{"_id":"5a736e7d4f1c1b9f268b7be8","slug":"chandigarh-mc-will-do-not-run-without-tax","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बजट में नगर निगम को मिला ठेंगा, चंडीगढ़वासी अब टैक्स के लिए तैयार रहें...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट में नगर निगम को मिला ठेंगा, चंडीगढ़वासी अब टैक्स के लिए तैयार रहें...
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 02 Feb 2018 09:37 AM IST
विज्ञापन
Municipal Corporation office Chandigarh
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार शहरवासियों पर टैक्सों और पानी के रेट बढ़ाने का बोझ पड़ने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि बजट पास होने के बाद प्रशासन की ओर से नगर निगम की ग्रांट इन एड 269 करोड़ रुपये ही तय की है। हालांकि प्रशासन ने केंद्र सरकार से नगर निगम के लिए 1100 करोड़ रुपये की ग्रांट मांगी थी। नगर निगम ने खुद का 910 करोड़ का बजट तय किया है, जो इस माह होने वाली सदन की बैठक में पास किया जाएगा।
सांसद किरण खेर और मेयर देवेश मोदगिल ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री से नगर निगम के लिए अतिरिक्त ग्रांट की मांग की थी, लेकिन यह मांग केंद्र सरकार ने खारिज कर दी है। प्रशासन की ओर से नगर निगम को 269 करोड़ रुपये की ग्रांट पास होने का पत्र आया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि नगर निगम भविष्य में अपनी आय के साधन खुद ही पैदा करे।
शहरवासियों पर अतिरिक्त बोझ इसलिए भी पड़ने की उम्मीद है क्योंकि नगर निगम के पास जो एफडी है वह भी 75 करोड़ रुपये की ही बची है। लेकिन साल 2018-19 के बजट के लिए नगर निगम के पास कोई एफडी भी नहीं रह जाएगी क्योंकि जो 75 करोड़ की एफडी है वह इस साल ही टूट जाएगी। ऐसे में नगर निगम में वित्तीय संकट मंडरा गया है। यह एफडी 6 साल पहले 500 करोड़ की थी।
विज्ञापन
सिर्फ 269 करोड़ की ग्रांट पास होने के बाद अब नगर निगम के बहुत से प्रोजेक्ट संकट में पड़ गए हैं। जबकि नए वित्तीय सत्र में इस बजट में से कोई नया प्रोजेक्ट भी शहरवासियों को नहीं मिलेगा। नगर निगम को हर साल 70 करोड़ रुपये का घाटा पानी की सप्लाई से हो रहा है। ऐसे में अतिरिक्त ग्रांट न मिलने से नगर निगम इस घाटे को पूरा करने की रणनीति बना रहा है। नगर निगम का जनस्वास्थ्य विभाग पानी का रेट बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार कर चुका है।
विज्ञापन
सांसद किरण खेर और मेयर देवेश मोदगिल ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री से नगर निगम के लिए अतिरिक्त ग्रांट की मांग की थी, लेकिन यह मांग केंद्र सरकार ने खारिज कर दी है। प्रशासन की ओर से नगर निगम को 269 करोड़ रुपये की ग्रांट पास होने का पत्र आया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि नगर निगम भविष्य में अपनी आय के साधन खुद ही पैदा करे।
विज्ञापन
शहरवासियों पर अतिरिक्त बोझ इसलिए भी पड़ने की उम्मीद है क्योंकि नगर निगम के पास जो एफडी है वह भी 75 करोड़ रुपये की ही बची है। लेकिन साल 2018-19 के बजट के लिए नगर निगम के पास कोई एफडी भी नहीं रह जाएगी क्योंकि जो 75 करोड़ की एफडी है वह इस साल ही टूट जाएगी। ऐसे में नगर निगम में वित्तीय संकट मंडरा गया है। यह एफडी 6 साल पहले 500 करोड़ की थी।
