फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   central administration tribunal, chandigarh pgi, medical supritendent anil gupta issue, chandigarh

चंडीगढ़ PGI के एमएस की चार्जशीट पर कैट ने लगाया स्टे

Sat, 04 Jun 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला/अमर उजाला Updated Sat, 04 Jun 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
central administration tribunal, chandigarh pgi, medical supritendent anil gupta issue, chandigarh
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : demo pics
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पीजीआई के एमएस अनिल कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनको चार्जशीट किए जाने पर स्टे लगा दिया है। अनिल कुमार ने पीजीआई में डायरेक्टर पद के लिए आवेदन किया था, इस पर पीजीआई की ओर से उन्हें चार्जशीट होने के कारण उनकी दावेदारी खतरे पर पड़ रही थी। इसके खिलाफ एमएस ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। 
विज्ञापन


एमएस अनिल कुमार ने कैट में दायर याचिका में कहा था कि सितंबर 2014 में उन्हें वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के एक प्रोजेक्ट पर तीन महीने के लिए विदेश भेजा गया था। इसके लिए उन्होंने पूर्व में ही डायरेक्टर के समक्ष आवेदन कर दिया था। उनके अनुसार पीजीआई रेगुलेशन 2008 में संशोधन के तहत फैकल्टी मेंबरों की विदेश में मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, वर्कशॉप आदि के लिए 180 दिन तक की छुट्टियों को डायरेक्टर ही अप्रूव कर सकते हैं। लेकिन, डायरेक्टर ने इसे अप्रूव करने के बजाय इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट के पास भेज दिया। उन्हें पूरे फैक्ट नहीं बताए गए थे। 
विज्ञापन


इस आधार पर उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद पीजीआई की ओर से उनकी छुट्टियां अप्रूव न होने की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें वापस आने को कहा गया। याचिकाकर्ता के अनुसार वह प्रोजेक्ट को बीच में छोड़कर नहीं आ सकते थे। इस कारण पीजीआई प्रशासन ने उनको 15 सितंबर से 21 दिसंबर, 2014 तक अनुपस्थित दिखाते हुए उन्हें चार्जशीट कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्तमान में पीजीआई में डायरेक्टर की पोस्ट खाली है। इसके लिए मेडिकल सुपरिंटेंडेंट गुप्ता ने दावेदारी पेश की थी। हालांकि इसके लिए उन्हें विजिलेंस क्लीरेंस जरूरी है। लेकिन, चार्जशीट होने के कारण उनकी दावेदारी खतरे में पड़ रही थी। इस पर उन्होंने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, पीजीआई मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और प्रेसिडेंट पीजीआईएमईआर को प्रतिवादी बनाया था। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed