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Hindi News ›   Chandigarh ›   Chandigarh Nagar Nigam Gave Approval to start 24 hour Water Supply Project from March 2022

चंडीगढ़: अगले साल मार्च से सिटी को मिलेगा 24 घंटे पानी, नगर निगम सदन की बैठक में मंजूरी 

Wed, 28 Apr 2021 09:06 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 28 Apr 2021 09:06 PM IST
सार

इस योजना के लिए दिसंबर में टेंडर लगाने के साथ मार्च 2022 से काम शुरू कराने की तैयारी है। इस पर सदन ने अपनी सहमति दे दी।
 

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Chandigarh Nagar Nigam Gave Approval to start 24 hour Water Supply Project from March 2022
चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम सदन की बैठक में सातों दिन 24 घंटे पानी की आपूर्ति की स्थिति बताने के लिए एजेंडा लाया गया। स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा और चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इसके लिए 100 करोड़ की ग्रांट यूरोपियन यूनियन से मिल रही है, जो लौटानी नहीं है। वहीं, 60 करोड़ स्मार्ट सिटी व 20 करोड़ नगर निगम दे रहा है। इसके अलावा फ्रांस सरकार से कर्ज मिलेगा। यह प्रोजेक्ट 591 करोड़ का है। इसमें लोगों को जागरूक करने के साथ पुनर्वास कॉलोनियों में भी पानी की बेहतर आपूर्ति की जाएगी। इस योजना के लिए दिसंबर में टेंडर लगाने के साथ मार्च 2022 से काम शुरू कराने की तैयारी है। इस पर सदन ने अपनी सहमति दे दी।

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कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ ने कहा कि यह योजना लोगों को चांदी के गिलास में पानी पिलाने जैसी है। पहले कहा कि दो अतिरिक्त फेज का पानी आ जाएगा तो लो-प्रेशर की कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन यह समस्या जस की तस है। उस योजना का कोई लाभ नहीं है, जहां कर्ज लेकर लोगों को पानी दिया जा रहा है। इसका बोझ भी शहर की जनता पर ही पड़ेगा। इस पर नगर निगम आयुक्त केके यादव ने कहा कि इस योजना से होने वाले लाभ को बताने के लिए लोगों को जागरूक करने का कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। इस कर्ज के लिए लोग लड़ते हें और आप इसे खराब बता रहे हैं।

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एक माह का वेतन दान देंगे पार्षद 

पार्षद व मनोनीत पार्षद कोरोना काल में शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर व अन्य स्वास्थ्य उपकरणों के लिए अपना एक माह का वेतन देंगे। इसके अलावा वार्ड फंड से भी मदद करेंगे। नगर निगम आयुक्त केके यादव ने कहा कि कोविड सेस से भी इन व्यवस्थाओं के लिए मदद कर सकते हैं। मेयर रविकांत शर्मा ने कहा कि प्रशासन को पत्र लिखकर इससे अवगत करा दिया जाएगा। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग जैसा कहेगा, उसके अनुसार हम मदद करने को तैयार हैं। वहीं, निगम ने अब हर साल बढ़ने वाले सामुदायिक केंद्रों के दाम भी कम कर दिए हैं। अब बेस प्राइज पर ही लोगों को सामुदायिक केंद्र मिलेंगे।
 
सेक्टर 23 में दुकानों के किराए पर प्रशासन से होगी चर्चा, प्लांट के लिए पार्षद देखेंगे प्रस्तुतीकरण
सेक्टर-23 में दुकानों का किराया कम कर 5100 रुपये करने और दुकानदारों को मालिकाना हक देने के लिए सदन ने प्रस्ताव पास कर प्रशासन से चर्चा करने को कहा है। बता दें कि सेक्टर-23 की दुकानों का किराया 14 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं, कचरा निस्तारण प्लांट के लिए आई 11 कंपनियों का पार्षद एक बार प्रस्तुतीकरण देखेंगे। उसके बाद किसी कंपनी को तय किया जाएगा। 

सूखे-गीले कचरा के निस्तारण के बाद सैनेटरी लैंडफिल पर बचे हुए कचरा को डाला जाएगा। इस कचरे से निकलने वाले लीचेट को साफ कर सीवर के माध्यम से निकाला जाएगा। वहीं, वर्टिकल पाइप पर पोर्टेबल फ्लेयरिंग पद्धति से गैस को आग लगा दी जाएगी, जिससे कचरे में आग नहीं लगेगी। लोगों को कचरे से उठने वाली दुर्गंध से राहत देने के लिए सैनेटरी लैंडफिल पर विंड स्क्रीन लगाई जाएगी। धूल से बचाने के लिए बड़ी दीवार खड़ी की जाएगी।

चालक की भर्ती पर बबला-मेयर में बहस

गाड़ी चालकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भाजपा व कांग्रेस के पार्षद आमने सामने आ गए। इस दौरान कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने मेयर रविकांत शर्मा पर आरोप लगाया कि वह कमिश्नर को बिना टेस्ट के 135 लोगों को भर्ती करने के लिए सिफारिश पत्र भेज रहे हैं। यह भी चर्चा है कि भर्ती के लिए एक-एक लाख रुपये लिया जा रहा है। मेयर रविकांत शर्मा ने बबला को जवाब दिया कि आप अच्छी तरह जानते हो कि अदालत से आपको सजा सुनाई जा चुकी है। बबला ने मेयर को कहा कि आपकी वजह से नगर निगम की बदनामी हो रही है।

83 कर्मचारियों को पक्का करने पर भी आमने-सामने
नगर निगम के 83 अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करने का मामला सदन में गरमाया रहा। पार्षद अरुण सूद ने कहा कि 172 स्थायी कर्मचारियों की भर्ती को रोककर पहले अस्थायी कर्मचारियों को समायोजित किया जाए। निगम आयुक्त ने कहा कि जो अस्थायी कर्मचारी पहले से भर्ती हैं, उनकी भर्ती में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। काफी देर तक बहस के बाद आयुक्त ने कहा कि नियमित भर्ती होने के बावजूद इन 83 अस्थायी कर्मचारियों को निकाला नहीं जाएगा। इस पर सर्वसहमति से प्रस्ताव पास हो गया।
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