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हरियाणा में गोवंश संरक्षण-संवर्धन कानून में संशोधन की तैयारी, और कड़ा होगा

Mon, 29 May 2017 11:38 AM IST
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 29 May 2017 11:38 AM IST
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Cattle Conservation Promotion act haryana
मनोहर लाल खट्टर - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा गो संरक्षण एवं संवर्धन कानून-2015 को मनोहर लाल सरकार और सख्त करने जा रही है। इसमें बड़े संशोधन की तैयारी चल रही है। सरकार ने गो सेवा आयोग के जरिए इसकी कवायद शुरू कर दी है। गोवंश संरक्षण से जुड़े बुद्धिजीवियों के साथ ही पीएफए, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों से भी राय ली जा रही है। सरकार कानून को इतना कड़ा करने की तैयारी में है कि गोवध की संभावनाएं ही पूरी तरह से राज्य में खारिज हो जाएं।
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2015 में हरियाणा विधानसभा में सर्व सम्मति से बनाए गए नए कानून में गोवध निषेध नियम, 1972 की कुछ ऐसी धाराएं शामिल कर ली गई हैं, जिससे कानून में कार्रवाई को लेकर विरोधाभास उत्पन्न हो रहा है। इसे देखते हुए गो सेवा आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगला ने सीएम मनोहर लाल के साथ कानून में संशोधन को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने पूरे तर्कों के साथ सीएम को संशोधन की वजह भी बताई है। मंगला ने जहां खुद कुछ संशोधन सरकार को सुझाए हैं, वहीं एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के मास्टर ट्रेनर नरेश कादियान ने भी सुझाव दिए हैं।
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इन्हें गो सेवा आयोग ने सरकार को भेज दिया है। कादियान ने बताया कि गो संरक्षण एवं संवर्धन कानून-2015 में गाय की चर्बी और हड्डियां पकड़े जाने पर किसी सजा का प्रावधान नहीं है। इसी तरह से गाए का चमड़ा पकड़ने जाने पर कार्रवाई की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। कानून में धारा-19 के तहत नियम बनने थे, जो आज तक विकसित नहीं किए गए। सबसे बड़ी विडंबना ये है कि 2015 के कानून में गोवध निषेध नियम 1972 की धारा-20 को भी शामिल कर लिया गया है।
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इसमें गो मांस खाने, उसे या उससे बने व्यंजन ले जाने पर कोई रोक नहीं है। बल्कि इसके तहत परमिट लेकर ले जाने की छूट है। वहीं, 15 साल से ऊपर के गोवंश की हत्या भी की जा सकती है। इससे गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन कानून-2015 के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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