बजट सत्र: एनजीटी की रिपोर्ट से अप्रैल महीने में सामने आएगा डाडम हादसे का सच, जून में होगी संयुक्त पात्रता परीक्षा
नौकरी का इंतजार कर रहे हरियाणा के लाखों युवाओं के लिए इंतजार की घड़ियां अब खत्म होने को हैं। हरियाणा सरकार ने काफी समय से लंबित चल रही सीईटी (संयुक्त पात्रता परीक्षा) जून माह में कराने का फैसला लिया है।
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हरियाणा के भिवानी जिले में हुए डाडम खनन हादसे का सच अप्रैल महीने में सामने आएगा। हादसे की जांच के लिए गठित एनजीटी की आठ सदस्यीय समिति पांच अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके साथ ही 18 जनवरी 2022 को गठित सेवानिवृत्त आईएएस एसएस प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट भी जल्द आने वाली है। दोनों समितियों की रिपोर्ट के बाद दुर्घटना के कारण सामने आएंगे।
खनन एवं भूगर्भ मंत्री मूल चंद शर्मा ने सोमवार को विधानसभा में सदन पटल पर यह जानकारी रखी। रोहतक से कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने उनसे हादसे व खनन पट्टा आवंटित करने संबंधी सवाल पूछा था। शर्मा ने बताया कि पहली जनवरी 2022 को हुई दुघर्टना में पांच व्यक्ति मारे गए, जबकि तीन घायल हुए थे। एनजीटी ने तीन जनवरी को स्वत संज्ञान लेते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, महानिदेशक खान सुरक्षा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिला मजिस्ट्रेट को शामिल करते हुए जांच समिति बनाई है।
सरकार को प्रसाद व एनजीटी की समितियों की रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही पट्टा क्षेत्र से बाहर हुए अवैध खनन को लेकर स्थिति साफ होगी। अगर कंपनियों ने नियमों को तोड़ा होगा, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डाडम में अभी 48.87 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन के लिए निजी कंपनी को पट्टा ठेके पर दिया हुआ है। हादसे के बाद खनन बंद था, जिसे 30 जनवरी 2022 से दोबारा चालू कराया जा चुका है। सेवानिवृत्त जस्टिस प्रीतम पाल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की हरियाणा मामलों की समिति अपनी अंतरिम रिपोर्ट में डाडम क्षेत्र में हुए अवैध खनन की पोल खोल चुकी है।
मुख्यमंत्री ने फिर साधा सीएमआईई पर निशाना
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक बार फिर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी प्राइवेट लिमिटेड (सीएमआईई) को निशाने पर लिया। राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लाभ कमाने के लिए बनाई गई निजी कंपनी है, जो प्रदेश में रोजगार के झूठे आकड़े पेश कर रही है।
सीएम ने उदाहरण देकर कहा कि इस कंपनी ने दिसंबर 2021 में अपनी रिपोर्ट में 34.1 प्रतिशत बेरोजगारी का आंकड़ा पेश किया। ठीक एक महीने बाद जनवरी 2022 में 23.4 प्रतिशत बेरोजगारी दिखाई। महज एक महीने में 11 प्रतिशत की गिरावट कैसे आ गई? इसे ठीक मान लिया जाए तो एक महीने में 16 लाख बेरोजगारों को रोजगार मिल गया। इस पर तो विपक्ष को हमारी तारीफ करनी चाहिए। इस प्रकार की रिपोर्ट निराधार आंकड़े पेश करके समाज में अशांति उत्पन्न करने का कार्य करती है। कई अवसरों पर सरकार ने इन आंकड़ों का खंडन किया है।
सीएमआईई की रिपोर्ट निराधार और झूठ का पुलिंदा है। विपक्ष मिथ्या आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में अस्थिरता या सनसनी फैलाने की अपेक्षा कोई रचनात्मक सुझाव दें, जिससे प्रदेश में लोगों का भला हो सके। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यूपी में भाजपा सरकार इसी एजेंसी की रैंकिंग के आधार पर विज्ञापन दे रही है और हरियाणा सरकार इसे नकार रही है।
जून में होगा सीईटी, परसेंटलाइल फार्मूले पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
नौकरी का इंतजार कर रहे हरियाणा के लाखों युवाओं के लिए इंतजार की घड़ियां अब खत्म होने को हैं। हरियाणा सरकार ने काफी समय से लंबित चल रही सीईटी (संयुक्त पात्रता परीक्षा) जून माह में कराने का फैसला लिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से बात कर जल्द ही परीक्षा तिथि घोषित की जाएगी। वहीं, नौकरियों के परिणाम में लगाए जा रहे परसेंटाइल फार्मूले पर भी सरकार विचार कर रही है, अंतिम निर्णय के लिए हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परीक्षा के बाद ग्रुप सी व डी पदों के लिए भर्ती होगी। ग्रुप सी वालों को एक और विभागीय परीक्षा देनी होगी। सामाजिक आर्थिक आधार के अंक आधे कर दिए हैं। इन दोनों कैटेगरी के कर्मचारियों को काडर एक ही होगा। मनोहर लाल ने कहा कि वापस लिए गए 5 हजार पद दोबारा से विज्ञापित किए जाएंगे। विभागों की ओर से मांग मुख्य सचिव कार्यालय में पहुंच चुकी है।
फार्मूले को लेकर भर्ती एजेंसी से हुई चूक
कांग्रेस विधायक बीबी बतरा द्वारा परसेंटाइल फार्मूले पर सवाल उठाने पर सीएम ने कहा कि यह फार्मूला हरियाणा ही नहीं अन्य प्रदेशों और केंद्र की जेईई और यूपीएससी की परीक्षा में भी लागू होता है। सीएम ने कहा कि भर्ती एजेंसी में इसमें एक चूक हुई है, क्योंकि अन्य प्रदेशों में यह फार्मूला तो लगता है, लेकिन सामाजिक आर्थिक आधार के अंक नहीं होते हैं। एचएसएससी ने जिस संस्थान से यह फार्मूला लिया है, उसने यह सलाह दी कि इन अंकों में सामाजिक-आर्थिक के अंक जोड़े जोड़े जा सकते हैं। इसी में चूक हुई है। इसके विरोध में अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले गए। अब हाईकोर्ट में फार्मूला दिया गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि कौन सा फार्मूला लगेगा। मनोहर लाल ने साफ किया कि वह किसी भी सूरत में गलत नहीं करेंगे।