{"_id":"587319f64f1c1b6529ba8780","slug":"challanges-for-bjp-in-chandigarh-after-winning-nagar-nigam-election","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"निगम चुनाव तो जीत लिया, BJP के सामने अब खड़ी ये चुनौतियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम चुनाव तो जीत लिया, BJP के सामने अब खड़ी ये चुनौतियां
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 09 Jan 2017 05:04 PM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़ बीजेपी ने जीत चुनाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनाव जीतकर 26 पार्षद नगर निगम में तो पहुंच गए हैं, लेकिन उनकी राह आसान नहीं। उनके सामने बहुत सी चुनौतियां खड़ी हैं। इनमें कई चुनौतियां ऐसी हैं जो पिछले कार्यकाल में भी मेयर और पार्षद पूरी नहीं कर पाए थे। वहीं, इन चुनौतियों का सामना मनोनीत 9 पार्षदों को भी करना पड़ेगा।
बता दें कि 12 जनवरी को शहर को नया मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर मिल जाएंगे। इसके बाद सभी 35 पार्षद काम करना शुरू कर देंगे। इन पार्षदों पर अपने वार्ड के साथ-साथ पूरे शहर की समस्याओं को दूर करने की जिम्मेदारी है। आइए जानते हैं ऐसी कौन-कौन सी चुनौतियों हैं, जिनकी शहरवासियों को पार्षदों से दूर करने की उम्मीद है।
पार्किंग की दिक्कत को दूर करना
इस समय शहर का ऐसा कोई बाजार और रिहायशी इलाका नहीं है जो पार्किंग की दिक्कत से नहीं जूझ रहा हो। हर जीते हुए पार्षद ने अपने घोषणा पत्र में कम्युनिटी पार्किंग बनवाने का दावा किया है, लेकिन हकीकत यह है कि प्रशासन का वास्तुकार विभाग नगर निगम द्वारा प्रस्तावित कम्युनिटी पार्किंग की मंजूरी देने के लिए तैयार नहीं है। सेक्टर-17, 22, 35 में तो अब पार्किंग नहीं मिलने के कारण जाम भी लग रहा है। क्योंकि लोग अपने वाहन सड़क किनारों पार्क करने लग गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि 12 जनवरी को शहर को नया मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर मिल जाएंगे। इसके बाद सभी 35 पार्षद काम करना शुरू कर देंगे। इन पार्षदों पर अपने वार्ड के साथ-साथ पूरे शहर की समस्याओं को दूर करने की जिम्मेदारी है। आइए जानते हैं ऐसी कौन-कौन सी चुनौतियों हैं, जिनकी शहरवासियों को पार्षदों से दूर करने की उम्मीद है।
विज्ञापन
पार्किंग की दिक्कत को दूर करना
इस समय शहर का ऐसा कोई बाजार और रिहायशी इलाका नहीं है जो पार्किंग की दिक्कत से नहीं जूझ रहा हो। हर जीते हुए पार्षद ने अपने घोषणा पत्र में कम्युनिटी पार्किंग बनवाने का दावा किया है, लेकिन हकीकत यह है कि प्रशासन का वास्तुकार विभाग नगर निगम द्वारा प्रस्तावित कम्युनिटी पार्किंग की मंजूरी देने के लिए तैयार नहीं है। सेक्टर-17, 22, 35 में तो अब पार्किंग नहीं मिलने के कारण जाम भी लग रहा है। क्योंकि लोग अपने वाहन सड़क किनारों पार्क करने लग गए हैं।
विज्ञापन
पेड पार्किंग की वायलेशन नहीं दूर कर पाए पूर्व पार्षद
सांसद खेर और टंडन का कद बढ़ा
शहर में 26 पेड पार्किंग हैं, जहां पर पिछले कई सालों से वाहन चालकों से ओवरचार्जिंग हो रही है। पिछले 5 साल के कार्यकाल में सदन में काफी हंगामा हुआ है। बड़ी-बड़ी पालिसी बनाने के दावे किए गए।
