कुर्सी से हटे कैप्टन का खौफ बरकरार: बसों और दफ्तरों से पुराने सीएम के पोस्टर हटाने में लगी चन्नी सरकार, करीबियों पर भी वार
नए मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण के तुरंत बाद आयोजित पहली प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पंजाब भवन के कांफ्रेंस हॉल में उन सभी पोस्टरों को ढक दिया गया था, जिनमें कैप्टन की तस्वीर लगी थी। यही काम पंजाब के दोनों सचिवालयों में भी किया गया और विभिन्न विभागों में लगी कैप्टन की तस्वीरें और प्रचार पोस्टरों को हटा दिया गया है।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद भी पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के नेतृत्व में विरोधी खेमा कैप्टन के खौफ से उभर नहीं पा रहा। नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के ओहदा संभालने के साथ ही अब राज्य में सरकारी और सार्वजनिक स्थानों पर लगे कैप्टन के पोस्टरों को हटाने की मुहिम शुरू हो गई है। बुधवार को राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से पीआरटीसी से प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर पीआरटीसी की बसों पर लगे पूर्व मुख्यमंत्री के फोटो वाले प्रचार पोस्टरों को हटाने के लिए कह दिया गया है।
बुधवार सुबह ही मुख्यमंत्री चन्नी ने भी राज्य सरकार से कैप्टन अमरिंदर के करीबियों की छंटनी का अभियान जारी रखते हुए अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन पद से दिनेश बस्सी को हटाकर नवजोत सिद्धू के करीबी दमनदीप सिंह उप्पल को नया चेयरमैन लगा दिया। इसके साथ ही बटाला इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन पवन पम्मा को भी पद से हटा दिया गया है। इससे पहले चन्नी ने पंजाब सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में भी कैप्टन के विशेष प्रमुख सचिवों को बदल दिया था।
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हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव सुरेश कुमार और राजनीतिक सलाहकार कैप्टन संदीप संधू ने कैप्टन के इस्तीफे के तुरंत बाद ही अपने पद छोड़ दिए थे। कमोबेश यही स्थिति नए मंत्रिमंडल गठन में भी सामने आ सकती है क्योंकि इस मामले में नए मुख्यमंत्री को सलाह देने का काम नवजोत सिद्धू ही कर रहे हैं, जिन्होंने डिप्टी सीएम के चयन के दौरान कैप्टन के करीबी मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा का नाम, शपथ ग्रहण से एक घंटा पहले हटवा दिया था। माना जा रहा है कि चन्नी मंत्रिमंडल में अब केवल वही चेहरे होंगे, जिन्होंने कैप्टन का खुलकर विरोध करते हुए नवजोत सिद्धू का साथ दिया था।
यह भी उल्लेखनीय है कि सोमवार को नए मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण के तुरंत बाद आयोजित पहली प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पंजाब भवन के कांफ्रेंस हॉल में उन सभी पोस्टरों को ढक दिया गया था, जिनमें कैप्टन की तस्वीर लगी थी। यही काम पंजाब के दोनों सचिवालयों में भी किया गया और विभिन्न विभागों में लगी कैप्टन की तस्वीरें और प्रचार पोस्टरों को हटा दिया गया है। सरकार और पार्टी में शुरू हुई इस उठापटक को सियासी गलियारों में हास्यास्पद भी माना जा रहा है क्योंकि सिद्धू और चन्नी राज्य में कैप्टन अमरिंदर सरकार के निशान नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी की सरकार के निशान मिटाने में जुट गए हैं।