा। अस्पतालों की ओपीडी अब भी बंद चल रही है। पीजीआई में एक साल में करीब 26 से 28 लाख मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। 

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पीजीआई के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक साल 2018-19 व साल 2019-2020 में 28 लाख से ज्यादा मरीजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी लेकिन कोरोना के बाद यह संख्या काफी नीचे आ गई है। मई से दिसंबर के बीच टेलीकंसल्टेंट के जरिए पीजीआई ने करीब सवा दो लाख मरीजों को इलाज दिया।
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पुराने वर्षों की तुलना करें तो इस बात के संकेत मिलते हैं कि 25 लाख मरीज इलाज से वंचित रह गए हैं। कोरोना अब काबू होने लगा है तो यह मुद्दा भी उठ रहा है कि पीजीआई को अब ओपीडी खोल देनी चाहिए। दिल्ली सरकार ने भी अपने सभी अस्पतालों की ओपीडी और सर्जरी की सेवाएं खोल दी हैं।

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28 दिन बाद आया नंबर 

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की रहने वाली सुशीला देवी को लिवर संबंधी परेशानी है। उनका कई साल से पीजीआई में इलाज चल रहा है। अचानक तबीयत बिगड़ी तो एक महीने पहले चंडीगढ़ में रहने वाले अपने रिश्तेदार के घर आ गईं। पहले तो काफी दिन तक नंबर नहीं लगा। 10 दिन बाद नंबर लगा, 18वें दिन कॉल आई और डॉक्टर ने कुछ जांच लिखी।

28वें दिन डॉक्टर ने देखा और दवा लिख दी। इसके बाद सुशीला अपने घर लौट सकी हैं। सुशीला का कहना है कि फॉलोअप में दिखाने में एक महीने लग गए। उनका कहना है कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए सरकार को अब सभी अस्पतालों की ओपीडी खोल देनी चाहिए।   

तत्काल इलाज नहीं मिलने से बिगड़ रही हालत
बिहार के पटना के रहने वाले अखिलेश कुमार को किडनी संबंधी बीमारी है। हालत बिगड़ने पर पटना से रेफर होकर पांच दिन पहले पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचे। इमरजेंसी से यह कहकर लौटा दिया गया कि पहले टेली कंसल्टेशन से पंजीकरण कराएं। अखिलेश को पटना से रेफर होने के बाद लगा था कि पीजीआई में तत्काल इलाज मिलेगा लेकिन चार दिनों से सुबह 8 से 9.30 बजे तक पीजीआई के नंबरों पर कॉल कर रहे हैं। 

बीते गुरुवार को नंबर लगा तो बताया गया कि पंजीकरण कर लिया गया है। अब किडनी के डॉक्टर से तय दिन पर कॉल कर बात कर लें। अखिलेश ने कहा कि इलाज की उम्मीद में वे परिवार से बड़ी दूर आए हैं लेकिन यहां इलाज तो क्या होना चक्कर में फंसा दिया। तत्काल इलाज न मिलने से उनकी हालत बिगड़ती जा रही है।

किस राज्य से कितने मरीज आते हैं

  • राज्य        कुल मरीज       प्रतिशत
  • पंजाब         1092993      38.5        
  • हरियाणा     526506       18.6
  • चंडीगढ़       505315       17.8
  • हिमाचल      371540      13.1
  • उत्तर प्रदेश  127358       4.5
  • जम्मू कश्मीर  81827       2.9
  • उत्तराखंड       29429       1.0
  • अन्य राज्य      101312    3.6
  • कुल           2836282       100

नोट -पीजीआई के साल 2019-20 के आंकड़े

 ओपीडी कब तक शुरू होगी, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है लेकिन प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द सभी सेवाएं फिर से बहाल कर दी जाएं। प्रो. जगतराम, पीजीआई निदेशक।

 

ओपीडी शुरू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। जहां तक नंबर नहीं लगने की बात है तो इसकी संख्या बढ़ा दी गई है। पीजीआई की पूरी कोशिश है कि मरीजों को जल्द और बेहतर इलाज मिले। - डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता।

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