पूर्व मेयर अरुण सूद ने शहर की सभी पेड पार्किंग किसी बड़ी कंपनी को देने का प्रयास किया है, ताकि आटोमेटिक पार्किंग चल सकें। लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट सफल नहीं हुआ है। अभी टेंडर प्रक्रिया ही चल रही है। इस समय 26 में से 22 पेड पार्किंग खाली पड़ी हैं, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान भी हो चुका है।
प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा की हालत खस्ता
प्रशासन ने नगर निगम को प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग पांच साल पहले ट्रांसफर कर दिया था, लेकिन नगर निगम डिस्पेंसरियों और सरकारी स्कूलों की हालत में कोई सुधार नहीं कर पा रहा है। हाल यह है कि नगर निगम पूरा बजट भी खर्च नहीं कर पाया है।
चुनाव जीत कर आए पार्षदों ने अपने घोषणा पत्र में 24 घंटे डिस्पेंसरियां शुरू करने के दावे कर रखे हैं। नगर निगम के पास स्टाफ की कमी है। कम स्टाफ में लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना एक बड़ी चुनौती है।
पूर्व मेयर अरुण सूद ने शहर की सभी पेड पार्किंग किसी बड़ी कंपनी को देने का प्रयास किया है, ताकि आटोमेटिक पार्किंग चल सकें। लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट सफल नहीं हुआ है। अभी टेंडर प्रक्रिया ही चल रही है। इस समय 26 में से 22 पेड पार्किंग खाली पड़ी हैं, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान भी हो चुका है।
प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा की हालत खस्ता
प्रशासन ने नगर निगम को प्राइमरी स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग पांच साल पहले ट्रांसफर कर दिया था, लेकिन नगर निगम डिस्पेंसरियों और सरकारी स्कूलों की हालत में कोई सुधार नहीं कर पा रहा है। हाल यह है कि नगर निगम पूरा बजट भी खर्च नहीं कर पाया है।
चुनाव जीत कर आए पार्षदों ने अपने घोषणा पत्र में 24 घंटे डिस्पेंसरियां शुरू करने के दावे कर रखे हैं। नगर निगम के पास स्टाफ की कमी है। कम स्टाफ में लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना एक बड़ी चुनौती है।
वित्तीय संकट का मुद्दा गरमाने लगा
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
नगर निगम की एफडी लगातार टूटती जा रही है। इस समय नगर निगम के पास एफडी में सिर्फ 200 करोड़ रुपये हैं, जबकि तीन साल पहले तक एफडी में 500 करोड़ रुपये की राशि थी। इसके अलावा प्रशासन हर साल नगर निगम के बजट में करोड़ों रुपये की कटौती कर रहा है। नगर निगम को अपने प्रोजेक्ट्स पूरे करने के लिए बजट चाहिए।
ऐसे में जल्द ही नगर निगम में वित्तीय संकट का मुद्दा गरमाएगा। अगर नगर निगम की वित्तीय हाल न सुधरी तो आने वाले वर्षों में निगम के पास सड़कों की कारपेटिंग के लिए भी पैसा नहीं होगा। सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग से नगर निगम को हर माह 4 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। मल्टीलेवल को नो प्रोफिट नो लॉस में चलाना आसान नहीं है।
बच्चों के लिए प्ले ग्राउंड नहीं
इस समय शहर में 1800 छोटे-बड़े पार्क हैं, लेकिन शहर में एक भी प्ले ग्राउंड नहीं है। इस कारण बच्चों को परेशानी हो रही है। हर सब-सेक्टर में प्ले ग्राउंड की मांग अभिभावक लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन यह काम पूर्व पार्षद नहीं करवा पाए। ऐसे में बच्चों को खेलने की जगह मुहैया करवाना नए पार्षदों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
