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पंजाबः बरगाड़ी बेअदबी मामले में फिर शुरू हुई सीबीआई जांच, ग्रंथी समेत तीन से की गई पूछताछ
Wed, 04 Dec 2019 03:31 AM IST
ajay kumar
राजीव शर्मा, अमर उजाला, फरीदकोट (पंजाब)
राजीव शर्मा, अमर उजाला, फरीदकोट (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 04 Dec 2019 03:31 AM IST
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सीबीआई की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले में पांच माह पहले 4 जुलाई 2019 को क्लोजर रिपोर्ट पेश करने पर मचे बवाल के बाद सीबीआई ने इस केस की नए सिरे पड़ताल शुरू कर दी है। सीबीआई चंडीगढ़ की छह सदस्यीय टीम मंगलवार सुबह 11 बजे गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के उसी गुरुद्वारा साहिब में पहुंची, जहां से बरगाड़ी में बेअदबी की वारदात से पहले श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप चोरी किया गया था।
इस दौरान टीम ने पावन स्वरूप चोरी मामले के शिकायतकर्ता व गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी गोरा सिंह समेत गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की खजांची प्रीतम कौर व बरगाड़ी निवासी रणजीत सिंह से सवाल जवाब किए। करीब चार साल 12 अक्तूबर 2015 को गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर श्री गुरुग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने का मामला सामने आया था।
इस घटना से करीब साढ़े तीन माह पहले 1 जून 2015 को बरगाड़ी से सटे गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ का स्वरूप चोरी किया गया था और इसी गुरुद्वारा साहिब के बाहर 24-25 सितंबर 2015 की रात को अश्लील शब्दावली वाला पोस्टर लगाकर पावन स्वरूप की बेअदबी करने संबंधी पुलिस प्रशासन व सिख संगत को चुनौती दी गई थी।
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इन तीनों घटनाओं की जांच के लिए डीजीपी ने एसआईटी का गठन किया था और एसआईटी के विफल रहने पर तत्कालीन अकाली भाजपा सरकार ने नवंबर 2015 में इन घटनाओं की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी।
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इस दौरान टीम ने पावन स्वरूप चोरी मामले के शिकायतकर्ता व गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी गोरा सिंह समेत गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की खजांची प्रीतम कौर व बरगाड़ी निवासी रणजीत सिंह से सवाल जवाब किए। करीब चार साल 12 अक्तूबर 2015 को गांव बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब के बाहर श्री गुरुग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की बेअदबी करने का मामला सामने आया था।
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इस घटना से करीब साढ़े तीन माह पहले 1 जून 2015 को बरगाड़ी से सटे गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ का स्वरूप चोरी किया गया था और इसी गुरुद्वारा साहिब के बाहर 24-25 सितंबर 2015 की रात को अश्लील शब्दावली वाला पोस्टर लगाकर पावन स्वरूप की बेअदबी करने संबंधी पुलिस प्रशासन व सिख संगत को चुनौती दी गई थी।
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इन तीनों घटनाओं की जांच के लिए डीजीपी ने एसआईटी का गठन किया था और एसआईटी के विफल रहने पर तत्कालीन अकाली भाजपा सरकार ने नवंबर 2015 में इन घटनाओं की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी।
सीबीआई के मापदंडों पर खरी नहीं उतरी पंजाब पुलिस जांच
पहले चरण में बरगाड़ी बेअदबी मामले में लंबी छानबीन के बावजूद सीबीआई सुराग नहीं ढूंढ पाई थी और यह मामला लगभग ठंडे बस्ते में चला गया था। पिछले साल 1 जून 2018 को सिख जत्थेबंदियों की ओर सो बरगाड़ी में इंसाफ मोर्चा लगाने के बाद हरकत में आई पंजाब पुलिस की एसआईटी ने बरगाड़ी केस में डेरा सच्चा सौदा सिरसा की 45 मेंबरी प्रांतीय कमेटी के सदस्य महिंदरपाल बिट्टू समेत 10 डेरा अनुयायियों की शामिल होने का दावा किया और इन घटनाओं की जांच सीबीआई के पास होने के चलते अपनी रिपोर्ट सीबीआई के हवाले कर दी।
