{"_id":"a9f5a2cc7db38b533a1058a66038ca5d","slug":"carefully-cross-chandigarh-pgi-and-hallomajra-roads","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीजीआई और हल्लोमाजरा से निकलें जरा बचकर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीजीआई और हल्लोमाजरा से निकलें जरा बचकर
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Jun 2014 04:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर आप पीजीआई के गेट नंबर-1 और हल्लोमाजरा चौक से निकलते हैं तो जरा संभलकर गाड़ी चलाएं क्योंकि यह दोनों एरिये ऐसे हैं जो दुघर्टना संभावित क्षेत्र में शामिल हो गए हैं। ट्रैफिक पुलिस द्वारा की गई सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि उतरी सेक्टर में पीजीआई का गेट नंबर-1 और दक्षिणी सेक्टर में हल्लोमाजरा चौक पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं।
विज्ञापन
इन दोनों प्वाइंट पर इस साल 30 अप्रैल मई तक 13-13 हादसे हो चुके हैं। इसके साथ मनीमाजरा का हाउसिंग बोर्ड हादसों के लिहाज से आगे है। यहां पर पर भी 15 मई तक 11 सड़क हादसों में लोग घायल हो चुके हैं। मई माह में तो मनीमाजरा में हरियाणा रोडवेज की बस की चपेट में आने से ही दो लोगों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
रेलवे स्टेशन लाइट प्वाइंट पर 9 हादसे हो चुके हैं। ट्रैफिक पुलिस अब इस सर्वे के हिसाब से कुछ एहतियात भी बरतने जा रही है। कई प्वाइंट पर नाके और पुलिस कर्मचारी बढ़ाने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। मालूम हो कि रविवार को हल्लोमाजरा के पास ही एक बुजुर्ग महिला की बस की चपेट में आने से मौत हुई है।
विज्ञापन
अधिकतर हादसे रात 9 से 12 बजे के बीच
अधिकतर सड़क हादसे रात 9 से 12 बजे के बीच होते हैं। इस दौरान साल 2010 से लेकर इस साल 30 अप्रैल तक 380 हादसे हो चुके है। इसके बाद शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच ज्यादा हादसे होते हैं। इस दौरान साल 2010 से लेकर इस साल 30 अप्रैल तक 373 हादसे हो चुके हैं। जबकि सबसे कम हादसे देर रात 3 बजे से सुबह 6 बजे के बीच होते हैं। ट्रैफिक पुलिस जल्द ही नए एलकोहल मीटर भी खरीदने जा रहा है।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार रात के समय अधिकतर हादसे होने का बड़ा कारण शराब पीकर वाहन चलाना भी है। आरटीआई एक्टीविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि सुबह और दोपहर की तरह रात को भी लाइट प्वाइंटों पर पूरी तरह से पुलिस को मुस्तैद रहना चाहिए। चालान पर कम और ट्रैफिक जागरूकता पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
ट्रैफिक एसएसपी मनीष चौधरी का कहना है कि ऐसे एरियों की पहचान कर ली गई है जहां पर हादसे ज्यादा होते हैं। ऐसे स्थलों पर हादसों को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस के ड्यूटी रोस्टर में भी बदलाव करने का प्रावधान किया जा रहा है।
उनका कहना है कि दिल्ली में शराब पीकर वाहन चलाने वालों को एक सप्ताह तक जेल में भी भेजने का प्रावधान है। अगर ऐसा शहर में भी हो तो हादसों में काफी गिरावट आएगी। उनका कहना है कि ड्रंक एंड ड्राइविंग के नाकों का हादसे कम होने में फायदा मिल रहा है।
करीब 48 लोगों की हो चुकी है मौत
इस साल 31 मई तक सड़क हादसों में करीब 48 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि साल 2013 में 117, साल 2012 और 2011 में 136 लोगों की मौत सड़क हादसे में हुई है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार जागरूकता अभियान और कार्रवाई के कारण ही साल 2013 में साल 2012 के मुकाबले में 19 लोगों की मौत कम हुई है।
कब हुए कितने हादसे
समय----------2010----2011-------2012-----2013------2014------कुल
6-9 (सुबह)----43-------32---------32--------27----------7-------141
9-12----------41--------54---------49--------42--------17--------203
12-3(दोपहर)---54-------59---------66--------59--------19---------257
3-6-------------79------85----------65--------61--------21---------311
6-9-------------92------85----------92--------80---------24---------373
9-12 (रात)-----98------93----------86--------79----------25--------380
12-3-----------35-------20---------23---------45----------10--------133
3-6------------14--------9----------7----------17-----------5---------52
कुल-----------456------437-------419--------410----------128------1850
नोट : 2014 के आंकड़े अप्रैल महीने तक के दिए गए हैं।