फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   bye bye 2017, chandigarh industry year ender

अलविदा 2017: चंडीगढ़ इंडस्ट्री की हालत बदतर रही, मेक इन इंडिया कैसे बनेगा?

Thu, 28 Dec 2017 03:28 PM IST
अरविंद वाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
अरविंद वाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 28 Dec 2017 03:28 PM IST
विज्ञापन
bye bye 2017, chandigarh industry year ender
चंडीगढ़ इंडस्ट्री
वर्ष 2017 का आगाज चंडीगढ़ की इंडस्ट्री और व्यापार के लिए एक खराब दौर लेकर आया। नेताओं के वादों पर टिका चंडीगढ़ का उद्योग फिर से मायूस ही रहा। नोटबंदी की ऊहापोह में फंसी इंडस्ट्री जीएसटी के द्वंद्व में ऐसी उलझी कि साल निकल गया। नोटबंदी ने सिटी के व्यापारियों और उद्यमियों को एक लंबी कतार में खड़ा कर दिया तो दूसरी ओर जीएसटी ने व्यापार एकदम उथल पुथल कर दिया। वर्ष 2017 में व्यापारियों की उम्मीदों पर लगातार पानी फिरता रहा।
विज्ञापन


एक ओर नोटबंदी, फिर जीएसटी और इसके साथ ही हाईवे से पांच सौ मीटर की दूरी में शराब पर लगी पाबंदी के बीच व्यापार जगत में उतार चढ़ाव आता रहा। नाइट पार्टी में कमाई करने वाले डिस्कोथेक हों या फिर होटल और रेस्टोरेंट, उनका समय बीता अपनी उलझनों को सुलझाते सुलझाते। साल का अंत आते आते व्यापारियों और उद्यमियों को राहत मिली तो गाड़ी थोड़ी पटरी पर आई पर फिर भी व्यापारियों ने जो ख्वाब देखे थे वह अभी भी फाइलों में उलझे हुए रहे।
विज्ञापन


पॉल्यूशन, वायलेशन के मुद्दों के साथ चंडीगढ़ की इंडस्ट्री भी वर्ष 2017 में लीज होल्ड से फ्री होल्ड का इंतजार करती ही रह गई। ठहराव फिर भी नहीं मिला। हालांकि साल के अंत में जीएसटी के रेट्स कम होने से व्यापारियों और उद्योग ने राहत की सांस तो ली पर मुश्किलें अभी भी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल में रह गई ट्रेड वेलफेयर बोर्ड की हसरत
चंडीगढ़ के व्यापारियों द्वारा ट्रेड वेलफेयर बोर्ड बनाने की हसरत वर्ष 2017 के दौरान भी दिल में ही रह गई। इसे लेकर चंडीगढ़ के व्यापारियों ने नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक से मुलाकात की लेकिन अब तक ट्रेड वेलफेयर बोर्ड का गठन नहीं हो सका। ट्रेड वेलफेयर बोर्ड की मांग व्यापारी इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसके माध्यम से लगातार होने वाली मीटिंग के जरिए व्यापारी सिटी के व्यापारियों की समस्याओं को समझेंगे और उनके मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाएंगे।

अब तक बे शॉप को नहीं मिली है मंजूरी
चंडीगढ़ में व्यापार करने वालों को बे शॉप, सिंगल स्टोरी बिल्डिंगों को मंजूरी नहीं मिल सकी है। चंडीगढ़ के व्यापारी चार साल से इसके लिए मांग कर रहे हैं। एक व्यापारी के अनुसार चंडीगढ़ के ज्यादातर व्यापारी चाहते हैं कि बे शॉप और सिंगल स्टोरी बिल्डिंग को मंजूरी मिल जाए।

व्यापारियों को मिली एडवाइजरी काउंसिल में जगह
चंडीगढ़ के लिए अच्छी बात रही कि उनको एडवाइजरी काउंसिल में जगह मिल गई। इसमें अनिल वोहरा, कमलजीत सिंह पंछी और अरुण अग्रवाल हैं। उनको अबकी बार ही एडवाइजरी काउंसिल में जगह मिली है। इससे पहले एक ही व्यापारी को एडवाइजरी काउंसिल में शामिल किया जाता रहा है। इसी तरह अबकी बार नामिनेटेड काउंसलरों में चरंजीव सिंह, सत प्रकाश अग्रवाल और मोहम्मद खुर्शीद को शामिल किया गया।

कलेक्टर रेट भी नहीं दे सके हैं राहत

bye bye 2017, chandigarh industry year ender
स्क्रू इंडस्ट्री
कई वर्ष से चल रहा कलेक्टर रेट का मुद्दा और प्रापर्टी की खरीद फरोख्त भी वर्ष 2017 के दौरान ढीली रही। चंडीगढ़ में अभी भी व्यापारियों और रेजीडेंट्स के साथ उद्यमियों के लिए कलेक्टर रेट एक बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। रेजिडेंशियल में यह रेट्स पांच फीसदी कम किए गए हैं और कामर्शियल में दस फीसदी लेकिन इसकेबावजूद प्रापर्टी महंगी है और व्यापारी इसमें अब तक उलझे हुए हैं।

