{"_id":"e71356df27d096895a620d3381b5471d","slug":"book-release-in-memory-of-dr-sudha-jain","type":"story","status":"publish","title_hn":"कवयित्री सुधा जैन को समर्पित ‘सुधा स्मृति’ विमोचित ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कवयित्री सुधा जैन को समर्पित ‘सुधा स्मृति’ विमोचित
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Nov 2013 11:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के प्रधान सचिव डॉ. केके खंडेलवाल ने सेक्टर-27 के श्री दिगंबर जैन मंदिर में कवयित्री डॉ. सुधा जैन की स्मृति में प्रकाशित पुस्तक ‘सुधा स्मृति’ का विमोचन किया।
264 पन्नों की पुस्तक को डॉ. सुधा जैन की पहली पुण्यतिथि के उपलक्ष्य प्रकाशित किया गया है। इसका संपादन उनकी पुत्रवधू अनुपमा जैन ने किया। पुस्तक तीन खंडों में विभाजित है।
इसके पहले खंड में डॉ. सुधा जैन के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप परिजनों और करीबी लोगों के लेख प्रकाशित किए गये हैं। इसके दूसरे खंड में वरिष्ठ साहित्यकारों ने डॉ. सुधा के जीवन पर स्मृतियों को प्रकाशित किया है और तीसरे खंड में डॉ. सुधा जैन की चुनिंदा 11 कृतियों को प्रकाशित किया गया है।
विज्ञापन
डॉ. खंडेलवाल ने कहा कि डॉ. जैन ने एक कवयित्री के रूप में जहां समाज को आइना दिखाया, वहीं कथाकार और चिंतक के रूप में मार्गदर्शन किया।
उन्होंने अपने सौम्य करुणामय एवं उदात्त व्यक्तित्व से हिंदी साहित्य के अनेक युवा रचनाकारों को निरंतर प्रेरित किया। वे स्वयं भी डॉ. सुधा जैन की कहानियों एवं लेखनी से काफी प्रभावित हुए। डॉ. सुधा ने अपनी लेखनी से समाज को संदेश देने का प्रयास किया। उनकी व्यंग्यपूर्ण शैली अद्भुत है।
समारोह में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय कुमार मित्तल, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, पीजीआई नेत्र विभाग के प्रमुख डॉ. अमोद गुप्ता, हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक श्याम सखा ‘श्याम’, साहित्यकार सुभाष रस्तोगी, डॉ. राधेश्याम शर्मा और विरेंद्र मेहंदीरत्ता ने भी संबोधित किया। इसके अलावा डॉ. सुधा जैन के परिवार से उनकी पुत्र वधु अनुपमा जैन, सोनिया जैन, पोते अक्षयदीप तथा प्रदीप जैन ने भी समारोह को संबोधित किया।
विज्ञापन
264 पन्नों की पुस्तक को डॉ. सुधा जैन की पहली पुण्यतिथि के उपलक्ष्य प्रकाशित किया गया है। इसका संपादन उनकी पुत्रवधू अनुपमा जैन ने किया। पुस्तक तीन खंडों में विभाजित है।
विज्ञापन
इसके पहले खंड में डॉ. सुधा जैन के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप परिजनों और करीबी लोगों के लेख प्रकाशित किए गये हैं। इसके दूसरे खंड में वरिष्ठ साहित्यकारों ने डॉ. सुधा के जीवन पर स्मृतियों को प्रकाशित किया है और तीसरे खंड में डॉ. सुधा जैन की चुनिंदा 11 कृतियों को प्रकाशित किया गया है।
विज्ञापन
डॉ. खंडेलवाल ने कहा कि डॉ. जैन ने एक कवयित्री के रूप में जहां समाज को आइना दिखाया, वहीं कथाकार और चिंतक के रूप में मार्गदर्शन किया।
उन्होंने अपने सौम्य करुणामय एवं उदात्त व्यक्तित्व से हिंदी साहित्य के अनेक युवा रचनाकारों को निरंतर प्रेरित किया। वे स्वयं भी डॉ. सुधा जैन की कहानियों एवं लेखनी से काफी प्रभावित हुए। डॉ. सुधा ने अपनी लेखनी से समाज को संदेश देने का प्रयास किया। उनकी व्यंग्यपूर्ण शैली अद्भुत है।
समारोह में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय कुमार मित्तल, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, पीजीआई नेत्र विभाग के प्रमुख डॉ. अमोद गुप्ता, हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक श्याम सखा ‘श्याम’, साहित्यकार सुभाष रस्तोगी, डॉ. राधेश्याम शर्मा और विरेंद्र मेहंदीरत्ता ने भी संबोधित किया। इसके अलावा डॉ. सुधा जैन के परिवार से उनकी पुत्र वधु अनुपमा जैन, सोनिया जैन, पोते अक्षयदीप तथा प्रदीप जैन ने भी समारोह को संबोधित किया।