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हरियाणा : सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस बढ़ाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
Thu, 12 Nov 2020 08:04 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 12 Nov 2020 08:04 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी पाठ्यक्रम करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा की गई फीस वृद्धि को गलत करार देते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सोनीपत निवासी डॉ. वरुण मलिक ने याचिका में कहा कि अधिसूचना के अनुसार एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए मौजूदा सत्र से जबकि पीजी कोर्स के लिए अगले सत्र से बढ़ी फीस लागू होगी।
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अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) को एमबीबीएस कोर्स के लिए एक मुश्त सवा लाख अमेरिकी डॉलर चुकाने होंगे। वहीं, पीजी कोर्स के लिए भारतीय विद्यार्थियों को पहले साल सवा लाख रुपये, दूसरे साल डेढ़ लाख रुपये और तीसरे साल 1.75 लाख रुपये देने होंगे। एमबीबीएस विद्यार्थियों को हर साल 10 लाख रुपये का बांड भी भरना होगा।
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विद्यार्थियों के लिए विकल्प दिया गया है कि वह चाहें तो खुद के बूते यह फीस चुका सकते हैं या फिर सरकार की मदद से ऋण ले सकते हैं। याचिका के अनुसार सरकार एक तरह से लोन शार्क का रोल अदा कर रही है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम ने बढ़े शुल्क का नोटिफिकेशन जारी की है।
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याचिकाकर्ता के अनुसार सरकार द्वारा यह फीस बढ़ाना मेडिकल के छात्रों के हित में नहीं है, ऐसे में इस पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा व जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित बेंच ने याचिका के जनहित होने पर सवाल उठाते हुए मामले की सुनवाई 28 जनवरी तक स्थगित कर दी।