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हाईकोर्ट सख्त, एसिड अटैक मामलों में अनट्रेस रिपोर्ट पर अब सीबीआई देगी जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 07 Feb 2018 09:32 AM IST
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एसिड अटैक
- फोटो : Demo Pics
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एसिड अटैक मामलों में लगातार बढ़ती अनट्रेस रिपोर्ट मामले में अब सीबीआई से जांच को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जवाब तलब कर लिया है। सीबीआई ने जांच को लेकर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई 7 मार्च तक टाल दी।
इस मामले में फरीदाबाद निवासी अरुणा त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि 2006 में वह अपने कुछ परिचितों के साथ ऑटो में जा रही थी। इस दौरान कुछ युवकों ने उसके ऊपर एसिड डाल दिया। एसिड अटैक से वह बुरी तरह झुलस गई थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को राहत देने के लिए एक नीति बनाई थी। इस नीति के तहत पीड़ित को 3 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
इसके लिए याची ने भी आवेदन किया था लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से पूरी राशि न देते हुए केवल डेढ़ लाख रुपये जारी किए गए जो याचिकाकर्ता के साथ अन्याय है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की भूमिका और जांच पर भी सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार की जांच की गई है उससे यह पता चलता है कि पुलिस ऐसे मामलों में कितनी गंभीर है। ऐसा लग रहा है कि पुलिस इस तरह के मामलों की जांच में सक्षम ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हमारे पास आंकड़े मौजूद हैं कि किस प्रकार ऐसे मामलों में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी जाती है।
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कुछ ही मामलों में आरोपी गिरफ्त में आते हैं। ऐसे में कोर्ट का विचार है कि इस मामले की जांच को किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंप दिया जाना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही अब सीबीआई को कोर्ट का सहयोग करने के आदेश दिए गए हैं।
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इस मामले में फरीदाबाद निवासी अरुणा त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि 2006 में वह अपने कुछ परिचितों के साथ ऑटो में जा रही थी। इस दौरान कुछ युवकों ने उसके ऊपर एसिड डाल दिया। एसिड अटैक से वह बुरी तरह झुलस गई थी। इसके बाद हरियाणा सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को राहत देने के लिए एक नीति बनाई थी। इस नीति के तहत पीड़ित को 3 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
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इसके लिए याची ने भी आवेदन किया था लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से पूरी राशि न देते हुए केवल डेढ़ लाख रुपये जारी किए गए जो याचिकाकर्ता के साथ अन्याय है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस की भूमिका और जांच पर भी सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार की जांच की गई है उससे यह पता चलता है कि पुलिस ऐसे मामलों में कितनी गंभीर है। ऐसा लग रहा है कि पुलिस इस तरह के मामलों की जांच में सक्षम ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हमारे पास आंकड़े मौजूद हैं कि किस प्रकार ऐसे मामलों में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी जाती है।
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कुछ ही मामलों में आरोपी गिरफ्त में आते हैं। ऐसे में कोर्ट का विचार है कि इस मामले की जांच को किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंप दिया जाना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही अब सीबीआई को कोर्ट का सहयोग करने के आदेश दिए गए हैं।