नहीं शिफ्ट हुई मंडी, भीड़ भी कम नहीं
चंडीगढ़ में ग्रेन मार्केट की मंडी वर्ष 2017 के दौरान शिफ्ट नहीं हो सकी है। चंडीगढ़ में मंडी को शिफ्ट करने की मांग काफी समय से की जा रही थी पर हालात यह हैं कि सेक्टर-39 में शेड्स आदि बनने के बावजूद मंडी को यहां से शिफ्ट नहीं किया जा सका। इसकी वजह से यहां लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है।

वर्ष 2017 का आगाज तो व्यापार के लिए खराब रहा। हालांकि जीएसटी पर हमको राहत मिली है। हमारी सत्तर फीसदी मांग मांगी जा चुकी है। आने वाले समय में हमको इसमें राहत की उम्मीद है। वहीं जीएसटी के आने के बाद सी फार्म की मुश्किलें भी कम हो गईं। हमको खुशी है कि हमारे तीन सदस्य एडवाइजरी काउंसिल में तीन नामिनेटेड काउंसलर बन चुके हैं।
- चरंजीव सिंह, चेयरमैन, चंडीगढ़ व्यापार मंडल

वर्ष 2017 में हमारे कुछ मुद्दों पर ही हमको राहत मिली। जीएसटी के लिए हमारी मुहिम से हमको काफी सफलता मिली और नतीजा सामने है। कुछ मुद्दे अभी भी प्रशासन के पास हैं। हां, चंडीगढ़ प्रशासन को कलेक्टर रेट के मुद्दे पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए। इसकी वजह से प्रापर्टी की खरीद फरोख्त में काफी अंतर आया है।
- अनिल वोहरा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ व्यापार मंडल

वर्ष 2017 में व्यापार का ज्यादा लाभ नहीं हो सका। यदि देखें तो व्यापारी उलझनों में ही उलझे रहे। जीएसटी ने काफी ज्यादा समय लिया। हालांकि अब काफी राहत है लेकिन जो समय निकला उससे व्यापार काफी प्रभावित हुआ। हां, एक बात और कि चंडीगढ़ में हमने अपने प्रयासों से कई मुद्दे प्रशासन के सामने रखे और उसका हमको अच्छा रिजल्ट भी मिला।
- नीरज बजाज, अध्यक्ष

अभी भी आशाओं पर टिकी है इंडस्ट्री
चंडीगढ़ में ढाई हजार औद्योगिक इकाइयां हैं, जिसमें से काम सिर्फ  एक हजार में होता है। इन औद्योगिक इकाइयों के लिए यह साल भी मांगों को बताते बताते ही बीता। इन औद्योगिक इकाइयों का पलायन इस साल भी जारी रहा और अब तीन साल में इनमें से 50 इकाइयों ने मोहाली, बद्दी और डेराबस्सी में शिफ्ट कर लिया।

लीज होल्ड प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड न करना

bye bye 2017, chandigarh industry year ender
सेनेटरी इंडस्ट्री
जरा से चेंज पर धड़ाधड़ नोटिस आना। शहर में इसे लेकर उद्यमी एकदम बेहाल हो चुके हैं। उद्यमियों ने इस मामले को चंडीगढ़ प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के सामने भी उठाया और इस मुद्दे को लेकर पीएमओ में पत्र भी लिखा। समाधान इस वर्ष भी नहीं मिल सका। चंडीगढ़ के उद्यमियों की माने तो यहां प्रति माह दो सौ नोटिस वॉयलेशन और मिसयूज के आते रहे, जिसमें लगातार बढोतरी होती जा रही है।

लीज होल्ड से फ्री होल्ड का मसला अटका
चंडीगढ़ में ज्यादातर इंडस्ट्रियल यूनिट्स लीज होल्ड हैं। कई उद्यमी अपने उद्योगों को छोड़ना चाहते हैं और दूसरी ओर कई ऐसे उद्यमी हैं जो कि अपनी इकाइयां लगाना चाहते हैं। लेकिन लीज होल्ड होने के कारण न तो उद्यमी प्रापर्टी सेल कर सकते हैं न ही दूसरे उसे खरीदने को तैयार होते हैं। उद्यमियों को प्रापर्टी पर लोन भी नहीं मिलता है। यह मसला भी मसला ही रह गया सुलझा नहीं।