ऐसे में जल्द ही नगर निगम में वित्तीय संकट का मुद्दा गरमाएगा। अगर नगर निगम की वित्तीय हाल न सुधरी तो आने वाले वर्षों में निगम के पास सड़कों की कारपेटिंग के लिए भी पैसा नहीं होगा। सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग से नगर निगम को हर माह 4 लाख रुपये का घाटा हो रहा है। मल्टीलेवल को नो प्रोफिट नो लॉस में चलाना आसान नहीं है।
बच्चों के लिए प्ले ग्राउंड नहीं
इस समय शहर में 1800 छोटे-बड़े पार्क हैं, लेकिन शहर में एक भी प्ले ग्राउंड नहीं है। इस कारण बच्चों को परेशानी हो रही है। हर सब-सेक्टर में प्ले ग्राउंड की मांग अभिभावक लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन यह काम पूर्व पार्षद नहीं करवा पाए। ऐसे में बच्चों को खेलने की जगह मुहैया करवाना नए पार्षदों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
डंपिंग ग्राउंड और गारबेज प्लांट की दिक्कत नहीं दूर हुई
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
इस समय शहर डंपिंग ग्राउंड से आने दुर्गंध से लोग परेशान हैं। डड्डूमाजरा में तो लोग इस कारण बीमार तक हो गए थे। साथ ही पिछले साल नगर निगम ने जेपी कंपनी से प्लांट छुड़वाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन एनजीटी में मामला होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। नगर निगम डंपिंग ग्राउंड को पूरी तरह से गारबेज मुक्त बनाने का दावा तो कर रहा है, लेकिन यह हुआ नहीं है। इसके साथ ही डोर-टू-डोर गारबेज इकट्ठा करने का सिस्टम बिगड़ा हुआ है। पूरे शहर में इसके लिए कोई पॉलिसी नहीं है। मनमर्जी के रेट शहरवासियों से वसूल किए जा रहे हैं।
ऊपर की मंजिलों में पानी पहुंचना
गर्मी में सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना ऊपर की मंजिल में रहने वालों को करना पड़ता है। जबकि पिछले साल पांचवें और छठे फेज से पानी मिलने का काम शुरू हुआ है। इसके लिए पाइप लाइन डालने का काम जारी है। यह शुरू होने से 29 एमजीडी पानी मिलेगा, लेकिन काम भी इस साल के अंत तक पूरा होगा। जबकि इस बार की गर्मियां भी लोगों को लो प्रेशर की दिक्कत से जूझना पड़ेगा। पानी का ग्राउंड लेवल निरंतर गिरता जा रहा है।
शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना
इस समय शहर में स्ट्रीट वेंडर एक्ट लागू है। इस कारण सेक्टर-17 सहित सभी प्रमुख बाजारों में पैदल चलने वाली जगहों पर अतिक्रमण हो गया है। इस साल 22 हजार वेंडर्स को लाइसेंस देने हैं। उनके लिए वेडिंग जोन बना कर बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करना एक बड़ी चुनौती है। सिटी के हार्ट प्लाजा भी अब फड़ी बाजार में तबदील हो गया है, जिस कारण व्यापारियों में रोष है।
ऊपर की मंजिलों में पानी पहुंचना
गर्मी में सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना ऊपर की मंजिल में रहने वालों को करना पड़ता है। जबकि पिछले साल पांचवें और छठे फेज से पानी मिलने का काम शुरू हुआ है। इसके लिए पाइप लाइन डालने का काम जारी है। यह शुरू होने से 29 एमजीडी पानी मिलेगा, लेकिन काम भी इस साल के अंत तक पूरा होगा। जबकि इस बार की गर्मियां भी लोगों को लो प्रेशर की दिक्कत से जूझना पड़ेगा। पानी का ग्राउंड लेवल निरंतर गिरता जा रहा है।
शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाना
इस समय शहर में स्ट्रीट वेंडर एक्ट लागू है। इस कारण सेक्टर-17 सहित सभी प्रमुख बाजारों में पैदल चलने वाली जगहों पर अतिक्रमण हो गया है। इस साल 22 हजार वेंडर्स को लाइसेंस देने हैं। उनके लिए वेडिंग जोन बना कर बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करना एक बड़ी चुनौती है। सिटी के हार्ट प्लाजा भी अब फड़ी बाजार में तबदील हो गया है, जिस कारण व्यापारियों में रोष है।
ठप प्रोजेक्ट को चलाना है चुनौती
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
नगर निगम के पास प्रोजेक्ट्स को चलाने के लिए कोई प्लानिंग नहीं है। इसका नतीजा शहर की पहली मल्टीलेवल पार्किंग ही नहीं, बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा प्रोजेक्ट्स है जिन पर नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है। लेकिन उनकी कोई पालिसी तय नहीं होने के कारण अब यह प्रोजेक्ट सफेद हाथी बन गए हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स को चलाना भी नए मेयर और पार्षदों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
सेक्टर-48 की नाइट फूड स्ट्रीट
24 फरवरी 2014 को सेक्टर-48 की नाइट फूड स्ट्रीट का उद्घाटन किया गया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद अभी तक यहां पर बने कियोस्क चले नहीं है। 25 लाख रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट का निर्माण किया गया है। 7 साल पहले इस प्रोजेक्ट का निर्माण करने का निर्णय लिया गया था।
दक्षिणी सेक्टर के लोग इस प्रोजेक्ट के शुरू होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि सेक्टर-48,49,50 और 51 में कोई मार्केट नहीं है। जो इस समय पीजीआई के सामने नाइट फूड स्ट्रीट चल रही है उसकी हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है।
मौलीजागरां का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
मौलीजागरां-विकासनगर में बनी 112 बूथ का निर्माण कार्य काफी समय पहले पूरा हो गया था, जबकि 14 फरवरी 2014 को इसका उद्घाटन भी हो गया है। इनके निर्माण पर भी करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन इन दुकानों को अलाट करने के लिए अभी तक कोई पालिसी नहीं बनी है। इसके साथ ही यहां पर साल 2011 में डे मार्केट का निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन अभी तक कांग्रेस और भाजपा की राजनीति के कारण इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है।
साल 2012 में पूर्व मेयर राज बाला मलिक के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को बीच में ही खारिज कर दिया गया, लेकिन अगले साल में इसे फिर बहाल कर दिया गया। लेकिन अभी तक यह डे मार्केट शुरू नहीं हुई है। साथ ही 20 साल से मौली कॉम्प्लेक्स में दो दर्जन दुकानें खाली पड़ी हैं।
सेक्टर-48 की नाइट फूड स्ट्रीट
24 फरवरी 2014 को सेक्टर-48 की नाइट फूड स्ट्रीट का उद्घाटन किया गया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद अभी तक यहां पर बने कियोस्क चले नहीं है। 25 लाख रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट का निर्माण किया गया है। 7 साल पहले इस प्रोजेक्ट का निर्माण करने का निर्णय लिया गया था।
