चंडीगढ़ में अच्छी पहल: कोरोना काल में अनाथ होने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा देगा प्रशासन
सरकारी स्कूल के शिक्षकों को बच्चों के घर-घर जाकर सर्वे करने को कहा गया है। वहीं मां या पिता में किसी एक को खोने वाले बच्चों को भी प्रशासन मदद मुहैया कराएगा। बच्चों के आर्थिक हालात के आधार पर कॉलेज शिक्षा का खर्च शिक्षा विभाग वहन करेगा।
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कोरोना महामारी की वजह से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को चंडीगढ़ प्रशासन मुफ्त शिक्षा मुहैया कराएगा। इसके लिए सरकारी स्कूल के शिक्षकों को बच्चों के घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के बाद इस बारे में उच्च अधिकारियों की बैठक की जाएगी। मां या पिता को खोने वाले बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा। बच्चे के आर्थिक हालात देखते हुए उसकी कॉलेज की शिक्षा का खर्च भी शिक्षा विभाग वहन कर सकता है।
जिला शिक्षा अधिकारी नीना कालिया ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि जिन बच्चों ने कोरोना महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है, शिक्षक उनके घर जाकर सर्वे करेंगे। इन बच्चों की पूरी डिटेल जिला शिक्षा अधिकारी दफ्तर को शनिवार तक दोपहर 2 बजे तक dnoculture@gmail.com पर मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ भेजनी होगी।
विभाग के उच्चाधिकारी ने बताया कि शहर के सरकारी स्कूल में पढ़ रहे जो बच्चे कोरोना महामारी के कारण अपने अभिभावकों को खो चुके हैं। उन्हें 9वीं से आगे की शिक्षा मुफ्त में प्रदान करवाने की योजना बना रहे हैं। शुक्रवार को बच्चों की पूरा विवरण मिलने के बाद यूटी प्रशासन के उच्च अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। उनके राय के अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा। अगले माह तक योजना बनाकर इसे लागू किया जाएगा।
शहर में नहीं बढ़ेगा ग्रीष्मावकाश
शहर के सरकारी स्कूलों में 31 मई तक सरकारी स्कूलों में ग्रीष्मावकाश है। अभी सिर्फ दसवीं के इंचार्ज या दाखिले से संबंधित शिक्षकों को ही स्कूल बुलाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि अभी ग्रीष्मावकाश को बढ़ाने की कोई योजना नहीं हैं। पड़ोसी राज्यों की ओर से ग्रीष्मावकाश में 15 दिन की बढ़ोतरी करने के बाद शहर के शिक्षक भी कोरोना संक्रमण के समय में अवकाश बढ़ाने की मांग कर रहे हैं या घर से काम करने की अनुमति दी जाए।
शिक्षक बोले- टीकाकरण के बाद ही बुलाया जाए स्कूल
शिक्षकों ने बताया कि शहर के स्कूलों के बहुत से शिक्षक इस समय कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हुए हैं। लगभग दो से तीन सौ के बीच शिक्षक व स्कूल कर्मचारी कंटेनमेंट जोन, टीकाकरण शिविरों, अस्पतालों आदि में ड्यूटी दे रहे हैं। ऐसे में अगर सभी को स्कूल बुलाया जाता है तो संक्रमण के फैलने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
प्रशासन से मांग है कि पहले सभी शिक्षकों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करवाया जाए। इसके बाद स्कूलों को शिक्षकों के लिए पूरी तरह खोला जाए। 45 से अधिक उम्र के बहुत से शिक्षक कोरोना का टीका लगवा चुके हैं। लेकिन 45 से कम उम्र के बहुत से शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का अभी टीकाकरण नहीं हुआ है।