कनवर्जन पॉलिसी ही नहीं आई
अबकी साल भी उद्यमियों के लिए कनवर्जन पॉलिसी नहीं आई। 2005 से 2007 तक चली कनवर्जन पालिसी ने चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया का हुलिया बदल डाला। इसके अंतर्गत करीब 150 इंडस्ट्रियल प्लाट का कनवजज़्न करवाया गया। इसके बाद यहां शॉपिंग मॉल्स, होटल्स और रेस्टोरेंट्स की चेन आ गईं। सेंट्रा मॉल, एलांते मॉल के साथ ही यहां कई अन्य आउटलेट भी शुरू हुए।

चंडीगढ़ के लिए वर्ष 2017 ज्यादा बेहतर नहीं रहा। चंडीगढ़ हाई वैल्यू सिटी है, जिसमें लेबर के चार्ज भी ज्यादा हैं। चंडीगढ़ से सटे औद्योगिक क्षेत्रों में लेबर की समस्या नहीं है। कास्ट भी इतनी ज्यादा नहीं है। अहम बात यह है कि इसे रोकना चाहिए था जो नहीं हुआ।
- दलीप शर्मा, डायरेक्टर, एसोचैम

वर्ष 2017 में भी हमारी प्रोडक्शन कास्ट में कोई कमी नहीं आइ। हमारी जो समस्याएं वर्ष 2016 में थीं वहीं अभी भी हैं। लीज होल्ड से फ्री होल्ड न होना यह हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या है। जिसकी वजह से उद्यमियों को लोन तक नहीं मिलता है। हमारी मांग है कि औद्योगिक इकाईयां लीज होल्ड से फ्री होल्ड करवाईं जाएं और उसमें रेट्स वाजिब हों।
- अमरपाल सिंह नरूला, उद्यमी

अबकी वर्ष नहीं पूरी हुईं यह मांग

bye bye 2017, chandigarh industry year ender
chandigarh industry - फोटो : demo pic
1. लीज होल्ड से फ्री होल्ड
2. इंडस्ट्री के लिए हो मास्टर प्लान
3. चंडीगढ़ में ग्रीन इंडस्ट्री
4. नीड बेस्ड चेंज की मांग
5-कनवर्जन पालिसी लाएं

वर्ष बेशक बदल रहा है पर हमारी मांगे नहीं। अब चंडीगढ़ की इंडस्ट्री में रहना भी मुश्किल हो चुका है। समझ में यह नहीं आता है कि इंडस्ट्रियल पालिसी को लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। हम काफी समय से इसके लिए परेशान हैं। जिस इंडस्ट्री ने सिटी को इतना नाम दिया उसे ही दरकिनार कर दिया गया है जो अटपटा सा लगता है।
- नवीन मंगलानी, अध्यक्ष, चैंबर आफ चंडीगढ़ इंडस्ट्री

चंडीगढ़ के उद्यमियों के लिए समस्याओं का निदान अब तक कर दिया जाना चाहिए था। बेशक मैं रेल मंत्री रहा और उस समय मेरे पास उद्यमी भी आए पर मैं इंडस्ट्री का भला नहीं कर सका। अभी भी मांग उनकी वही है। मेरे समय में तो चंडीगढ़ के प्रशासक शिवराज पाटिल थे लेकिन अब तो गवर्नर साहब भी अच्छे हैं। सरकार भी भारतीय जनता पाटी4 की है। ऐसे में मुझको समझ नहीं आता है कि उद्यमियों की मांग क्यों नहीं पूरी हो पा रही हैं।
- पवन कुमार बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री

हमने इंडस्ट्री के इश्यू को समाप्त करवाने की काफी कोशिश की है। चंडीगढ़ का मुख्य इश्यू था लीज होल्ड टू फ्री होल्ड। जिसमें रेजीडेंशियल में लीज होल्ड से फ्री होल्ड करवा दिया है। अब जहां तक इंडस्ट्री का सवाल है, हम इसमें भी लगे हैं। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द यह इश्यू साल्व हो जाए।
- सांसद किरण खेर, चंडीगढ़

हमारी नीड बेस्ड चेंज की मांग इस वर्ष भी पूरी नहीं हो सकी। नीड बेस्ड चेंज पर पेनल्टी लगाई जाती हैं। हमारी अलाटमेंट इतनी पुरानी है तो कम से कम हमें नीड बेस्ड चेंज के लिए अनुमति मिलनी चाहिए। हमारी अगली पीढ़ियां भी इसी काम में आ रही हैं। ऐसे में हमारे लिए काम करना काफी मुश्किल है।
- संजीव सिंगला, उद्यमी

देशभर में लीज होल्ड से फ्री होल्ड प्रापर्टी हो चुकी है। वर्ष 2017 में भी हम इसको लेकर जूझते ही रहे। चंडीगढ़ में ऐसा नहीं हो रहा है। ऐसा कोई प्वाइंट नहीं है कि जिसमें दिखाई दे कि इसे क्यों नहीं किया जा सकता है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड किया जाना चाहिए वह भी किफायती दरों पर, जिससे लोगों को लगे कि यह एक सुविधा है न कि टैक्स।
- विनोद मित्तल, उद्यमी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed