बड़ा फैसला : हरियाणा में सार्वजनिक स्थानों पर होली मनाने पर पाबंदी, हुड्डा भी इस बार नहीं खेलेंगे रंग
- गृह मंत्री विज ने कहा- कोरोना के कारण लोग अपने घरों में ही मनाएं होली
- विज ने दिल्ली एनसीआर के लोगों से की एहतियात बरतने की खास अपील
- हुड्डा बोले- देश का अन्नदाता तकलीफ में, इसलिए नहीं मनाएंगे होली
विस्तार
हरियाणा सरकार ने कोरोना के फिर से बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर होली मनाने पर पाबंदी लगा दी है। सरकार का मानना है कि ऐसे समारोहों से राज्य में कोराना का ग्राफ ऊपर जा सकता है। लिहाजा एहतियात बरतना बहुत आवश्यक है। गृह मंत्री अनिल विज ने इस संदर्भ में ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी है।
उन्होंने कहा है कि त्योहार को बड़े ही हर्ष उल्लास से मनाया जाता है लेकिन कोरोना के कारण लोगों को चाहिए कि वे अपने घरों पर रहकर ही होली मनाएं। त्योहार पर लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, गले मिलते हैं और एक दूसरे के संपर्क में आते हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा ज्यादा हो जाता है।
मालूम हो कि पंजाब में कोरोना का ग्राफ फिर से बढ़ने के कारण हरियाणा सरकार भी चिंतित है। पिछले साल इन्हीं दिनों संक्रमण के मामले बढ़े थे। इस कारण दिल्ली बॉर्डर भी सील करना पड़ा था और देश में लॉकडाउन की स्थिति बनी थी। सरकार नहीं चाहती कि इस बार स्थिति भयावह हो और लोगों को घरों में कैद रहना पड़े। इसलिए यह प्रयास किया जा रहा है कि होली पर सार्वजनिक समारोह न आयोजित हों। एनसीआर क्षेत्र में इस तरह के आयोजन अधिक होते रहते हैं, लिहाजा वहां के लोगों के लिए एहतियात बरतना अधिक आवश्यक है।
अन्नदाता तकलीफ में इसलिए होली नहीं मनाऊंगा : हुड्डा
उधर, भूपेंद्र हुड्डा ने इस बार होली नहीं मनाने का फैसला लिया है। हुड्डा इस फैसले के संबंध में कहा कि देश का अन्नदाता 118 दिन से दिल्ली बॉर्डर पर बैठा है और तकलीफ में है। 300 से ज्यादा किसान अपनी शहादत दे चुके हैं। ऐसे में किसी तरह का जश्न मनाना उचित नहीं है। उन्होंने एक बार फिर सरकार से आंदोलनकारियों की मांगें मानने की अपील की है।
हुड्डा ने कहा कि सरकार को अपना अड़ियल रुख छोड़ किसानों से बातचीत करनी चाहिए और संवेदनशील तरीके से उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है। सत्ता में बैठे लोगों को इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को जितना लंबा खींचेगी, ये उतना विस्तार लेता जाएगा।
आज सड़क से लेकर संसद, विधानसभा, गली, मोहल्ले, चौक-चौराहे और हर घर में किसान आंदोलन की चर्चा है। हर वर्ग किसानों के संघर्ष में उनके साथ खड़ा है। लेकिन इन सबके बीच किसानों के प्रति सरकार का रवैया बेहद निंदनीय है। ऐसा अड़ियल और संवेदनहीन रवैया किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।