दक्षिणी सेक्टर के लोग इस प्रोजेक्ट के शुरू होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि सेक्टर-48,49,50 और 51 में कोई मार्केट नहीं है। जो इस समय पीजीआई के सामने नाइट फूड स्ट्रीट चल रही है उसकी हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है।
मौलीजागरां का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
मौलीजागरां-विकासनगर में बनी 112 बूथ का निर्माण कार्य काफी समय पहले पूरा हो गया था, जबकि 14 फरवरी 2014 को इसका उद्घाटन भी हो गया है। इनके निर्माण पर भी करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन इन दुकानों को अलाट करने के लिए अभी तक कोई पालिसी नहीं बनी है। इसके साथ ही यहां पर साल 2011 में डे मार्केट का निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन अभी तक कांग्रेस और भाजपा की राजनीति के कारण इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है।
साल 2012 में पूर्व मेयर राज बाला मलिक के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को बीच में ही खारिज कर दिया गया, लेकिन अगले साल में इसे फिर बहाल कर दिया गया। लेकिन अभी तक यह डे मार्केट शुरू नहीं हुई है। साथ ही 20 साल से मौली कॉम्प्लेक्स में दो दर्जन दुकानें खाली पड़ी हैं।
सेक्टर-17 की ब्रिज मार्केट
चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में खिला कमल
सेक्टर-17 के ओवरब्रिज का निर्माण कार्य वर्ष 2012 में शुरू हुआ था और वर्ष 2013 में पूरा हो गया था। इन दुकानों का उद्घाटन तत्कालीन रेलमंत्री पवन बंसल किया था, लेकिन अभी तक इन दुकानों को अलाट करने के लिए कोई पॉलिसी नहीं बनी है। अब यह दुकानें खंडहर बनती जा रही हैं। यहां पर 30 दुकानें हैं। इससे नगर निगम को हर साल डेढ़ से दो करोड़ रुपये की कमाई किराये से ही हो सकती है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर 16 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
एसी फिश मार्केट
सेक्टर-42 में एसी फिश मार्केट का निर्माण साल 2009 में किया गया, लेकिन यहां की दुकानें अलाट नहीं हो पाईं। इन दुकानें किराये पर देने का हर प्रयास असफल हुआ है, क्योंकि विक्रेताओं के अनुसार किराया ज्यादा है। अब नगर निगम ने फिश मार्केट को जनरल ट्रेड मार्केट का निर्माण करने का निर्णय लिया है।
नगर निगम का अपना जिम
अपने कर्मचारियों के लिए वर्ष 2015 में नगर निगम ने अपनी इमारत में ही जिम बनाया था। लेकिन यह जिम बंद पड़ा है। अब कोई भी कर्मचारी यहां पर नहीं जाता है। नगर निगम की इमारत का भी विस्तार का काम चल रहा है। ऊपर की मंजिलों को बनाया जा रहा है। लेकिन, अभी तक तय नहीं है कि कौन कहां पर बैठेगा।
अंडरग्राउंड पार्किंग भी बन रही है खंडहर
सेक्टर-17 में ली कार्बूजिए के नक्शे के अनुसार कई साल पहले तीन अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई थीं। यह पार्किंग शहरवासियों की अनदेखी की शिकार है। लोग इसमें अपने वाहन खड़े ही नहीं करते हैं।अधिकारी इन अंडरग्राउंड पार्किंग को चलाने के लिए कोई पालिसी नहीं बना पाया है।
एसी फिश मार्केट
सेक्टर-42 में एसी फिश मार्केट का निर्माण साल 2009 में किया गया, लेकिन यहां की दुकानें अलाट नहीं हो पाईं। इन दुकानें किराये पर देने का हर प्रयास असफल हुआ है, क्योंकि विक्रेताओं के अनुसार किराया ज्यादा है। अब नगर निगम ने फिश मार्केट को जनरल ट्रेड मार्केट का निर्माण करने का निर्णय लिया है।
नगर निगम का अपना जिम
अपने कर्मचारियों के लिए वर्ष 2015 में नगर निगम ने अपनी इमारत में ही जिम बनाया था। लेकिन यह जिम बंद पड़ा है। अब कोई भी कर्मचारी यहां पर नहीं जाता है। नगर निगम की इमारत का भी विस्तार का काम चल रहा है। ऊपर की मंजिलों को बनाया जा रहा है। लेकिन, अभी तक तय नहीं है कि कौन कहां पर बैठेगा।
अंडरग्राउंड पार्किंग भी बन रही है खंडहर
सेक्टर-17 में ली कार्बूजिए के नक्शे के अनुसार कई साल पहले तीन अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई थीं। यह पार्किंग शहरवासियों की अनदेखी की शिकार है। लोग इसमें अपने वाहन खड़े ही नहीं करते हैं।अधिकारी इन अंडरग्राउंड पार्किंग को चलाने के लिए कोई पालिसी नहीं बना पाया है।
महिला भवन शुरू नहीं हुआ
चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में खिला कमल
महिला भवन का उद्घाटन वर्ष 2015 में हुआ था। अभी तक यह भवन महिलाओं के लिए नहीं खुल पाया है। इस भवन में महिलाओं की सुविधा के लिए कई शिक्षण संस्थाएं, ट्रेनिंग सेंटर खोलने के दावे किए गए हैं, लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो पाए हैं। इसके निर्माण पर 15 करोड़ का खर्च हुए थे।
254 दुकानें खाली पड़ी
शहर में इस समय नगर निगम की करोड़ों रुपये की ऐसी 254 दुकानें है जो कि कई सालों से खाली पड़ी हैं। इनमें से 197 दुकानें ऐसी हैं जो कि इंजीनियरिंग विंग की लापरवाही के कारण पालिसी नहीं बनने के कारण किराये पर नहीं दी जा सकीं हैं।
नगर निगम ने पिछले 5 साल में ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे वह अपनी कमाई बढ़ा सके। खाली पड़ी दुकानों का निर्माण ही आय बढ़ाने के लिए किया गया था। दुकानें खाली होने से कई जगह नशेड़ियों के अड्डे भी बन गए हैं। इनमे सेक्टर-17 बस स्टैंड में सब-वे के नीचे बनी दुकानें भी शामिल हैं।
करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी का कोई अता पता
इस समय नगर निगम के अंतर्गत आने वाले गांव में ऐसे कई सरकारी प्रॉपर्टी और जमीन है, जिनका निगम को पता ही नहीं है। शहर में कुल 17 गांव हैं, जिनमे से पांच गांव वर्ष 2006 में नगर निगम में शामिल कर दिए गए थे। इसके बाद शहर के वार्डों की संख्या 20 से बढ़ाकर 26 की गई थी। इन गांवों का विकास अब नगर निगम ही कर रहा है।
इस समय जो गांव नगर निगम में शामिल है उनमें हल्लोमाजरा, कजहेड़ी, पलसौरा, मलोया और डड्डूमाजरा हैं। इन गांवों के शामिल होने से पहले कई सरकारी जमीनें और इमारतें जो पहले पंचायत की थी वह नगर निगम में शामिल नहीं हुई हैं। अब नगर निगम के पास इनका कोई रिकार्ड नहीं है। यहां तक की गांव की पंचायत की जमीनों पर अब कब्जे भी हो गए हैं। इन कब्जों को छुड़वाना नए पार्षदों के लिए एक चुनौती होगी।
254 दुकानें खाली पड़ी
शहर में इस समय नगर निगम की करोड़ों रुपये की ऐसी 254 दुकानें है जो कि कई सालों से खाली पड़ी हैं। इनमें से 197 दुकानें ऐसी हैं जो कि इंजीनियरिंग विंग की लापरवाही के कारण पालिसी नहीं बनने के कारण किराये पर नहीं दी जा सकीं हैं।
