{"_id":"5a51b26d4f1c1bd5178b5579","slug":"chandigarh-mayor-election-chandigarh-nagar-nigam-president-election","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के बाद इस पद के लिए मचेगा घमासाम, जानिए क्यों?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के बाद इस पद के लिए मचेगा घमासाम, जानिए क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 07 Jan 2018 11:09 AM IST
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चंडीगढ़ बीजेपी, संजय टंडन
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चंडीगढ़ नगर निगम मेयर पद के चुनाव बाद भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। जाहिर है पार्टी में एक बार फिर घमासान मचने की उम्मीद है। मेयर पद के चुनाव से पहले मोदगिल को उम्मीदवार बनाए जाने केपीछे टंडन गुट के पार्षदों का हंगामा इसीलिए है, ताकि हाईकमान नया भाजपा अध्यक्ष टंडन गुट से ही नियुक्त करे। जबकि सांसद किरण खेर का गुट ऐसा नहीं चाहता। खेर गुट अध्यक्ष पद भी अपने ही खेमे के नेता के पास रखना चाहता है। ऐसे में माना जा रहा है कि मेयर चुनाव बाद पार्टी में गुटबाजी और उभरेगी।
संघ से जुड़े नेता को मिलेगी तरजीह
वर्तमान भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। वह इस समय एक्सटेशन पर चल रहे हैं। अभी तक ऐसा कोई भाजपा अध्यक्ष नहीं रहा है, जिसका कार्यकाल आठ साल का हो गया हो। यही वजह है कि पार्टी अब लोकसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ भाजपा को नया अध्यक्ष देना चाहती है। पार्टी में पहले भी दो बार प्रदेश अध्यक्ष बदलने के लिए मंथन हो चुका है, लेकिन इस बीच कोई न कोई चुनाव के कारण मामला टलता रहा है। हालांकि अब हाईकमान ने टंडन को बदलने का पूरा मन बना लिया है। संघ से जुड़ा नेता ही नया प्रदेश अध्यक्ष होगा।
हाईकमान चाहता है युवा नेतृत्व
हाईकमान 50 साल की उम्र से नीचे का अध्यक्ष चाहता है। वहीं टंडन गुट ने हाईकमान के समक्ष यह भी दबाव बनाया है कि मेयर चुनाव से पहले ही अध्यक्ष बदल दिया जाए। नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए टंडन और सांसद किरण खेर गुट चाहते हैं कि उनके करीबी को ही नया अध्यक्ष बनाया जाए। इसका एक बड़ा कारण यह है कि आने वाले समय में लोकसभा चुनाव होने हैं। यह चुनाव नए अध्यक्ष के नेतृत्व में होगा। तब टिकट बंटवारे के मामले में भी प्रदेश अध्यक्ष की अहम भूमिका होगी।
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सांसद किरण खेर फिर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं। खेर गुट को पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का साथ मिल रहा है। जबकि संजय टंडन भी लोकसभा चुनाव में टिकट के लिए दावेदारी पक्की मान रहे हैं।
दावेदार बनने से पहले सूद को प्रलोभन
भाजपा में मेयर पद की उम्मीदवारी के लिए देवेश मोदगिल के अलावा अरुण सूद दावेदार थे। फिर भी टंडन गुट एक माह पहले से यह संभावना जता रहा था कि अरुण सूद को पार्टी उम्मीदवार नहीं बनाएगी, क्योंकि सूद इससे पहले मेयर रह चुके हैं। हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि सूद को रिपीट नहीं किया जाएगा। ऐसे में सूद को टंडन गुट की ओर से अध्यक्ष पद की दावेदारी का प्रलोभन दिया गया, लेकिन तब मेयर बनने की चाहत में सूद ने इसे ठुकरा दिया था।
अब जाहिर है कि सूद के अध्यक्ष पद की दावेदारी पर सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का गुट विरोध करेगा। खेर गुट मोदगिल को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले पर सूद के बगावती तेवर को भी अनुशासनहीनता के तौर पर मुद्दा बना सकता है। इससे पहले जब-जब अध्यक्ष पद के दावेदारों की बात होती थी, इसमें मोदगिल का नाम भी शामिल था। अब मोदगिल के मेयर उम्मीदवार बनने से वह अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं।