एसआईटी की रिपोर्ट पर सीबीआई ने तथाकथित आरोपी डेरा प्रेमियों से पूछताछ की गई और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से भी जांच में शामिल किया गया। सीबीआई ने अपनेी पड़ताल के बाद पंजाब पुलिस की एसआईटी की जांच को सिरे से ही खारिज कर दिया और बीती 4 जुलाई 2019 को उक्त केस में मोहाली स्थित सीबीआई कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। क्लोजर रिपोर्ट पर राजनीतिक रूप से भी खूब बवाल खड़ा हुआ। इसके बाद सीबीआई ने केस की नए सिरे से जांच करने का फैसला लिया।
उल्लेखनीय है कि एसआईटी की ओर से बरगाड़ी केस में गिरफ्तार तथाकथित मुख्य आरोपी डेरा प्रेमी महिंदरपाल बिट्टू की इसी साल 22 जून 2019 को नाभा जेल में हत्या कर दी गई थी।
एसआईटी की रिपोर्ट पर सीबीआई ने तथाकथित आरोपी डेरा प्रेमियों से पूछताछ की गई और उन्हें वैज्ञानिक तरीके से भी जांच में शामिल किया गया। सीबीआई ने अपनेी पड़ताल के बाद पंजाब पुलिस की एसआईटी की जांच को सिरे से ही खारिज कर दिया और बीती 4 जुलाई 2019 को उक्त केस में मोहाली स्थित सीबीआई कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। क्लोजर रिपोर्ट पर राजनीतिक रूप से भी खूब बवाल खड़ा हुआ। इसके बाद सीबीआई ने केस की नए सिरे से जांच करने का फैसला लिया।
उल्लेखनीय है कि एसआईटी की ओर से बरगाड़ी केस में गिरफ्तार तथाकथित मुख्य आरोपी डेरा प्रेमी महिंदरपाल बिट्टू की इसी साल 22 जून 2019 को नाभा जेल में हत्या कर दी गई थी।
एसआईटी ने जांच करवाना चाहती है कैप्टन सरकार
बरगाड़ी बेअदबी मामले में सीबीआई कई ओर से नए सिरे से जांच शुरू करने को लेकर विवाद खड़ा होने के आसार है। कैप्टन सरकार मामले की जांच पंजाब पुलिस की एसआईटी से करवाना चाहती है। सत्ता में आने के बाद कैप्टन सरकार ने बेअदबी की घटनाओं की जांच के लिए हाईकोर्ट से सेवामुक्त जस्टिस रणजीत सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया था और आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 28 अगस्त 2018 को पंजाब विधानसभा ने प्रस्ताव पारित करके बेअदबी मामले की जांच सीबीआई से वापस लेने की घोषणा कर दी थी जिसका 6 सितंबर 2018 को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया था।
सरकार को जांच के अधिकार वापस नहीं मिले। इस दौरान सरकार ने बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की घटनाओं की जांच के लिए 10 सितंबर 2018 को एडीजीपी प्रबोध कुमार की अगुवाई में पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की थी और वह बरगाड़ी बेअदबी केस की जांच भी इसी एसआईटी से करवाना चाहती है। सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के बाद भी सरकार ने मामले की जांच एसआईटी से करवाने के प्रयास शुरू किए लेकिन कानूनी तौर पर सफलता नहीं मिल पाई। इसी बीच सीबीआई ने मोहाली की सीबीआई कोर्ट में लिखित रूप से इस केस की नए सिरे से पड़ताल करने की जानकारी दे दी, जिसका पंजाब सरकार विरोध कर रही है।
सरकार को जांच के अधिकार वापस नहीं मिले। इस दौरान सरकार ने बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड की घटनाओं की जांच के लिए 10 सितंबर 2018 को एडीजीपी प्रबोध कुमार की अगुवाई में पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की थी और वह बरगाड़ी बेअदबी केस की जांच भी इसी एसआईटी से करवाना चाहती है। सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट पेश करने के बाद भी सरकार ने मामले की जांच एसआईटी से करवाने के प्रयास शुरू किए लेकिन कानूनी तौर पर सफलता नहीं मिल पाई। इसी बीच सीबीआई ने मोहाली की सीबीआई कोर्ट में लिखित रूप से इस केस की नए सिरे से पड़ताल करने की जानकारी दे दी, जिसका पंजाब सरकार विरोध कर रही है।