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Chandigarh News: कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हादसे का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, यूटी प्रशासन, नगर निगम और स्कूल को नोटिस

Thu, 14 Jul 2022 09:15 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 14 Jul 2022 09:15 PM IST
सार

याची ने बताया कि यह पहला हादसा नहीं है जिसमें किसी पेड़ के कारण मुसीबत आई हो। इससे पहले 2013 में सेक्टर-17 में एक सूखे पेड़ के गिरने से 20 साल की युवती को टांग गंवानी पड़ी थी। उस समय हाईकोर्ट ने प्रशासन को युवती को 20 लाख 15 हजार रुपये मुआवजा जारी करने का आदेश दिया था।

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Carmel Convent tree collapse case reached in Punjab and Haryana High court
हादसे की बाद की तस्वीर और इशिता की फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 250 साल पुराना हेरिटेज पेड़ गिरने से 10वीं की छात्रा हीराक्षी की जान और इशिता के हाथ गंवाने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में इस मामले की जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश से करवाने की मांग की गई है। 

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हाईकोर्ट ने याचिका पर यूटी प्रशासन, नगर निगम और कार्मल कॉन्वेंट स्कूल सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एडवोकेट कुनाल मुलवानी ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि बीते नौ जुलाई को सुबह लगभग 11 बजे कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हेरिटेज पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर छात्राएं लंच कर रही थीं। इसी बीच उन पर पीपल का पेड़ गिर गया। 
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हादसे में हीराक्षी की मौत हो गई जबकि पीजीआई में इलाज के दौरान डॉक्टरों को जान बचाने के लिए इशिता का बायां हाथ काटना पड़ा। वहीं 17 अन्य छात्राएं व एक अटेंडेंट गंभीर घायल है। याची ने कहा कि हादसे के बाद यूटी प्रशासन, नगर निगम और स्कूल एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। याची ने कहा कि प्रशासन की दलील है कि यह पेड़ प्राइवेट प्रॉपर्टी में है तो वहीं स्कूल का कहना है कि इस पर प्रशासन ने हेरिटेज का बोर्ड लगा रखा है। 

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याची ने बताया कि यह पहला हादसा नहीं है जिसमें किसी पेड़ के कारण मुसीबत आई हो। इससे पहले 2013 में सेक्टर-17 में एक सूखे पेड़ के गिरने से 20 साल की युवती को टांग गंवानी पड़ी थी। उस समय हाईकोर्ट ने प्रशासन को युवती को 20 लाख 15 हजार रुपये मुआवजा जारी करने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसे वृक्षों की पहचान कर उन्हें हटाने से जुड़े निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 

याची ने कहा कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच हाईकोर्ट के वर्तमान जज को सौंपी जाए। इसके साथ ही भविष्य में ऐसे हादसे न हों इसके लिए एक कमेटी गठित की जाए, जो दिशा निर्देश तैयार करे। वहीं प्रशासन को पिछले पांच साल में वृक्षों की मेंटेनेंस, लोगों के लिए खतरनाक वृक्षों की पहचान से जुड़ा आंकड़ा सौंपने का आदेश दिया जाए।

क्लास में लंच की अनुमति नहीं, गर्मियों में वृक्षों की छाया ही बनती है विकल्प
याचिका में कहा गया कि स्कूल में विद्यार्थियों को कक्षा में खाने की अनुमति नहीं थी। विद्यार्थी वृक्ष की छाया में ही लंच करने को मजबूर थे। उस वृक्ष के पास खाना या बैठना सुरक्षित नहीं है, इस बारे में कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया था।

हादसा ईश्वर का कृत्य नहीं बल्कि लापरवाही का नतीजा
याची ने कहा कि इस हादसे को एक्ट ऑफ गॉड नहीं कह सकते। यह लापरवाही का नतीजा है। उस दिन न तो बारिश थी और न ही कोई तूफान आया था। यह हादसा 250 साल पुराने पेड़ में दीमक लगने से खोखला होने की वजह से हुआ था। शहर में बच्चों का ऐसे पेड़ों के नीचे होना खतरनाक है। ऐसे पेड़ों की पहचान कर लगातार निगरानी बेहद जरूरी है। 

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