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सुखना लेक बचाने की मुहिम में केंद्र भी शामिल, जल संरक्षण के अफसर तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 02 May 2017 09:50 AM IST
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सुखना लेक की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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पानी के अभाव में सूख रही सुखना लेक को बचाने में यूटी प्रशासन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण और केंद्रीय जल संरक्षण मंत्रालय को भी इस मुहिम में शामिल कर लिया।
कोर्ट ने दोनों मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को मामले की अगली सुनवाई पर पेश होकर यह बताने को कहा है कि सुखना को बचाने के लिए क्या उपाय किए जाएं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को भी आदेश दिया कि सुखना के लिए जिस कमेटी का गठन किया गया है, उसमें पंजाब-हरियाणा के स्थानीय निकाय विभाग और सिंचाई विभाग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
सोमवार को इस मामले पर सुनवाई शुरू होते ही यूटी प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि प्रशासन ने सुखना के रखरखाव के लिए वर्ष 2011 में ही हाईकोर्ट के आदेशानुसार एक नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसका नेतृत्व चंडीगढ़ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट को सौंपा गया था।
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यूटी प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि इस कमेटी को जुलाई, 2012 में विस्तार देते हुए प्रशासन ने इंजीनियरिंग सचिव की अध्यक्षता में एक 14 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया था, जिसमें हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन और एडवोकेट तनु बेदी को भी शामिल किया गया था। इस पर सरीन ने हाईकोर्ट को बताया कि इस कमेटी के गठन के बाद से अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है।
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कोर्ट ने दोनों मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को मामले की अगली सुनवाई पर पेश होकर यह बताने को कहा है कि सुखना को बचाने के लिए क्या उपाय किए जाएं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को भी आदेश दिया कि सुखना के लिए जिस कमेटी का गठन किया गया है, उसमें पंजाब-हरियाणा के स्थानीय निकाय विभाग और सिंचाई विभाग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
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सोमवार को इस मामले पर सुनवाई शुरू होते ही यूटी प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि प्रशासन ने सुखना के रखरखाव के लिए वर्ष 2011 में ही हाईकोर्ट के आदेशानुसार एक नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसका नेतृत्व चंडीगढ़ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट को सौंपा गया था।
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यूटी प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि इस कमेटी को जुलाई, 2012 में विस्तार देते हुए प्रशासन ने इंजीनियरिंग सचिव की अध्यक्षता में एक 14 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया था, जिसमें हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन और एडवोकेट तनु बेदी को भी शामिल किया गया था। इस पर सरीन ने हाईकोर्ट को बताया कि इस कमेटी के गठन के बाद से अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है।
कन्फ्यूज है यूटी प्रशासन
सुखना लेक की तस्वीर
- फोटो : file photo
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान जब यह बात खुली कि यूटी प्रशासन छह साल पहले ही सुखना लेक के लिए एक कमेटी बना चुका है। लेकिन उसकी एक भी बैठक नहीं हुई है, इस पर कोर्ट ने कहा कि यूटी प्रशासन आज भी कन्फ्यूज है कि क्या किया जाए? तब एडवोकेट सरीन ने कहा कि दरअसल यूटी प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। यही कारण है कि जिस कमेटी का छह साल पहले गठन किया जा चुका है, खुद प्रशासन को ही उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सुखना लेक बचाने के लिए कमेटी बनाकर भूला प्रशासन
हाईकोर्ट में यह मामला वर्ष 2009 से लंबित है। तब से आज तक हाईकोर्ट की ओर से यूटी प्रशासन को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद सुखना लेक को बचाने के लिए अब तक कोई हल नहीं ढूंढा जा सका है। हाईकोर्ट में इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान भी यूटी प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि सुखना को बचाने के लिए एक ऐसा प्राधिकरण स्थापित किया जाए, जो केवल सुखना लेक के पुनरुद्धार के लिए ही काम करे।
हाईकोर्ट की ओर से कहा गया था कि यूटी प्रशासन के किसी सीनियर अधिकारी के नेतृत्व में एक टीम बनाई जाए, जो सुखना को बचाने के लिए अल्पावधि और दीर्घावधि योजनाएं तैयार करे और उन पर काम भी किया जाए। खास बात यह है कि उस समय यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट से टीम या प्राधिकरण के गठन के लिए समय मांग लिया था। यानी उस समय प्रशासन को भी यह याद नहीं था कि उसने वर्ष 2011 में सुखना लेक के लिए पहले से कमेटी का गठन कर रखा है। दरअसल, इसका कारण यह भी है कि बीते छह साल के दौरान प्रशासन ने सुखना लेक संबंधी कमेटी की एक भी बैठक नहीं बुलाई।
सुखना लेक बचाने के लिए कमेटी बनाकर भूला प्रशासन
हाईकोर्ट में यह मामला वर्ष 2009 से लंबित है। तब से आज तक हाईकोर्ट की ओर से यूटी प्रशासन को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद सुखना लेक को बचाने के लिए अब तक कोई हल नहीं ढूंढा जा सका है। हाईकोर्ट में इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान भी यूटी प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि सुखना को बचाने के लिए एक ऐसा प्राधिकरण स्थापित किया जाए, जो केवल सुखना लेक के पुनरुद्धार के लिए ही काम करे।
हाईकोर्ट की ओर से कहा गया था कि यूटी प्रशासन के किसी सीनियर अधिकारी के नेतृत्व में एक टीम बनाई जाए, जो सुखना को बचाने के लिए अल्पावधि और दीर्घावधि योजनाएं तैयार करे और उन पर काम भी किया जाए। खास बात यह है कि उस समय यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट से टीम या प्राधिकरण के गठन के लिए समय मांग लिया था। यानी उस समय प्रशासन को भी यह याद नहीं था कि उसने वर्ष 2011 में सुखना लेक के लिए पहले से कमेटी का गठन कर रखा है। दरअसल, इसका कारण यह भी है कि बीते छह साल के दौरान प्रशासन ने सुखना लेक संबंधी कमेटी की एक भी बैठक नहीं बुलाई।
लेक के शौचालयों की सफाई पर नगर निगम से मांगा जवाब
सुखना लेक की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान, जब सुखना पर शौचालयों में गंदगी का मामला उठाया गया तो यूटी प्रशासन से साफ कर दिया था कि लेक पर किसी भी कीमत पर गंदगी नही होनी चाहिए। सोमवार को हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए कि लेक पर शौचालय साफ होने चाहिए, भले ही इसके लिए शुल्क क्यों न लगाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शौचालयों और अन्य जगह पर साफ-सफाई के लिए ठेका दिया जा सकता है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर नगर निगम को इस मामले में जवाब देने के आदेश जारी किए हैं।
सुखना लेक पर लाइट का ठेका निजी कंपनी को
यूटी प्रशासन ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि सुखना लेक और इसके पाथवे पर पर्याप्त लाइट की व्यवस्था करने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया है। प्रशासन ने यह भी बताया कि ठेका हासिल करने वाली कंपनी ने दो महीनों में सुखना लेक पर लाइट का सारा काम पूरा करने का भरोसा दिलाया है।
सुखना लेक पर लाइट का ठेका निजी कंपनी को
यूटी प्रशासन ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि सुखना लेक और इसके पाथवे पर पर्याप्त लाइट की व्यवस्था करने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया है। प्रशासन ने यह भी बताया कि ठेका हासिल करने वाली कंपनी ने दो महीनों में सुखना लेक पर लाइट का सारा काम पूरा करने का भरोसा दिलाया है।