विज्ञापन
सिर्फ 269 करोड़ की ग्रांट पास होने के बाद अब नगर निगम के बहुत से प्रोजेक्ट संकट में पड़ गए हैं। जबकि नए वित्तीय सत्र में इस बजट में से कोई नया प्रोजेक्ट भी शहरवासियों को नहीं मिलेगा। नगर निगम को हर साल 70 करोड़ रुपये का घाटा पानी की सप्लाई से हो रहा है। ऐसे में अतिरिक्त ग्रांट न मिलने से नगर निगम इस घाटे को पूरा करने की रणनीति बना रहा है। नगर निगम का जनस्वास्थ्य विभाग पानी का रेट बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार कर चुका है।
स्मार्ट सिटी से पहले ही खर्च नहीं कर पाया निगम
Mayor Davesh Moudgil
- फोटो : File Photo
पिछले साल भी नगर निगम का 269 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था, लेकिन उससे भी नगर निगम की 67 करोड़ रुपये की ग्रांट अभी तक पेंडिंग थी। इसमें से 35 करोड़ 72 लाख रुपये की ग्रांट ही प्रशासन ने बुधवार को जारी की है। बाकी 32 करोड़ रुपये की ग्रांट रोक ली गई है।
स्मार्ट सिटी से पहले ही खर्च नहीं कर पाया निगम
स्मार्ट सिटी के तहत केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन को 296 करोड़ की राशि पिछले दो साल में मिली है। इसमें से सिर्फ 2.80 करोड़ रुपये का ही खर्च हो पाया है। ऐसे में इस मद में नई ग्रांट मिलने का कोई फायदा शहर को नहीं है। खर्च न होने का एक बड़ा कारण यह है कि प्रशासन स्मार्ट सिटी बनाने वाली टीम का गठन तक नहीं कर पा रहा है।
ग्रांट इन एड चाहे पिछले साल की तरह ही मिली है, लेकिन शहरवासियों की कोई भी सुविधा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। कहीं न कहीं से पैसा जरूर लाया जाएगा। कोई भी प्रोजेक्ट रुकने नहीं दिया जाएगा।
- देवेश मोदगिल, मेयर
केंद्र में भाजपा की सरकार है। शहर में भाजपा की सांसद हैं और नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है। इसके बावजूद नगर निगम के बजट में कटौती लग रही है, यह बड़ी हैरानी की बात है। जब तक शहर के सांसद पवन बंसल रहे शहर को कभी वित्तीय संकट से नहीं जूझना पड़ा।
- दवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस पार्षद एवं महासचिव
स्मार्ट सिटी से पहले ही खर्च नहीं कर पाया निगम
स्मार्ट सिटी के तहत केंद्र सरकार की ओर से प्रशासन को 296 करोड़ की राशि पिछले दो साल में मिली है। इसमें से सिर्फ 2.80 करोड़ रुपये का ही खर्च हो पाया है। ऐसे में इस मद में नई ग्रांट मिलने का कोई फायदा शहर को नहीं है। खर्च न होने का एक बड़ा कारण यह है कि प्रशासन स्मार्ट सिटी बनाने वाली टीम का गठन तक नहीं कर पा रहा है।
ग्रांट इन एड चाहे पिछले साल की तरह ही मिली है, लेकिन शहरवासियों की कोई भी सुविधा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। कहीं न कहीं से पैसा जरूर लाया जाएगा। कोई भी प्रोजेक्ट रुकने नहीं दिया जाएगा।
- देवेश मोदगिल, मेयर
केंद्र में भाजपा की सरकार है। शहर में भाजपा की सांसद हैं और नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है। इसके बावजूद नगर निगम के बजट में कटौती लग रही है, यह बड़ी हैरानी की बात है। जब तक शहर के सांसद पवन बंसल रहे शहर को कभी वित्तीय संकट से नहीं जूझना पड़ा।
- दवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस पार्षद एवं महासचिव