विधवा महिला बोली, नहीं चाहिए कोई मदद, खुद खड़ा करुंगी ढाबा
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उपद्रवियों ने विधवा महिला का ढाबा जला दिया। हिम्मत देखिए, लोगों की मदद लेने से इंकार कर दिया और कहती है कि अपना ढाबा खुद खड़ा करुंगी।
वाकई विधवा महिला की हिम्मत और मानवता की हर किसी को दाद देनी होगी। उसमें आज भी इतनी हिम्मत है कि वह किसी से मदद नहीं लेना चाहती है और खुद मेहनत करके ढ़ाबा शुरू कर रही है।
दरअसल, गांधी कैंप की गली नंबर दो में रहने वाली विधवा महिला चंचल का ढ़ाबा रेलवे फाटक के पास है। उसके पति सुनील कुमार ने उसे शुरू किया था, लेकिन डेढ़ साल पहले ही उनकी मौत हो गई और उसी समय से चंचल उस ढाबे को संभाल रही है।
शहर में उपद्रव की ऐसी आग भड़की कि ढ़ाबे को आग लगा दी गई। चंचल की दो बेटियां है और दोनों पढ़ रही है। परिवार चलाने का एकमात्र जरिया ढ़ाबा भी जल जाने के बावजूद चंचल ने हिम्मत नहीं हारी है।
लोग मदद के लिए रुपये देने पहुंचे, लेने से किया इंकार
इस बात का पता चलता ही शुक्रवार को जन सेवा संस्थान के विनोद गुप्ता व विनोद निझावन उसकी मदद करने के लिए ढाबे पर पहुंचे। वह चंचल को रुपये देकर मदद करना चाहते थे, लेकिन उसने रुपये लेने से इंकार कर दिया।
चंचल की इस हिम्मत को देखकर हर कोई दाद देने लगा, क्योंकि वह अपनी मेहनत से दोबारा ढाबा शुरू करना चाहती है। इसपर विनोद गुप्ता व विनोद निझावन ने उसको कहा कि बेटियों की शादी के समय वह कन्यादान के तौर पर उसकी मदद करेंगे।