Punjab: इंडस्ट्रियल प्लॉट को काटकर बना दी टाउनशिप, पूर्व मंत्री और IAS समेत 10 पर केस दर्ज
जांच में सामने आया कि पीएसआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर एसपी सिंह की अगुवाई वाली कमेटी ने गुलमोहर कंपनी के पत्र पर सहमति जताते हुए 12 प्लॉटों को 125 प्लॉट में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
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एक रियल एस्टेट कंपनी को इंडस्ट्रियल प्लॉट ट्रांसफर करने और उसमें टाउनशिप बनाने और तय संख्या से बढ़ाकर प्लॉटों की मंजूरी देने के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने गुरुवार को पूर्व उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा व पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरशन (पीएसआईडीसी) की पूर्व एमडी व आईएएस अधिकारी नीलिमा समेत के 10 अधिकारियों पर केस दर्जकर सात को गिरफ्तार कर लिया गया है।
गिरफ्तार सात आरोपियों की पहचान अंकुश चौधरी एस्टेट अफसर, दविंदर पाल सिंह जीएम पर्सोनल, जेएस भाटिया चीफ जनरल मैनेजर (प्लानिंग), आशिमा अग्रवाल एटीपी (प्लानिंग), परमिंदर सिंह कार्यकारी इंजीनियर, रजत कुमार डीए व मंदीप सिंह एसडीई हैं। इस फर्जीवाड़े में राज्य सरकार को 700 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
1987 की डीड के अनुसार यह प्लॉट सिर्फ औद्योगिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाना था। रियल एस्टेट कंपनी गुलमोहर टाउनशिप ने पूर्व मंत्री व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर इंडस्ट्रियल प्लॉट को काटकर मोहाली में टाउनशिप बना दी। इसमें प्लॉट काटकर आगे आईएएस व बिजनेसमैन को दे दिए। केस में गुलमोहर रियल एस्टेट कंपनी के तीन मालिकों को भी नामजद किया है।
पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी, जो बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई कंपनी ने पीएसआईडीसी से एनओसी लेकर इस प्लॉट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। तत्कालीन उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना टाउनशिप की मंजूरी दे दी।
बिना जांचे 12 प्लॉटों को 125 में बांट दिया
जांच में सामने आया कि पीएसआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर एसपी सिंह की अगुवाई वाली कमेटी ने गुलमोहर कंपनी के पत्र पर सहमति जताते हुए 12 प्लॉटों को 125 प्लॉट में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस मंजूरी से पहले पीएसआईडीसी ने प्रदूषण रोकथाम बोर्ड, नगर निगम, बिजली बोर्ड, जंगलात विभाग, अग्निशमन व अन्य विभागों से कोई मंजूरी नहीं ली थी।
फाइल में लगाए जाली दस्तावेज, जांच में खुली पोल
फॉरेंसिक जांच में पाया गया कि फाइल की नोटिंग में जुड़े दो पन्ने फाइल में जुड़े शेष पन्नों से मेल नहीं खाते थे। अधिकारियों की कमेटी ने ही जाली दस्तावेज साथ में लगाए थे। विजिलेंस के प्रवक्ता के अनुसार 1987 की डीड अनुसार यह प्लॉट सिर्फ औद्योगिक उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाना था जबकि गुलमोहर टाउनशिप का ऐसा कोई काम नहीं है।
जांच रुकवाने को पूर्व मंत्री ने दी रिश्वत, पहुंच गए जेल
जब इस मामले की विजिलेंस जांच कर रही थी तो इसमें खुद को फंसता देख पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने विजिलेंस के एक अधिकारी को 50 लाख की रिश्वत देने की कोशिश की। विजिलेंस ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पूर्व मंत्री जेल में बंद हैं।
फीस में ही 1.23 करोड़ का लगाया चूना
पीएसआईडीसी के नियमों के अनुसार 1987 से प्लॉटों की फीस 20 रुपये प्रति गज व तीन रुपये प्रति साल के हिसाब से वसूली जानी थी जो कि कुल 1, 21 हजार वर्ग गज के लिए 1, 51,25,000 ली जानी थी। आरोपी फर्म से पहले आवेदन के साथ 27,83,000 पे आर्डर लगा दया। जबकि पीएसआईडीसी से किसी ने भी इस तरह की मांग नहीं की। इससे पंजाब सरकार 1,23,42,000 रुपये का नुकसान हुआ है।
तत्कालीन मंत्री व पूर्व एमडी ने किया शक्ति का गलत इस्तेमाल
पड़ताल में सामने आया कि है कि अगर यह प्लॉट राज्य सरकार की हिदायतों व नियमों के अनुसार बेचे जाते तो 600 से 700 करोड़ रुपये की आय होती। गुलमोहर टाउनशिप की तरफ 125 प्लॉटों की बिक्री के समय किसी भी खरीदार पक्ष से कोई प्रस्ताव रिपोर्ट, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन व मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन की मांग नहीं की गई। सारे प्लॉट गैर कानूनी तरीके से बेचे गए। उपरोक्त कमेटी सदस्यों में तत्कालीन एमडी नीलिमा व पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा शामिल थे। इन्होंने एक दूसरे से मिलीभगत करके अपने पद का दुरुपयोग कर गुलमोहर टाउनशिप कंपनी के मालिक डायरेक्टर जगदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह को गैर कानूनी तरीके से फायदा पहुंचाया।