चंडीगढ़ निगम पर वित्तीय संकट: छह माह में सैलरी देने के भी नहीं बचेंगे पैसे, चाहिए 420 करोड़, कमाई-300 करोड़
निगम को छह महीने में 420 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। ये भी सिर्फ वेतन व जरूरी खर्चे हैं। वार्डों के विकास कार्यों पर खर्च को जोड़ा भी नहीं गया है। वहीं, निगम की कमाई और प्रशासन से मिलने वाला ग्रांट-इन-एड जोड़कर भी अनुमानित करीब 300 करोड़ होता है।
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चंडीगढ़ नगर निगम भीषण वित्तीय संकट की तरफ बढ़ रहा है। जल्द राजस्व नहीं बढ़ा तो अगले 6 महीने के अंदर कर्मचारियों को वेतन देने के भी पैसे नहीं बचेंगे।
निगम का हर महीने करीब 70 करोड़ रुपये कर्मचारियों को वेतन, वेजेस, पेंशन व अन्य अनिवार्य बिलों के भुगतान में खर्च होता है। इस तरह अगले छह महीने के लिए निगम को करीब 420 करोड़ रुपये चाहिए लेकिन प्रशासन से मिलने वाले ग्रांट-इन-एड और खुद की कमाई के बाद भी निगम को करीब 120 करोड़ रुपये कम पड़ने वाले हैं।
भाजपा पार्षद ने पूछा था सवाल
भाजपा के पार्षद महेशइंदर सिंह सिद्धू ने नगर निगम से लिखित में इस संबंध में कई सवाल पूछे थे और निगम के बजट को लेकर जवाब मांगा था। उन्होंने छह सवाल पूछे थे। निगम के जवाब से स्पष्ट हो गया कि निगम की स्थिति वाकई बेहद खराब है। सिद्धू ने इसको लेकर सदन में भी सवाल उठाया और कहा कि इस पर सभी ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि ऐसा ही चलता रहा तो निगम के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे भी नहीं होंगे।
120 करोड़ का डेफिसेट कैसे होगा पूरा
बैठक में पूछा गया कि निगम की हर महीने कमिटिड लायबिलिटी (प्रतिबद्ध देनदारियां) कितनी है। संयुक्त आयुक्त गुरिंदर सोढ़ी ने जवाब दिया कि करीब 70 करोड़ रुपये। जोड़ा गया तो निगम को छह महीने में 420 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। ये भी सिर्फ वेतन व जरूरी खर्चे हैं। वार्डों के विकास कार्यों पर खर्च को जोड़ा भी नहीं गया है। वहीं, निगम की कमाई और प्रशासन से मिलने वाला ग्रांट-इन-एड जोड़कर भी अनुमानित करीब 300 करोड़ हो रहा है। ऐसे में सभी चिंतित हैं कि 120 करोड़ का डेफिसिट कैसे पूरा होगा। ऐसे में अब पार्षदों और अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि निगम अब कर्मचारियों को वेतन देने के लिए ही संघर्ष करेगा। विकास कार्य पर खर्च तो दूर हैं। सदन की बैठक में वित्तीय संकट पर चर्चा के दौरान आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने भी कि उनका मानना है कि निगम में फंड अर्जित हो सकते हैं। उसपर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्षदों को साथ की भी जरूरत हैं।
आंकड़ों से समझिए, कैसे आ सकता है संकट
जरूरी खर्चों (हर महीने 70 करोड़) के लिए ही अगले 6 महीने में नगर निगम को 420 करोड़ रुपये की जरूरत है। वित्त वर्ष 2024-25 में निगम को प्रशासन से 560 करोड़ रुपये मिलने हैं। इसमें से 387 करोड़ मिल भी चुके हैं। अब सिर्फ 173 करोड़ रुपये ही मिलेंगे। दूसरी तरफ, निगम ने एक अप्रैल 2024 से 23 सितंबर 2024 तक खुद से 167 करोड़ कमाए हैं। पार्षदों का अनुमान है कि अगले छह महीने तक निगम औसतन हर महीने 20 करोड़ रुपये कमाएगा। इस अनुसार छह महीने में 120-125 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। अगर प्रशासन से मिलने वाले पैसे और निगम की अनुमानित अगले छह महीने की खुद की कमाई को जोड़ दें तो करीब 300 करोड़ रुपये निगम को अगले छह महीने में आएंगे। लेकिन जरूरत 420 करोड़ की है। ऐसे में 120 करोड़ का डिफिसिट हो सकता है।निगम की कमाई (एक अप्रैल 2024 से 23 सितंबर 2024)
महीना राशिअप्रैल 35 करोड़
मई 46 करोड़
जून 26 करोड़
जुलाई 21 करोड़
अगस्त 24 करोड़
सितंबर 15 करोड़ (23 सितंबर तक)
कुल 167 करोड़
(नोटः अप्रैल और मई महीने में संपत्ति कर जमा होते हैं। इसलिए इन दो महीनों में राजस्व ज्यादा आता है।)
प्रशासन से मिलने वाली राशि (वर्ष 2024-25)
कुल - 560 करोड़मिल चुके- 387 करोड़
बाकी - 173 करोड़
नगर निगम का खुद की कमाई का अनुमान और वास्तविकता
वर्ष अनुमानित वास्तविक खुद की कमाई
2023-24 550.83 करोड़ 328 करोड़
2024-25 445.14 करोड़ 335 से 345 करोड़ (अनुमानित)