टंडन को तीसरी बार नहीं बनाया जा सकता अध्यक्ष
संजय टंडन का कार्यकाल पिछले साल जनवरी में ही समाप्त हो चुका है। पार्टी संविधान के अनुसार टंडन तीसरी बार अध्यक्ष नहीं हो सकते। मालूम हो कि टंडन के पिता बलराम दास टंडन छत्तीसगढ़ के गवर्नर भी हैं।
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संघ से जुड़े नेता को मिलेगी तरजीह
वर्तमान भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। वह इस समय एक्सटेशन पर चल रहे हैं। अभी तक ऐसा कोई भाजपा अध्यक्ष नहीं रहा है, जिसका कार्यकाल आठ साल का हो गया हो। यही वजह है कि पार्टी अब लोकसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ भाजपा को नया अध्यक्ष देना चाहती है। पार्टी में पहले भी दो बार प्रदेश अध्यक्ष बदलने के लिए मंथन हो चुका है, लेकिन इस बीच कोई न कोई चुनाव के कारण मामला टलता रहा है। हालांकि अब हाईकमान ने टंडन को बदलने का पूरा मन बना लिया है। संघ से जुड़ा नेता ही नया प्रदेश अध्यक्ष होगा।
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हाईकमान चाहता है युवा नेतृत्व
हाईकमान 50 साल की उम्र से नीचे का अध्यक्ष चाहता है। वहीं टंडन गुट ने हाईकमान के समक्ष यह भी दबाव बनाया है कि मेयर चुनाव से पहले ही अध्यक्ष बदल दिया जाए। नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए टंडन और सांसद किरण खेर गुट चाहते हैं कि उनके करीबी को ही नया अध्यक्ष बनाया जाए। इसका एक बड़ा कारण यह है कि आने वाले समय में लोकसभा चुनाव होने हैं। यह चुनाव नए अध्यक्ष के नेतृत्व में होगा। तब टिकट बंटवारे के मामले में भी प्रदेश अध्यक्ष की अहम भूमिका होगी।
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सांसद किरण खेर फिर से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं। खेर गुट को पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का साथ मिल रहा है। जबकि संजय टंडन भी लोकसभा चुनाव में टिकट के लिए दावेदारी पक्की मान रहे हैं।
दावेदार बनने से पहले सूद को प्रलोभन
भाजपा में मेयर पद की उम्मीदवारी के लिए देवेश मोदगिल के अलावा अरुण सूद दावेदार थे। फिर भी टंडन गुट एक माह पहले से यह संभावना जता रहा था कि अरुण सूद को पार्टी उम्मीदवार नहीं बनाएगी, क्योंकि सूद इससे पहले मेयर रह चुके हैं। हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि सूद को रिपीट नहीं किया जाएगा। ऐसे में सूद को टंडन गुट की ओर से अध्यक्ष पद की दावेदारी का प्रलोभन दिया गया, लेकिन तब मेयर बनने की चाहत में सूद ने इसे ठुकरा दिया था।
अब जाहिर है कि सूद के अध्यक्ष पद की दावेदारी पर सांसद किरण खेर और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का गुट विरोध करेगा। खेर गुट मोदगिल को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले पर सूद के बगावती तेवर को भी अनुशासनहीनता के तौर पर मुद्दा बना सकता है। इससे पहले जब-जब अध्यक्ष पद के दावेदारों की बात होती थी, इसमें मोदगिल का नाम भी शामिल था। अब मोदगिल के मेयर उम्मीदवार बनने से वह अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं।
टंडन को तीसरी बार नहीं बनाया जा सकता अध्यक्ष
संजय टंडन का कार्यकाल पिछले साल जनवरी में ही समाप्त हो चुका है। पार्टी संविधान के अनुसार टंडन तीसरी बार अध्यक्ष नहीं हो सकते। मालूम हो कि टंडन के पिता बलराम दास टंडन छत्तीसगढ़ के गवर्नर भी हैं।