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2014 में राजनीति में आए बड़े अहम उतार-चढ़ाव

Mon, 29 Dec 2014 01:57 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 29 Dec 2014 01:57 PM IST
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Bye Bye 2014, Major Changes in Haryana-Punjab Politics

कई वर्षों से चले आ रहे शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अटूट रिश्ते की डोर अब कमजोर पड़ने लगी है। साल की शुरुआत से ही कुछ मुद्दों को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद थे। लोकसभा चुनाव के बाद हालात काफी बदल गए। केंद्र में अपने दम पर सत्ता में आने के बाद भाजपा सूबे में भी मुखर हुई।

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हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान तल्खी काफी बढ़ गई। साल बीतते गठबंधन में दरारें नजर आने लगी हैं। हालांकि, दोनों दलों केनेता गठबंधन को अटूट बता रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर अलगाव की चिंगारी सुलग रही है?
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प्रॉपर्टी टैक्स और एडवांस टैक्स पर मतभेद
साल की शुरुआत में ही शिअद और भाजपा के बीच प्रॉपर्टी टैक्स और एडवांस टैक्स को लेकर मतभेद हो गए थे। ये दोनों ही टैक्स सीधे-सीधे भाजपा के वोट बैंक को हिट कर रहे थे। इसके चलते भाजपा ने इनका विरोध किया। जिलों में प्रशासन और पुलिस महकमे में भाजपाइयों की अनदेखी का भी पार्टी विरोध करती रही। हालांकि, भाजपाइयों के सुर खास तीखे नहीं थे।

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लोकसभा चुनाव से बदले समीकरण

Bye Bye 2014, Major Changes in Haryana-Punjab Politics

लोकसभा चुनाव के बाद समीकरण बदलने लगे। भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली की हार से शिअद को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। दोनों दलों के नेता कुछ भी कहें, पर जेटली के मंत्रालय ने पंजाब से हाथ खींच लिया। धान की अदायगी रोकी गई, जिससे शिअद का वोट बैंक प्रभावित हुआ।

चुनाव के दौरान पूर्व डीजीपी पीएस गिल के भाजपा ज्वाइन करने पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने खुलकर विरोध जताया। उधर, केंद्र में सत्ता में आने के बाद प्रदेश भाजपा मुखर हो गई। सबसे पहले बलरामजी दास टंडन ने इस बात पर विरोध जताया कि सीएम प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मसलों पर पीएम से मिले, पर किसी भाजपा नेता को साथ लेकर नहीं गए।

हार के कारणों पर मंथन को लेकर बनी टंडन कमेटी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में अब भाजपा ने खुलकर सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया था। वहीं, टैक्सों के मुद्दे पर भाजपा के मंत्री अनिल जोशी खुलकर सरकार के विरोध में आ गए।

हरियाणा चुनाव में बढ़ी तल्खी

Bye Bye 2014, Major Changes in Haryana-Punjab Politics

अक्तूबर में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव केदौरान शिअद और भाजपा के बीच तल्खी काफी बढ़ गई। पंजाब में भाजपा की सांझीदार शिअद ने हरियाणा में इनेलो से गठबंधन किया, जो भाजपाइयों को नागवार गुजरा।

चुनाव प्रचार को हरियाणा पहुंचे नवजोत सिद्धू ने खुलकर शिअद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनके तीखे बयानों के बाद शिअद नेताओं ने भी जवाबी हमला बोला, जिससे दोनों पार्टियों के बीच तल्खी काफी बढ़ गई।

कठेरिया ने दिया अलगाव का संकेत
तल्खी के माहौल में पंजाब भाजपा के नए प्रभारी प्रो. राम शंकर कठेरिया नवंबर की शुरुआत में चंडीगढ़ पहुंचे। उन्होंने वर्करों की मीटिंग के दौरान अलगाव का साफ संकेत दे दिया।

कठेरिया ने वर्करों से कहा कि अगर वह 2017 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ना चाहते हैं, तो तैयारी में जुट जाएं। कठेरिया के दौरे से सियासत में भूचाल आ गया। हालांकि, बाद में अरुण जेटली, जेपी नड्डा और आखिर में अमित शाह ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि गठबंधन अटूट है।

नशे पर टकराव, मजीठिया का मांगा इस्तीफा

Bye Bye 2014, Major Changes in Haryana-Punjab Politics

इस साल की शुरुआत से ही ड्रग रैकेट छाया रहा, लेकिन भाजपा कभी शिअद के खिलाफ मुखर नहीं हुई। ईडी की ओर से बिक्रम मजीठिया को समन जारी होने पर भी भाजपा चुप रही, लेकिन पिछले दिनों एकाएक प्रदेश प्रधान कमल शर्मा ने मजीठिया के इस्तीफेकी मांग उठा दी।

हालांकि, सदन में पार्टी मजीठिया के साथ खड़ी रही। नशों के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच टकराव बढ़ा। पिछले दिनों पीएम ने मन की बात कार्यक्रम में पंजाब में नशों की समस्या का प्रमुखता से जिक्र किया।

इसके तुरंत बाद डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने पहले पीएम से मांग की कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से आ रही ड्रग्स को रोका जाए। फिर मांग की कि मध्य प्रदेश और हरियाणा में नशों की पैदावार पर रोक लगाई जाए।

इधर, भाजपा ने अमृतसर से नशों के खिलाफ अभियान की शुरुआत का ऐलान किया। उधर, सुखबीर ने 28 दिसंबर को घोषणा की कि नशों के खिलाफ  पार्टी केअभियान की अगुवाई वह खुद करेंगे। बीएसएफ पर दबाव बनाने के लिए शिअद सीमांत इलाकों में चार धरने देगी।

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