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केजरीवाल विचित्र इंसान, जिसकी समझ नहीं उसमें भी कूद जाते हैं: सीएम कैप्टन
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 10 Nov 2017 09:16 AM IST
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Punjab CM Captain Amarinder Singh
- फोटो : File Photo
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एक तरफ दिल्ली-एनसीआर की जनता जानलेवा प्रदूषण के कहर से बेहाल हो रही तो दूसरी तरफ दिल्ली और पंजाब के राजनेता सियासी शह-मात का खेल खेलने में व्यस्त हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं और इस बारे में बात करने के लिए उन्हें समय भी नहीं दे रहे हैं। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए पंजाब की सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि केजरीवाल विचित्र इंसान है और उस मामले में भी टांग अड़ा देते हैं जिसकी उन्हें समझ नहीं है। खेती के बारे में वे क्या जानें।
केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के कारण पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के ऊपर स्मॉग की घनी चादर छा गई है, जिसकी वजह से लोगों खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को खतरा पैदा हो गया है। इन दोनों राज्यों को राजनीति को किनारे कर हर साल पैदा होने वाली पराली समस्या का मिलजुलकर हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए। दिल्ली के सीएम के रूप में वे हर संभव कदम उठा रहे हैं लेकिन पंजाब और हरियाणा के सहयोग के बिना प्रदूषण को कम नहीं किया जा सकता है।
इस पर कैप्टन ने कहा है कि पंजाब में दो करोड़ टन पराली पैदा होती है, किसानों को उसे कहां रखने के लिए कहा जाए? मिलने का समय नहीं दिए जाने पर पंजाब के सीएम ने कहा कि जो चीज केजरीवाल के बस में नहीं है, उस पर मीटिंग करके वे क्या करेंगे। इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि इस मामले में केंद्र के हस्तक्षेप की जरूरत है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रदूषण से प्रभावित राज्यों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है।
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केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के कारण पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के ऊपर स्मॉग की घनी चादर छा गई है, जिसकी वजह से लोगों खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को खतरा पैदा हो गया है। इन दोनों राज्यों को राजनीति को किनारे कर हर साल पैदा होने वाली पराली समस्या का मिलजुलकर हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए। दिल्ली के सीएम के रूप में वे हर संभव कदम उठा रहे हैं लेकिन पंजाब और हरियाणा के सहयोग के बिना प्रदूषण को कम नहीं किया जा सकता है।
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इस पर कैप्टन ने कहा है कि पंजाब में दो करोड़ टन पराली पैदा होती है, किसानों को उसे कहां रखने के लिए कहा जाए? मिलने का समय नहीं दिए जाने पर पंजाब के सीएम ने कहा कि जो चीज केजरीवाल के बस में नहीं है, उस पर मीटिंग करके वे क्या करेंगे। इसका कोई फायदा नहीं है क्योंकि इस मामले में केंद्र के हस्तक्षेप की जरूरत है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय मंत्रियों के साथ प्रदूषण से प्रभावित राज्यों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है।
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कैप्टन ने पीएम को लिखा पत्र, बैठक बुलाने की मांग की
Captain Amarinder singh & Arvind Kejriwal
- फोटो : File Photo
कैप्टन ने पीएम को लिखा पत्र, बैठक बुलाने की मांग की
इस मसले के हल के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि कृषि, खाद्य व पर्यावरण मंत्री और प्रभावित राज्यों के सीएम की बैठक बुलाई जाए। पराली जलाने की समस्या की रोकथाम को किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए ताकि वैज्ञानिक ढंग से फसल के अवशेष का प्रबंधन किया जा सके।
ऐसी वित्तीय सहायता अपेक्षित जांच के बाद किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है। सीएम ने कहा कि समस्या को सही परिप्रेक्ष्य में समझा नहीं जा रहा है। पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन पर किसानों को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। इसलिए वे फसल जलाने को प्राथमिकता देते हैं। इस समय ऐसी कोई भी तकनीकी या जीव विज्ञान प्रणाली नहीं है, जो किसानों को आर्थिक तौर पर उत्साहित कर सके।
15.40 लाख टन पराली है चुनौती
पंजाब में धान का रकबा 30 लाख हेक्टेयर है। यहां हर साल 19.7 मिलियन टन पराली पैदा होती है। इसमें से बासमती की 2.7 मिलियन टन पराली पशु चारे में प्रयोग हो जाती है। 1.0 मिलियन टन का उपयोग पॉॅवर प्लांट और इंडस्ट्री में होता है। 0.60 मिलियन टन का खेत में प्रबंधन हो जाता है। बाकी बची 15.40 मिलियन टन पराली का प्रबंधन राज्य के लिए चुनौती है।
इस मसले के हल के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि कृषि, खाद्य व पर्यावरण मंत्री और प्रभावित राज्यों के सीएम की बैठक बुलाई जाए। पराली जलाने की समस्या की रोकथाम को किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए ताकि वैज्ञानिक ढंग से फसल के अवशेष का प्रबंधन किया जा सके।
ऐसी वित्तीय सहायता अपेक्षित जांच के बाद किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है। सीएम ने कहा कि समस्या को सही परिप्रेक्ष्य में समझा नहीं जा रहा है। पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन पर किसानों को काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। इसलिए वे फसल जलाने को प्राथमिकता देते हैं। इस समय ऐसी कोई भी तकनीकी या जीव विज्ञान प्रणाली नहीं है, जो किसानों को आर्थिक तौर पर उत्साहित कर सके।
15.40 लाख टन पराली है चुनौती
पंजाब में धान का रकबा 30 लाख हेक्टेयर है। यहां हर साल 19.7 मिलियन टन पराली पैदा होती है। इसमें से बासमती की 2.7 मिलियन टन पराली पशु चारे में प्रयोग हो जाती है। 1.0 मिलियन टन का उपयोग पॉॅवर प्लांट और इंडस्ट्री में होता है। 0.60 मिलियन टन का खेत में प्रबंधन हो जाता है। बाकी बची 15.40 मिलियन टन पराली का प्रबंधन राज्य के लिए चुनौती है।