नगर निगम ने पिछले 5 साल में ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे वह अपनी कमाई बढ़ा सके। खाली पड़ी दुकानों का निर्माण ही आय बढ़ाने के लिए किया गया था। दुकानें खाली होने से कई जगह नशेड़ियों के अड्डे भी बन गए हैं। इनमे सेक्टर-17 बस स्टैंड में सब-वे के नीचे बनी दुकानें भी शामिल हैं।
करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी का कोई अता पता
इस समय नगर निगम के अंतर्गत आने वाले गांव में ऐसे कई सरकारी प्रॉपर्टी और जमीन है, जिनका निगम को पता ही नहीं है। शहर में कुल 17 गांव हैं, जिनमे से पांच गांव वर्ष 2006 में नगर निगम में शामिल कर दिए गए थे। इसके बाद शहर के वार्डों की संख्या 20 से बढ़ाकर 26 की गई थी। इन गांवों का विकास अब नगर निगम ही कर रहा है।
इस समय जो गांव नगर निगम में शामिल है उनमें हल्लोमाजरा, कजहेड़ी, पलसौरा, मलोया और डड्डूमाजरा हैं। इन गांवों के शामिल होने से पहले कई सरकारी जमीनें और इमारतें जो पहले पंचायत की थी वह नगर निगम में शामिल नहीं हुई हैं। अब नगर निगम के पास इनका कोई रिकार्ड नहीं है। यहां तक की गांव की पंचायत की जमीनों पर अब कब्जे भी हो गए हैं। इन कब्जों को छुड़वाना नए पार्षदों के लिए एक चुनौती होगी।
सूद ने कई बड़े काम करवाए
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
शहर की हर समस्या को भली भांति जानती हैं। पिछले साल ही भाजपा को 14 साल बाद मेयर बनाने का मौका मिला था। इस दौरान कई बड़े काम हुए। इसकी वजह से शहरवासियों ने भाजपा-अकाली गठबंधन को 26 में से 21 पार्षद जितवाए है, जिसमें से अकेले भाजपा के 20 पार्षद जीत कर आए हैं। शहरवासियों को पता है कि भाजपा ही शहरवासियों की समस्याएं को दूर कर सकती है।
- आशा जसवाल, पार्षद एवं भाजपा की मेयर उम्मीदवार
इस समय शहर में पार्किंग की दिक्कत सबसे ज्यादा है। हर व्यापारी ग्राहकों को पार्किंग नहीं मिलने से परेशान है। इस कारण लोग बाजारों की बजाय मॉल में जा कर शॉपिंग करने जा रहे हैं। इस ओर प्रमुखता से कोई कदम उठाने की जरूरत है।
- चरणजीव सिंह, नवनियुक्त मनोनीत पार्षद
कांग्रेस के 14 साल के कार्यकाल में समस्याएं दूर होने की बजाय बढ़ी हैं। पिछले साल अरुण सूद के मेयर बनने पर समस्याएं दूर होनी शुरू हुई है। गांव और कॉलोनियों की हालत अब सुधार आना शुरू हुआ है। कांग्रेस के शासनकाल में सिर्फ शहर के चुनिंदा सेक्टरों के विकास पर ही ध्यान दिया गया है। अब कॉलोनियों और गांव की तरफ ध्यान दिया जाएगा।
- सतीश कैंथ, भाजपा पार्षद, वार्ड-11
- आशा जसवाल, पार्षद एवं भाजपा की मेयर उम्मीदवार
इस समय शहर में पार्किंग की दिक्कत सबसे ज्यादा है। हर व्यापारी ग्राहकों को पार्किंग नहीं मिलने से परेशान है। इस कारण लोग बाजारों की बजाय मॉल में जा कर शॉपिंग करने जा रहे हैं। इस ओर प्रमुखता से कोई कदम उठाने की जरूरत है।
- चरणजीव सिंह, नवनियुक्त मनोनीत पार्षद
कांग्रेस के 14 साल के कार्यकाल में समस्याएं दूर होने की बजाय बढ़ी हैं। पिछले साल अरुण सूद के मेयर बनने पर समस्याएं दूर होनी शुरू हुई है। गांव और कॉलोनियों की हालत अब सुधार आना शुरू हुआ है। कांग्रेस के शासनकाल में सिर्फ शहर के चुनिंदा सेक्टरों के विकास पर ही ध्यान दिया गया है। अब कॉलोनियों और गांव की तरफ ध्यान दिया जाएगा।
- सतीश कैंथ, भाजपा पार्षद, वार्ड-11