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चंडीगढ़ का एकमात्र गारबेज प्लांट 31 मार्च से बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Mar 2016 10:05 AM IST
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शहर का एकमात्र जेपी गारबेज प्लांट पर 31 मार्च को बंद हो जाएगा। कंपनी ने नगर निगम को अल्टीमेटम दिया है कि वह अपने स्तर पर एक अप्रैल से व्यवस्था कर ले। इस समय पूरे शहर का कूड़ा इस प्लांट में प्रोसेस हो रहा है। सोमवार को अधिकारियों ने यह बात सदन के समक्ष रखी।
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इसके बाद सदन ने निर्णय लिया कि अगर कंपनी जाना चाहती है तो उसे जाने दिया जाए। सदन में यह निर्णय लिया गया कि वैकल्पिक व्यवस्था 31 मार्च से पहले कर ली जाए। चर्चा के दौरान पूर्व मेयर सुभाष चावला ने कहा कि कंपनी 30 साल से पहले यह प्लांट छोड़ नहीं सकती, क्योंकि कंपनी के साथ नगर निगम का समझौता हुआ है।
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मालूम हो कि समय समय पर पार्षद प्लांट से दुर्गंध आने की शिकायत कर चुके हैं। निगम पिछले साल नवंबर में ही जेपी गारबेज प्लांट की प्रोसेसिंग फीस की मांग को खारिज कर चुकी है।
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इस समय एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश पर यह प्लांट शिमला का भी कूड़ा प्रोसेस कर रहा है। अल्टीमेटम देने के बाद कंपनी ने अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया है। कंपनी ने जो अल्टीमेटम दिया है, उसमें कहा कि उन्हें प्लांट चलाकर काफी नुकसान हो रहा है। प्लांट के अनुसार हर साल छह करोड़ की हानि हो रही है। कंपनी नगर निगम से कई बार कूड़ा प्रोेसेस करने के बदले में टिपिंग फीस मांग चुकी है, लेकिन निगम इसके लिए तैयार नहीं है।
प्लांट के प्रभारी आरडी शर्मा का कहना है कि दुनिया में कोई भी प्लांट ऐसा नहीं है जो कूड़ा प्रोसेस करने के बदले में टिपिंग फीस न ले रही हो। उन्होंने कहा कि हम नगर निगम से अपना अधिकार मांग रहे हैं। उनका कहना है कि अगर निगम उनका नुकसान पूरा कर देता है तो वह प्लांट को अपडेट करने को भी तैयार हैं। उनका कहना है कि नगर निगम को 31 मार्च तक प्लांट चलाने का अल्टीमेटम दिया गया है। साल 2006 से कंपनी डड्डूमाजरा में प्लांट चला रही है।
250 टन कूड़ा होता है प्रोसेस
इस प्लांट में प्रतिदिन 250 टन कूड़ा प्रोसेस के लिए पहुंच रहा है, जबकि 100 टन गारबेज सीधा डंपिंग ग्राउंड में पहुंच रहा है। गारबेज प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 370 टन तक कूड़ा प्रोसेस करने की है।
इतनी फीस मांग रहा है प्लांट
जेपी प्लांट ने एक हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से कूड़ा प्रोसेस फीस की मंाग की है। एनजीटी के निर्देश पर पांच माह से हिमाचल का कूड़ा भी प्रोसेस के लिए चंडीगढ़ आ रहा है। चंडीगढ़ नगर निगम ने ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती भी दी हुई है। हिमाचल प्रतिदिन शहर में 60 टन कूड़ा भेज रहा है, इसमें शिमला, सोलन और बद्दी का कूड़ा भी शामिल है। 31 मार्च को प्लांट बंद होने से हिमाचल को भी अपने कूड़ा प्रोेसेस की अलग व्यवस्था करनी होगी।