Chandigarh: पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को दिया झटका, कहा-झुग्गियों में रहने वाले भी देश के नागरिक, उन्हें भी जीवन का अधिकार
हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या जिन लोगों को बेघर किया जा रहा है, उनका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास होगा। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि इसके एक प्रावधान के तहत निर्माण की स्थिति में 25 प्रतिशत सब्सिडी के लिए आवेदन करना होता है जो याचिकाकर्ताओं ने नहीं किया।
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चंडीगढ़ में झुग्गियों पर बुलडोजर चलाने की यूटी प्रशासन की मुहिम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। शाहपुर राजीव कॉलोनी को गिराने को चुनौती देने वाली याचिका में हाईकोर्ट ने केंद्र को पक्ष बनाते हुए नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों ने झुग्गियां बनाईं, भले ही जमीन उनकी नहीं लेकिन वे भी भारत के नागरिक हैं और उन्हें भी जीवन का अधिकार है। ऐसे में केंद्र सरकार का सक्षम अधिकारी पुनर्वास को लेकर हलफनामा दाखिल करे।
राजेंद्र कुमार व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने 14 मई को नोटिस जारी करते हुए उन्हें कॉलोनी खाली करने को कहा है। याची ने बताया कि कॉलोनी में सभी लोग करीब तीन दशक से रहते हैं। उन्हें बिजली के कनेक्शन, सीवर व पानी आदि के कनेक्शन देकर प्रशासन इस कॉलोनी को एक तरह से मान्यता देता रहा है। यहां के निवासियों के राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड और पैन कार्ड भी इसी पते पर जारी किए गए हैं। इसके साथ ही हाल ही में हुए निगम चुनाव में यहां के निवासियों ने वोट भी दिया है। इसके बावजूद अब उन्हें हटाने की तैयारी की जा रही है।
फैसले से पांच हजार लोग सड़क पर आने को मजबूर
याची ने बताया कि 14 मई को हिंदी, अंग्रेजी व पंजाबी भाषा में नोटिस चस्पा कर कॉलोनी को खाली करने को कह दिया गया। इस नोटिस के चलते करीब पांच हजार लोग सड़क पर आने को मजबूर हो जाएंगे। इस पर यूटी प्रशासन ने कहा कि नोटिस पर यदि कोई आपत्ति है तो याची अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं और प्रशासन उस पर निर्णय ले लेगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने जो नोटिस जारी किया है उसमें आपत्ति दर्ज कराने का समय ही नहीं दिया गया है।
क्या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत होगा पुनर्वास
हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या जिन लोगों को बेघर किया जा रहा है, उनका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास होगा। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि इसके एक प्रावधान के तहत निर्माण की स्थिति में 25 प्रतिशत सब्सिडी के लिए आवेदन करना होता है जो याचिकाकर्ताओं ने नहीं किया। चंडीगढ़ छोटा सा शहर है और इसके इतने छोटे क्षेत्रफल को देखते हुए बाकी के तीन प्रावधानों को चंडीगढ़ प्रशासन ने अपनाया ही नहीं है।
चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना की सच्चाई
केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन हाउसिंग फॉर ऑल’ योजना का चंडीगढ़ के लोगों को कुछ खास लाभ नहीं मिला है। पक्के मकान के लिए करीब सवा लाख लोगों ने आवेदन किया। कई चरणों के बाद 444 लोग छांटे गए लेकिन आज तक एक को भी मकान नहीं मिला। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वो किसी को भी मकान बनाकर नहीं देंगे। अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ में जमीन कम है और जो जमीन है, उसके दाम काफी ज्यादा है इसलिए, प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए और आवेदकों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) में ही विलय कर दिया। अब प्रशासन व बोर्ड लोगों को लोन लेकर खुद घर लेने की सलाह दे रहा है। इसके तहत 1580 से ज्यादा लोगों को लोन दिलाया गया है।