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कैप्टन के 21 सिख युवकों के कत्ल के बयान पर सियासत तेज, शिअद की मांग- गवाही दें सीएम

Sun, 21 May 2017 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 21 May 2017 09:09 AM IST
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Captain amarinder singh on 21 khalistani youth issue
- फोटो : File Photo
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से उन 21 सिख युवकों की हत्या के खिलाफ गवाही देने की मांग की है जिन्होंने सूबे में आतंकवाद के दौरान आत्मसमर्पण किया था।
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इस संबंध में शुक्रवार को जारी एक बयान में अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा कि यह अच्छी बात है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 1990-91 के दौरान 21 युवकों का प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के समक्ष आत्मसमर्पण करवा कर बचाया था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि कैप्टन ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया और 2002-2007 के दौरान सूबे के मुख्यमंत्री पद पर रहने के बावजूद इस केस पर कोई कदम नहीं उठाया। 
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वल्टोहा ने कहा कि अमरिंदर को 21 सिख युवकों की हत्या करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना चाहिए। अकाली नेता ने कहा कि यह बयान काफी नहीं है कि छह महीने बाद जब अमरिंदर को पता चला कि 21 युवकों की हत्या की जा चुकी है तो उसके बाद उन्होंने चंद्रशेखर को कभी नहीं बुलाया। वल्टोहा ने कहा कि अमरिंदर की उन 21 पीड़ितों के प्रति एक जिम्मेदारी बनती थी। कैप्टन को तुरंत पीड़ितों की पहचान कर उनके परिजनों को मुआवजा देना चाहिए था। इसके अलावा इस घिनौने अपराध के दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है और राज्य मानवाधिकार आयोग को भी इस संबंध में केस दर्ज करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री तुरंत इस मामले में दखल दें।
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कैप्टन से हत्या के दोषियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग

Captain amarinder singh on 21 khalistani youth issue
कैप्टन ने अपनी किताब में इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि तत्‍कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के समक्ष 21 उग्रवादी नौजवानों को आत्मसमर्पण कराया था। इन नौजवानों को जिन्हें बाद में मौत के घाट उतार दिया गया था। इसका पता उन्हें छह माह बाद लगा था। वह खुद को उन लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हैं। 

खालड़ा मिशन ऑर्गेनाइजेशन प्रमुख परमजीत खालड़ा, मुख्य वक्ता सतविंदर सिंह पलासोर, प्रधान हरमनदीप सिंह, उपप्रधान विरसा सिंहं, केंद्रीय समिति मेंबर सतवंत सिंह मानक और पंजाब मानवाधिकार संगठन के डिप्टी चेयरमैन कृपाल सिंह रंधावा ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस मामले में पूरा सच सामने लाना चाहिए। 
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