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SYL पर कैप्टन का बयान, 'पानी का हक छीना तो फिर लौट सकता है आतंकवाद'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 06 Jun 2017 09:20 AM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
‘अमरिंदर रहे न रहे, अगर फैसला पंजाब के विरुद्ध आया तो एसवाईएल एक राष्ट्रीय समस्या बन जाएगा।’ यह कहना है पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिह का। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्य के लोगों के पानी के हक के खिलाफ कोई भी कदम उठाया गया तो यह इस क्षेत्र में आतंकवाद को फिर से जन्म दे देगा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पंजाब और देश के अमन व स्थिरता के लिए केंद्रीय गृह मंत्री से जल संसाधन विभाग के जरिये एसवाईएल के मुद्दे पर समझौता वार्ता शुरू कराने का आग्रह किया था। कैप्टन ने कहा कि अगर एसवाईएल प्रस्ताव पर फैसला राज्य के हितों को ध्यान में रखकर नहीं किया गया तो यह पंजाब को आतंकवाद के इसके काले दिनों में धकेल देगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी नकारात्मक मुद्दा राज्य में बड़े संकट को जन्म देगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सभी आतंकवादी गतिविधियां जिनमें खालिस्तानी, नक्सलवादी और मुजाहरा गतिविधियां शामिल हैं, दक्षिणी पंजाब से ही शुरू हईं, जो एसवाईएल नहर के निर्माण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने पंजाब और देश के अमन व स्थिरता के लिए केंद्रीय गृह मंत्री से जल संसाधन विभाग के जरिये एसवाईएल के मुद्दे पर समझौता वार्ता शुरू कराने का आग्रह किया था। कैप्टन ने कहा कि अगर एसवाईएल प्रस्ताव पर फैसला राज्य के हितों को ध्यान में रखकर नहीं किया गया तो यह पंजाब को आतंकवाद के इसके काले दिनों में धकेल देगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी नकारात्मक मुद्दा राज्य में बड़े संकट को जन्म देगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सभी आतंकवादी गतिविधियां जिनमें खालिस्तानी, नक्सलवादी और मुजाहरा गतिविधियां शामिल हैं, दक्षिणी पंजाब से ही शुरू हईं, जो एसवाईएल नहर के निर्माण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।
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...तो लौट सकता है आतंकवाद
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : File Photo
पंजाब को इस भयावह स्थिति में डालने के लिए अकालियों को दोषी ठहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली पंजाब को उसके प्राकृतिक संसाधनों से वंचित करने के लिए जिम्मेवार हैं, क्योंकि राज्य के विभाजन के परिणामस्वरूप संसाधन हिमाचल और हरियाणा को चले गए। हरियाणा को उसके रकबे के मुकाबले ज्यादा पानी मिला, जबकि पंजाब को यमुना नदी से पानी का हिस्सा नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि समस्या की जड़ राज्य के विभाजन में पता लगाई जा सकती है और उस समय संसाधनों का एकतरफा बंटवारा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के पास अपनी जमीन की सिंचाई के लिए पानी नहीं है, अन्य राज्यों के लिए हिस्सा नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि भूजल के जरिए 25 फीसदी से कम सिंचाई की हालत में राज्य के लिए कृषि अव्यवहारिक बन गई है।
कृषि लागत बढ़ गई है, लेकिन फसलों के एमएसपी में कोई समान वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने राज्य की विकट जल समस्या के मद्देनजर फसलों के विविधिकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पास धान के फसलों की सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है।
उन्होंने कहा कि समस्या की जड़ राज्य के विभाजन में पता लगाई जा सकती है और उस समय संसाधनों का एकतरफा बंटवारा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के पास अपनी जमीन की सिंचाई के लिए पानी नहीं है, अन्य राज्यों के लिए हिस्सा नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि भूजल के जरिए 25 फीसदी से कम सिंचाई की हालत में राज्य के लिए कृषि अव्यवहारिक बन गई है।
कृषि लागत बढ़ गई है, लेकिन फसलों के एमएसपी में कोई समान वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने राज्य की विकट जल समस्या के मद्देनजर फसलों के विविधिकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पास धान के फसलों की सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है।